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Friday, April 17, 2026, 1:40 pm

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व्यंग्य : मोबाइल के खिलाफ एफआईआर : रचनाकार- हरसहाय हर्ष

मोबाइल के खिलाफ एफआईआर

व्यंग्यकार : हरसहाय हर्ष
…पहले घड़ी आई फिर रोता बिलखता ये कैमरा। “अरे बताओ तो सही, किसने तुम्हे बेरोजगार कर दिया, किसने बर्बाद किया?” साहब ने उन दोनों से तसल्ली से बताने का अनुरोध किया। उनका वार्तालाप चल ही रहा था कि तभी अंगुलियों पर हिसाब किताब लगाता हुआ कैलकुलेटर भी वहां आ गया “अरे अब तुम्हे क्या शिकायत. है?” “साहब बोले। “साहब मेरी रिपोर्ट लिखो, उसने मेरा सारा हिसाब किताब बिगाड कर रख दिया है, मेरी तो कोई वेल्यू ही नहीं छोड़ी उसने।” इंस्पेक्टर साहब खड़े-खड़े एक तरह से गिरते हुए सीट पर बैठ गए।…तभी बाहर से संतरी भागता हुआ साहब के ऑफिस में घुसा, “सर…. सर… बाहर टार्च, रेडियो, और अखबार अपने अपने लोगों के साथ मुर्दाबाद- मुर्दाबाद के नारे लगा रहें हैं, हमें न्याय दो, उसने हमारा काम छीन लिया…

इंस्पेक्टर साहब अपने ऑफिस में बैठे थे, तभी अपने चेहरे का हाव-भाव बिगाड़े घड़ी ऑफिस में आई। “साहब … साहब, मेरे साथ अन्याय हुआ है” घड़ी परेशान होते हुए अपनी व्यथा सुनाने लगी। “अरे…अरे क्या हो गया? पूरी दुनिया को वक्त बताने वाली घड़ी के चेहरे पर बारह क्यो बजे हुए हैं?” इंस्पेक्टर साहब बीच में बात काटते हुए बोले। “क्या बताऊं सर, भले ही मैं पूरी दुनिया को वक्त बताती हूं, लेकिन मेरा पूरा वक्त ही बिगाड़ दिया उस कमीने ने, मेरा बुरा वक्त ला दिया है उसने” घड़ी दुखी होते हुए अपनी बात बताने लगी।

तभी अपनी शक्ल बिगाड़े कैमरा भी वहां आ गया।” इंस्पेक्टर साहब, मेरा रोजगार छीन लिया उसने, मुझे तो बर्बाद ही कर दिया, मैं तो लुट गया”। साहब कुछ समझ नहीं पाए रहे थे कि आखिर हुआ क्या है? पहले घड़ी आई फिर रोता बिलखता ये कैमरा। “अरे बताओ तो सही, किसने तुम्हे बेरोजगार कर दिया, किसने बर्बाद किया?” साहब ने उन दोनों से तसल्ली से बताने का अनुरोध किया। उनका वार्तालाप चल ही रहा था कि तभी अंगुलियों पर हिसाब किताब लगाता हुआ कैलकुलेटर भी वहां आ गया “अरे अब तुम्हे क्या शिकायत. है?” “साहब बोले। “साहब मेरी रिपोर्ट लिखो, उसने मेरा सारा हिसाब किताब बिगाड कर रख दिया है, मेरी तो कोई वेल्यू ही नहीं छोड़ी उसने।”

इंस्पेक्टर साहब खड़े-खड़े एक तरह से गिरते हुए सीट पर बैठ गए। साहब समझ नहीं पा रहे थे कि ये किस की कंप्लेंट करने आयें हैं। साहब उनकी एक एक करके बात सुनने की कह ही रहे थे तभी बाहर से संतरी भागता हुआ साहब के ऑफिस में घुसा, “सर…. सर… बाहर टार्च, रेडियो, और अखबार अपने अपने लोगों के साथ मुर्दाबाद- मुर्दाबाद के नारे लगा रहें हैं, हमें न्याय दो, उसने हमारा काम छीन लिया, हमें बर्बाद कर दिया है, उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करो आदि नारेबाजी कर रहें हैं”

संतरी ने हांफते हुए साहब को हालात निवेदन किए। साहब जो अभी तक ज्यादा गंभीर नहीं थे अब उनको लगा कि कोई बड़ा लफड़ा है। वो तुरंत उन तीनो के साथ बाहर आये, “अरे क्या हुआ तुम्हारे साथ? किसकी शिकायत दर्ज करवाने आए हो”? भीड के पास आकर इंस्पेक्टर साहब ने उनसे पूछा। तभी रेडियो चिल्लाते हुए बोला ” सर क्या आपको पता नहीं है हमारा ये हाल किसने किया है? किसने हमें वर्तमान से इतिहास बना दिया है, पहले कैसे हर गांव हर चौपाल में मुझे ध्यान से सुना जाता था।” तभी अखबार बोला “साहब उसने मेरा भी महत्व कम कर दिया है।” टार्च बोलने ही वाला था, तभी इंस्पेक्टर साहब बोल पड़े, ” अरे कौन है वो नाम तो बताओ उसका?”

“मोबाइल है साहब, वो लुटेरा, जिसने हम सबको लूटा है, बर्बाद किया है।” लगभग काफी सारी आवाज ने एक साथ चिल्लाते हुए कहा। इंस्पेक्टर साहब समझ चुके थे, पूरा मैटर अब उनके समझ में आ गया था। लेकिन बड़ी बात यह है कि इन सबने तो अपने हक के लिए आवाज उठा दी थी, लेकिन एक हम इंसान हैं जो अपने हक की आवाज ही नहीं उठाते है, इसी मोबाइल ने इंसान को कितना बर्बाद किया है, इस मोबाइल का काम सिर्फ बात कराना था , इसने इंसान को इंसान से दूर रहना सिखा दिया है, फरेब करना सिखा दिया है, झूठ बोलना सिखा दिया है, ठगी करना सिखा दिया है, शारीरिक व मानसिक रोगी बना दिया है। इंसान कब लिखायेगा इसकी रिपोर्ट??…

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor