भारती संग्रहिता ज्ञान का संग्रह कर ज्ञान बांट भी रहीं…6 सेंटरों में 6 हजार स्टूडेंट्स हो चुके लाभान्वित…
शिक्षा और रोजगार आपको अगर 1 रुपए में अर्जित करना है तो भारती संग्रहिता आपके लिए हैं उचित प्लेटफॉर्म
दिलीप कुमार पुरोहित. राखी पुरोहित. जोधपुर
9783414079 diliprakhai@gmail.com
सपने…संघर्ष…उड़ान… सफलता..ये चार शब्द। इन चार शब्दों में आज हम एक ऐसी महिला को खोजने जा रहे हैं जो उच्च शिक्षण की दहलीज पार कर चाहती तो उच्च नौकरी हासिल कर सफल जीवन व्यतीत कर सकती थीं। मगर यह वो महिला है जिसके लिए सफलता निजी नहीं होकर सामाजिक है…हम बात भानुप्रिया भट्ट की करने जा रहे हैं, जिनका परिचय आगे आपके सामने स्पष्ट होगा जब उनकी जिंदगी और उपलब्धियों के पन्नों को एक-एक कर खोलेंगे। माता-पिता सामान्य परिवार से। दो बहनें और एक भाई। भानुप्रिया भट्ट ने पहले संघर्ष किया…उच्च शिक्षा अर्जित की… फिर नौकरी के अच्छे ऑफर आए और सफलता की राह खुली, पर वे सफलता को अलग ही नजरिये से देख रही थीं और उनके लिए सफलता के मायने कुछ अलग ही थे, इसलिए उन्होंने फिर से संघर्ष का रास्ता अपनाया, उड़ान भरनी चाही और उन्हें जो कुछ मिला उसे दुनिया सफलता नहीं मानती मगर भानुप्रिया को अपने फैसले पर सुकून है। आज भानुप्रिया शिक्षा-शिक्षण-समाजसेवा और वंचित वर्ग के लिए एक प्रेरणा है। उन्होंने अपनी संस्था भारती संग्रहिता के माध्यम से समाज को एक मूल मंत्र दिया है- ”रन फॉर वन”…।
रन फॉर वन क्या है? भानुप्रिया बताती हैं कि हमने एक मिशन शुरू किया- एक रुपए में पढ़ाई…। समाज के वंचित वर्ग के बच्चों को कक्षा पहली से बारहवीं तक एक रुपए में एजुकेट करने का हमने क्रांतिकारी निर्णय लिया…। यानी नंबर वन पर रहना…यही है रन फॉर वन… जब हमने यह निर्णय लिया तो लोग हंसे…इसे पागलपन करार दिया…। भानुप्रिया बताती हैं कि हमने परवाह नहीं की। हमारे सामने हमारा समाज था, हमारा परिवेश था…हमारे वंचित और मध्यम और गरीबी रेखा से नीचे के उन परिवारों के बच्चे थे जिनके भीतर हजारों सपने अंगड़ाई ले रहे थे, मगर उन्हें कोई रास्ता नजर नहीं आता था। हमने तय किया कि हम बनेंगे उनकी राह के दीपक। उस पथ के पथिक बनने का हमने निर्णय लिया। इस कार्य में मेरी गुरु मां सारिका ओझा और माताजी ललिता भट्ट ने सहयोग किया। जब यह निर्णय लिया तो रास्ता आसान नहीं था। फिर क्या हुआ?
11-11-2011 और 11 बालिकाएं…किराये के छोटे से कमरे से शुरुआत
हमने 11 नवंबर 2011 को 11 बालिकाओं के साथ किराये के छोटे से कमरे से शुरुआत की। उस दिन राष्ट्रीय शिक्षा दिवस भी था। हमने वो पौधा लगाया। तब उम्मीदें और हौसला ही हमारे अंजुरि में थे। हमने बड़ा कैनवास रखा मगर रंग भरने अभी बाकी थे। हमने जी तोड़ मेहनत की। 11 बालिकाओं को पढ़ाना शुरू किया तो लोगों को ध्यान हमारी तरफ गया। जब भी समाज में कोई क्रांति की शुरुआत होती है तो वह अकेले ही होती है। शुरुआत अभाव और अकेलेपन से ही होती है। मगर कालांतर में राह मिलती है और कारवां बढ़ता है। हमारे साथ भी ऐसा ही हुआ। आज हमारे छह सेंटर है। बड़ली भैरूजी में तीन, सूरसागर में एक, चांदपोल में एक और सरदारपुरा में एक सेंटर है।
सरदारपुरा…पॉश इलाका…सेंटर तो सही जगह पर समस्या गंभीर- अंडरग्राउंड में भर जाता है पानी
जब हम भानुप्रियाजी का इंटरव्यू लेने पहुंचे। तो बारिश का मौसम था। आसमां में घनघोर घटाएं थीं और हल्की बूंदाबांदी से शहर की सड़कें भींग रही थीं। दो तीन दिन से बारिश का सिलसिला चल रहा था। भारती संग्रहिता का एक सेंटर सरदारपुरा जैसे पॉश इलाके में हैं। यहां पर एक गंभीर समस्या हैं। वैसे यह समस्या इस सेंटर की ही नहीं पूरे इलाके की है, यहां अंडरग्राउंड में पानी आ जाता है। यह पानी कभी भी आ जाता है। तो जब हम इंटरव्यू लेने पहुंचे तो अंडरग्राउंड में पानी भरा हुआ था और इस वजह से बच्चों की छुट्टी करनी पड़ी। जहां यह सेंटर है वह स्टूडेंट्स के लिए सुविधाजनक है। इसलिए वे आसानी से यहां आ सकते हैं। इसलिए भानुप्रिया जी इस सेंटर को परेशानी के बावजूद छोड़ना नहीं चाहती। यहां सेंटर में पानी भरा होने की वजह से हमारी भानुप्रिया जी से बातचीत सामने ही काफी हाउस में हुईं।
सभी छह केंद्रों से 6000 विद्यार्थी लाभान्वित, कई स्टूडेंट्स ने कायम की मिसाल
भारती संग्रहिता के सभी छह केंद्रों से 6000 विद्यार्थी लाभान्वित हुए हैं। बालिका शिक्षा के तहत बालिकाओं को शिक्षा प्रदान कर उनके भविष्य को नई दिशा दी गई। विज्ञान विषय की शिक्षा का शुल्क अधिक होने पर बालिकाओं को विज्ञान विषय नहीं दिलाया जाता है। हमने सतत प्रयास व संपर्क किया। हमारे मार्गदर्शन से विज्ञान विषय को छात्राएं सरलता से पढ़ने लगीं तथा परिवार के लोगों ने भी उन्हें पढ़ने को प्रेरित किया। छात्र खाली हाथ आते हैं और ज्ञान से परिपूरित होकर जाते हैं। शिक्षा से सक्षम एवं स्वावलंबन के उद्देश्य को एक साकार रूप देने का हमारा प्रयास जारी है।
11 साल में हमारे कदम बढ़े, यात्रा जारी, अभी थके नहीं
6 डॉक्टर : हमारे प्रयास से छह स्टूडेंट्स सरकारी डॉक्टर बने।
2 सीए : 2 छात्र चार्टर्ड अकाउंटेंट बने।
2 का आईआईटी में सलेक्शन हुआ और वे इंजीनियर बने।
कई बालिकाएं और स्टूडेंट्स अस्पतालों में नर्सिंग सेवाएं दे रहे हैं।
पुलिस, रेलवे, स्कूलों में टीचर बन हमारे स्टूडेंट्स सेवाएं दे रहे हैं।
लघु उद्योग की दिशा में बढ़ते कदम, सहकारिता से आत्मनिर्भरता की ओर
भानुप्रिया भट्ट बतातीं हैं कि हमने लघु उद्योग की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। हमारा उद्देश्य बच्चों को शिक्षा के साथ रोजगार भी उपलब्ध करवाना है। इसलिए हमने तय किया कि स्टूडेंट्स के हुनर को आगे बढ़ाया जाएं। हम एक ओर बच्चों में स्किल डेवलप करते हैं और उन्हें उच्च शिक्षण में मदद करते हैं, वहीं प्रतियोगिता परीक्षाओं के फॉर्म भरवाते हैं। इंटरव्यू की तैयारी करवाते हैं। साथ ही साथ बच्चों को रोजगार से जोड़ने का उपक्रम हमने शुरू किया है। कैसे? स्पष्ट करें…भानुप्रिया बताती हैं-
हम बाजरे के आटे की कुकीज बनवाते हैं। हर्बल टी बनवाते हैं। इसके लिए घरों में पौधे लगाए हैं। चिप्स की जगह हेल्दी स्नेक्स को मार्केट में उतारा है। लोग हर्बल टी को विशेष रूप से पसंद कर रहे हैं। बाजरे के आटे की कुकीज को पसंद कर रहे हैं। यह शुगर पेशेंट के लिए गुणकारी हैं। कई रोगों में फायदेमंद हैं। हमने घर-घर संपर्क कर और कुछ मित्रों और स्टूडेंट्स के सहयोग से शुरुआत की है।
सरकार और भामाशाहों से अपेक्षा :
1-जगह की समस्या : हमारे सेंटरों को विकसित करने के लिए अच्छी जगह की जरूरत है। दानदाता और भामाशाह आगे आएं तो हमारा सपना पूरा हो सकता है। दरअसल यह हमारा सपना नहीं हमारे समाज के लिए हमारे द्वारा देखा सपना है। अगर जगह मिल जाए और बिल्डिंग बन जाए तो हमारा काम आसान हो सकता है।
2-आत्मनिर्भर महिलाएं-स्टूडेंट्स : हम चाहते हैं महिलाएं और स्टूडेंट्स आत्मनिर्भर बनें। इसके लिए लघु उद्योग की शुरुआत की है। अगर सरकार हमें अमृता हाट बाजार में स्टॉल दें। हमें मेलों में निशुल्क या रियायती दर पर स्टॉल दें तो हम हमारे लघु उद्योग को बढ़ा सकते हैं। ताकि स्टूडेंट्स और महिलाओं को रोजगार मिल सकें।
जिन्होंने मुकाम बनाया, वो अब अपने जैसे स्टूडेंट्स को राह दिखा रहे
भानुप्रिया बतातीं हैं जिन स्टूडेंट्स ने हमारे यहां अध्ययन कर खुद मुकाम बनाया, वे अब हमारे सेंटरों पर निशुल्क सेवाएं देकर अपने जैसे स्टूडेंट्स को राह दिखा रहे हैं। उनका कहना है कि जब हमें जरूरत थीं तो भानुप्रिया जी ने मदद की, अब हम इन सेंटरों पर सेवा देकर गुरु दक्षिण देंगे।
सफलता का वो पहला अहसास, जब प्रतिष्ठित अखबार में जगह मिली
मात्र 1 रुपए में शिक्षा देने का कार्य कर रही है भारत की बेटी भानु प्रिया भट्ट… राजस्थान पत्रिका में जब यह खबर आईं तो समाज के लोगों ने बहुत प्रशंसा की। भारती संग्रहिता के अथक प्रयासों से परीक्षा परिणाम, सांस्कृतिक कार्यक्रम, शिक्षा के प्रति जागरूकता के लिए गीत, कविता, नाटक को रच कर लोगों के समक्ष प्रस्तुत कर उनके हृदय में शिक्षा की अलख जगाने का प्रयास अनवरत चल रहा है। भारती संग्रहिता पर अब लोगों को गर्व है। हमारे हौसले की प्रशंसा करते हैं। समाचार पत्र, जीटीवी पर इंटरव्यू, रेडियो एफएम पर कार्य की प्रशंसा होती रहती है। भानुप्रिया बतातीं हैं कि यह कार्य हमने प्रशंसा के लिए नहीं समाज में अच्छे परिणाम की भावना से किया। जब परिणाम अच्छे आते हैं तो प्रशंसा स्वत: मिलती हैं।
संक्षिप्त परिचय :
नााम – भानुप्रिया भट्ट
पिता – शिवकुमार भट्ट
माता – ललिता भट्ट
पद : संस्थापक, अध्यक्ष
भारती संग्रहिता शिक्षा विकास संस्थान
शिक्षा : बीएससी (लाचू कॉलेज), एमबीए, एक्सपोर्ट-इंपोर्ट में डिप्लोमा, कंप्यूटर एजुकेशन में डिप्लोमा, वाइल्ड एंड नेचर एजुकेशन में डिप्लोमा
रुचि व शौक : आर्ट एंड क्राफ्ट, हार्मोनियम बजाना, लेखन, घूमने का शौक, ट्रैकिंग पर जाना।
पुरस्कार एवं उपलब्धियां :
1. Zee news पर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कहानी का प्रदर्शन किया गया।
2. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योर स्टोरी वेबसाइट पर प्रेरक जीवनी का online प्रकाशन।
3. राजस्थान पत्रिका व दैनिक भास्कर में जीवनी व भारती संग्रहिता के कार्यों का प्रकाशन।
4. 92.7 FM, रेडियो मिर्ची FM पर साक्षात्कार।
5. जोधपुर के पूर्व नरेश गजसिंह व राज्य सभा सांसद नारायण लाल पंचारिया द्वारा “वीर दुर्गादास राठौड़” सम्मान से सम्मानित।
6. पूर्व महापौर रामेश्वर दाधीच द्वारा “युवा प्रतिभा सम्मान”।
7. Amit memorial trophy से सम्मानित।
8. उड़ान संस्था द्वारा श्रेष्ठ व्यक्तित्व का सम्मान।
9. सर्व ब्राह्मण द्वारा “परशुराम सम्मान”।
10. LIFT द्वारा महिला दिवस पर “great women award”
11. Rotary club द्वारा “श्रेष्ठ शिक्षिका सम्मान”
12. श्रीमाली संस्था द्वारा “समाज रत्न सम्मान”
13. समाज रत्न पुस्तिका में जीवन परिचय का प्रकाशन।
14. “Women empowerment and most talented girl award 2019” से सम्मानित।
15. Rotary club द्वारा “OUTSTANDING TEACHER AWARD 2019” से सम्मानित।
16. लघु उद्योग भारती महिला इकाई जोधपुर द्वारा सम्मान।
17. राजस्थान पत्रिका द्वारा international women entrepreneur day पर successful women entrepreneur सम्मान।
18. Innovation in teaching award 2023 by rotary club of midtown.
19. Sant Ishwar award.
20. AVM school smman.
21 shrimali samaj samman.
विशेष उपलब्धि :
1-उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने निवास स्थान पर सेवा कार्यों की प्रशंसा करते हुए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
2-दिल्ली के भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम ऑडिटोरियम, एनएससी कॉम्प्लेक्स, पूसा मे आयोजित भव्य कार्यक्रम में ओम बिरला (लोकसभा स्पीकर), सुरेश भैया जोशी (सदस्य, अखिल भारतीय कार्यकारिणी मंडल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ), डॉ. जितेंद्र सिंह (केंद्रीय राज्य मंत्री (इंड.प्रभार) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; एमओएस पीएमओ, पीपी/डीओपीटी, परमाणु ऊर्जा,अंतरिक्ष), स्वामी चिदानंद सरस्वती (अध्यक्ष, परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश), एवं कपिल खन्ना (ट्रस्टी संत ईश्वर फाउंडेशन, अध्यक्ष संत ईश्वर सम्मान समिति) ने महिला एवं बाल विकास श्रेणी के अंतर्गत प्रतीक चिन्ह, शाल के साथ भारती संग्रहिता की अध्यक्षा भानुप्रिया भट्ट को “संत ईश्वर विशिष्ट सेवा सम्मान” पुरस्कार देकर सम्मानित किया।
त्याग : जब सेंटर की फीस भरने अपना कॅरियर दांव पर लगा दिया
भानुप्रिया भट्ट बतातीं हैं कि कोरोना काल में जामनगर में मेडिकल प्लांट के लिए एमएससी के कोर्स के लिए उन्हें 1 लाख रुपए फीस भरनी थी। वह मुश्किल घड़ी थी। उन्हें सेटर के लिए किराया चुकाना था। उन्होंने अपना कॅरियर दांव पर लगा अपनी निजी बचत की 1 लाख रुपए की राशि सेंटर के किराए में भर दी ताकि गरीब बच्चे पढ़ सकें।
भानुप्रिया का सपना : जोधपुर में एक ऐसा स्थान हो जो राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाए
भानुप्रिया भट्ट बताती हैं कि सरकार और भामाशाह उनकी मदद को आगे आए तो वह चाहती हैं कि जोधपुर में एक ऐसा स्थान हो जो राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाए।
भारती संग्रहिता से निकली प्रेरक कहानियां :
केस : वन : जब पढ़ने के लिए घने बाल काट दिए
भानुप्रिया भट्ट एक किस्सा बतातीं हैं। एक लड़की थी। 12वीं में साइंस लेना चाहती थीं। पैसे नहीं थे। हमने मदद की। मगर उसका रिश्ता तय होने जा रहा था। लड़का देखने आया। वह लड़की शादी करने की बजाय पढ़ना चाहती थीं। कहीं शादी तय नहीं हो जाए इसलिए उसने रात को कैंची से अपने सारे बाल ही काट दिए। जब लड़का देखने आया तो उसे नापसंद कर दिया। इस तरह वह लड़की साइंस में 80 प्रतिशत नंबरों से पास हुई और अभी शहर के प्रतिष्ठित प्रतिष्ठान में जॉब कर रही हैं।
केस : टू : जब कुली का लड़का सरकारी डॉक्टर बन गया
भानुप्रिया बतातीं हैं कि एक कुली का लड़का हमारे सेंटर पर पढ़कर सरकारी डॉक्टर बन गया। वह ठेठ मरुस्थलीय बाड़मेर क्षेत्र से आता था। कुली पिता के लिए अपने बेटे को डॉक्टर बनाना आसान नहीं था। लड़के में पढ़ने की ललक थी। कुछ बनने का जज्बा था। हमने उसके टैलेंट को निखारा। स्किल डेवलेप की और आखिर वह सरकारी डॉक्टर बन गया। कुछ समय तक उसने डॉक्टर बनने के बाद भी हमारे सेंटर पर अपने जैसे लड़कों को पढ़ाया और उसकी मदद से 2 लड़कियां नर्सिंग कोर्स कर सकीं।
11 साल में बच्चों से सीखी 100 काम की बातें :
भानुप्रिया बतातीं हैं कि 11 साल में बच्चों को पढ़ाते-पढ़ाते वह खुद बच्चों से सीखती रहीं। इन 11 सालों मे उन्होंने बच्चों से 100 काम की बातें सीखीं जो इस प्रकार हैं-
1 किताबों से मित्रता 2 भावनात्मक बुद्धिमता 3 कुशल संचारक 4 स्वमूल्यांकन 5 वित्तीय प्रबंधन 6 समय प्रबंधन 7 असीमित 8 मजाकिया 9 लचीलापन 10 नहीं कहना 11 हंसना 12 नवीनता 13 गिरकर उठना 14 संगठन 15 लक्ष्य प्राप्त करना 16 भेदभाव रहित 17 चिंतामुक्त 18 रूठों को मनाना 19 सदैव सीखना 20 ऊर्जावान 21 क्षमाशील 22 प्रभावी व्यक्तित्व 23 जिम्मेदार 24 जागरूक 25 निष्पक्ष 26 हर हाल में खुश 27 आत्मविश्वास 28 अपमान न समझना 29 दया 30 आशावादी 31 खेलना 32 सरलता 33 अदम्य साहस 34 समर्पण 35 स्पष्टवादिता 36 आशातीत कार्य 37 ध्यान रखना 38 अस्थाई गुस्सा 39 प्रकृति प्रेमी 40 विश्वास करना 41 एकाग्रता 42 समय पालन 43 संचय करना 44 निंदा न करना 45 बांटना और देना 46 आत्मनिर्भर 47. अपेक्षा न करना 48. आंकलन करना 49 आध्यात्मिक 50 अनुकरणशील 51 नेतृत्व 52 धैर्यवान 53 उत्सव मनाना 54 खतरा उठाना 55 सुख भरी नींद 56 श्रोता 57 सलाह लेना 58 रोग-चिंता से मुक्त 59 प्रतिक्रियाशील 60 कार्य सौंपना 61 चयनात्मक शक्ति 62 कब ठहरना-चलना 63 अग्रसकिय 64 अधिक करके दिखाना 65 संतुलन 66 विश्लेषण 67 तकनीक से मित्रता 68 स्वेच्छा से कार्य 69 प्रोत्साहित करना 70 परिणाम में रुचि 71 स्वस्थ मनोरंजन 72 कहानी सुनना 73 सबका विकास चाहना 74 सहयोग करना 75 पवित्र मन 76 भ्रमण प्रिय 77 छोटी सी दुनिया 78 परवाह करना 80 चरित्र निर्माण 81 प्राथमिकता तय करना 82 घर की रौनक 83 संवेदनशील 84 रुचिपूर्ण कार्य करना 85 वर्तमान में जीना 86 कुशल कलाकार 87 कल्पनाशील 88 मार्गदर्शन प्राप्त करना 89 कोमलता 90 देखभाल करना 91 निरंतरता 92 प्रबंधन क्षमता 93 जिज्ञासु 94 जन्मदिन मनाना 95 मजबूत मानसिक शक्ति 96 मूल रूप से अपनाना 97 गंभीरता में भी सहज रहना 98 प्रेरकपुंज 99 उत्साही 100 नई शुरुआत करना।
भारती संग्रहिता की ऐसे कर सकते हैं छोटी सी मदद :
-आप प्रतिमाह ₹500 की राशि एक पुस्तकालय की स्थापना के लिए या किसी सेमिनार या रोजगार उन्मुख सेमिनार या किसी गतिविधि का आयोजन करने के लिए दे सकते हैं।
-किसी एक बच्चे की शिक्षा को पूरे वर्ष के लिए पूर्ण करने की जिम्मेदारी उठा सकते हैं या किसी योग्य विद्यार्थी की उच्च शिक्षा में मदद कर सकते हैं।
-आप भारती संग्रहिता के किसी एक केंद्र को पूरे वर्ष तक गोद लेकर उसकी न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु सहयोग कर सकते हैं।
-आप स्टेशनरी बैंक में कॉपी, किताबें, पेंसिल, पेन कलर, कलर बुक आदि सामग्री उपलब्ध करवा कर स्टेशनरी बैंक में अपनी सहायता दे सकते हैं।
-आज के युवा पीढ़ी यदि स्वयंसेवक बनाकर संस्था से जुड़ें और आने वाले भविष्य निर्माण में अपनी सहायता और थोड़ा सा समय दें।
-आप खुले दिल से अधिक से अधिक जितना सहयोग कर सकें, कृपया सहयोग करें, कम से कम आप प्रत्येक महीने मात्र ₹100 की राशि या पूरे वर्ष की ₹1200 की राशि एक साथ देकर भी शिक्षा के क्षेत्र में किए गए पुनीत कार्य में अपना योगदान कर सकते हैं। यह ₹100 हम ऐसे ही किसी काम में खर्च कर देते हैं, लेकिन किसी की शिक्षा के लिए यह काम आए, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए हम सहायता कर सकें तो इस पुनीत कार्य को आगे बढ़ा पाएंगे।
अकाउंट संबंधी विवरण :
Account no. -: 24970100014935
Account name -: BHARTI SANGRAHITA SHIKSHA VIKAS SANSTHAN JODHPUR
Ifsc -: BARB0 JODCHA (fifth character is zero)
Bank -: BOB, chandpole
Gpay -: 9587085067











