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Sunday, March 15, 2026, 1:05 pm

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जैसलमेर निजी बस में आग हादसा : कलेक्टर और डीटीओ को सीधे-सीधे जिम्मेदार ठहराया जाए, तुरंत निलंबित करो, हादसे की न्यायिक जांच हो, ट्रेवल एजेंसी के मालिक के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर गिरफ्तार करें

राइजिंग भास्कर कॉलम. दिलीप कुमार पुरोहित

जैसलमेर से जोधपुर रूट पर लगभग हर आधे घंटे या घंटे भर से निजी बसें चलती हैं। सभी निजी बसों में जानवरों की तरह यात्रियों को ठूंस-ठूंस कर भरा जाता है। यह स्थिति जैसलमेर ही नहीं बल्कि पूरे राजस्थान की है। बसों में क्या परिवहन किया जाता है? कितनी सवारियां ठूंसी जाती है? कभी जांच नहीं होती? कभी फ्लाइंग टीम कार्रवाई नहीं करती? एमएलए, सांसद, कलेक्टर, एसपी, डीटीओ, आरटीओ, मंत्री सभी की मिलीभगत रहती है…यह सिस्टम की खामियां हैं…निजी ट्रेवल एजेंसी वाले माफिया की तरह काम करते हैं, बात-बात पर झगडृा-फसाद, कानून हाथ में लेना उनके स्वभाव में है…ट्रेवल एजेंसियों के मालिक राजनेताओं और मीडिया के भी करीब है… अब सीएम साहब यह घालमेल रुकना चाहिए…अगर वाकई आपको इस हादसे का दर्द है तो प्लीज सबसे पहले कलेक्टर और डीटीओ को निलंबित कर शुरुआत तो करो…जब तक आठ-दस कलेक्टरों की ऐसे हादसों में बली नहीं ली जाएगी, हादसे रुकने वाले नहीं हैं…।

जैसलमेर रूट से मंगलवार को चली एक निजी बस में आग लग जाती है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बस में  50 से अधिक यात्री सवार थे। यह लंबा रूट है। लंबे रूट पर इतने ज्यादा यात्री वैसे ही खतरे का बायस है। आखिर इतने यात्री क्यों भरे गए? सवाल उठाया है इस पर बहस भी करेंगे। बात आगे बढ़ाते हैं। जैसलमेर से जोधपुर रूट पर लगभग हर आधे घंटे या घंटे भर से निजी बसें चलती हैं। सभी निजी बसों में जानवरों की तरह यात्रियों को ठूंस-ठूंस कर भरा जाता है। यह स्थिति जैसलमेर ही नहीं बल्कि पूरे राजस्थान की है। पर फिलहाल हम बात जैसलमेर की कर रहे हैं। हमारा सवाल है कि जैसलमेर से हर रोज दर्जनों निजी बसें जोधपुर, जयपुर, दिल्ली और विभिन्न रूट पर चलती है। इन बसों में यात्रियों को क्षमता से अधिक भरा जाता है। भरा जाता है कि जगह हम यह कहें कि ठूंसा जाता है तो गलत नहीं होगा? तो भला इस अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार कौन? जाहिर है जिले का परिहवन अधिकारी यानी डीटीओ और… बड़े अधिकारी की बात करें तो कलेक्टर…एसपी को भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। तो आज जैसलमेर से चलने वाली एक निजी ट्रेवल्स की बस में आग लग गई। एक डिजिटल चैनल के मुताबिक बस में पटाखों का परिवहन किया जा रहा था जबकि अधिकतर डिजिटल चैनल और मीडिया शॉर्ट सर्किट कारण बता रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल कि आग लगी कैसे? इससे भी बड़ा सवाल कि क्या कभी प्रशासन, पुलिस या डीटीओ जांच करते हैं कि बस में क्या-क्या परिवहन किया जाता है? नहीं कभी नहीं? मैं खुद जोधपुर से जैसलमेर और जैसलमेर से जोधपुर कई बार निजी बसों में यात्रा करता रहा हू और इसमें यात्री बकरों की तरह-तरह ठूंस-ठूंस कर भरे जाते हैं। मैं हर बार लोगों को यही सलाह देता हूं कि आप अपनी टिकट कन्फर्म करके बस में चढ़ें और जगह नहीं है तो खड़े-खड़े यात्रा ना करें। मगर यात्री शायद अपनी जिंदगी से भी जादा जल्दी में होते हैं और मौत की कीमत पर यात्रा करते हैं। यात्री तो जोखिम उठाते ही हैं साथ ही निकम्मा और नाकारा प्रशासन ऐसे हादसों के लिए सीधे-सीधे तौर पर जिम्मेदार है जो कभी रूल को फॉलो नहीं करते। इसलिए हमारा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से आग्रह है कि आपमें जरा सी भी शर्म है तो जैसलमेर के कलेक्टर ओर जैसलमेर के डीटीओ को तुरंत प्रभाव से इस हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए निलंबित करें ओर हादसे की न्यायिक जांच करवाएं। यही नहीं निजी ट्रेवल एजेंसी के मालिक को गिरफ्तार किया जाए और उसके खिलाफ हत्या का आपराधिक मामला दर्ज करवाया जाए। उसकी जमानत भी नहीं होनी चाहिए। इस हादसे में जितनी भी मौतें हुई है उसके परिजनों को प्रति परिजन 1 करोड़ का मुआवजा सरकार दे ओर 1 करोड़ का मुआवजा ट्रेवल एजेंसी दे। जब तक सख्ती नहीं होगी, ऐसे हादसे नहीं रुकेंगे।

अब एक नजर हादसे की न्यूज पर :

राजस्थान के जैसलमेर में एक चलती बस में भीषण आग लग गई, जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। इस दर्दनाक हादसे में तीन बच्चों सहित 16 यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और 10 से 12 लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है। गंभीर रूप से घायल यात्रियों को जोधपुर रेफर किया गया है। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट को आग लगने का संभावित कारण बताया जा रहा है।

राजस्थान के जैसलमेर में भयानक सड़क हादसा हुआ है, जहां एक चलती बस में भीषण आग लगने के बाद अफरा-तफरी मच गई। बस में आग लगते ही यात्रियों में चीख-पुकार मच गई और इस हादसे में तीन बच्चों समेत 16 यात्रियों के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई है। इस दर्दनाक हादसे के बाद फायर ऑफिसर ने जानकारी दी है कि इस घटना में 10 से 12 लोगों की मौत की आशंका है। इस घटना में यात्रियों के चेहरे और हाथ-पैर बुरी तरह झुलस गए। कई यात्रियों की हालत नाजुक बताई जा रही है।

गंभीर घायल जोधपुर रेफर

इस घटना के बाद मौके पर पहुंचे स्थानीय लोगों ने बचाव कार्य में मदद की और सभी घायलों को राजकीय जवाहर अस्पताल ले जाया गया। इसके साथ ही, गंभीर रूप से घायलों को जोधपुर रेफर किया गया है। फिलहाल, शॉर्ट सर्किट से बस में आग लगने की आशंका जताई जा रही है। इसी सिलसिले में एक डिजीटल न्यूज चैनल ने पटाखों के परिवहन की बात भी लिखी है।

बस में कितने यात्री सवार थे, इसे लेकर फिलहाल जानकारी जुटाई जा रही है और कलेक्टर प्रताप सिंह नथावत, एसपी अभिषेक शिवहरे मौके पर मौजूद थे। मौके पर पहुंचकर दमकल की टीमों ने आग पर काबू पाने का प्रयास किया।

CM भजनलाल शर्मा ने लिया फीडबैक

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने हादसे के बाद इसका फीडबैक लिया है और जिला प्रशासन के साथ उन्होंने संपर्क साधा है। इस हादसे को लेकर सीएम कार्यालय एक्टिव मोड पर है और सीएम ने अधिकारियों के त्वरित राहत पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने अस्पतालों को घायलों के बेहतर इलाज के लिए अलर्ट किया है और प्रशासन को राहत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री खुद मौके पर जाएंगे और घटनास्थल का दौरा करेंगे।

ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया

‎बस हादसे में घायलों को जोधपुर लाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। जानकारी के अनुसार 16  झुलसे यात्रियों कों राजकीय अस्पताल जोधपुर रेफर किया गया है। ‎इनमें दो महिलाएं हैं। झुलसे लोगों के नाम इस प्रकार बताए जा रहे हैं-ओमाराम भील निवासी लाठी, यूनुस खान, पीर मोहम्मद, इमामत (महिला), मोहम्मद इक़बाल, ‎विशाल, हुसैन, उमेद खान निवासी गोमठ, लक्ष्मण भील निवासी सेतरावा, महिपाल सिंह एका, रफीक खान, ‎‎फिरोज खान, आशीष, अभय कुमार, विशाखा पत्नी आशीष, मनोज आर भाटिया, जीवराज पोकरण।

बस में पटाखों का हो रहा था परिवहन?

एक डिजीटल न्यूज चैनल के अनुसार बस में आग शार्ट सर्किट की वजह से लगी है। बताया जा रहा है कि बस में पटाखों का परिवहन हो रहा था। इस वजह से आग ने कम समय में पूरी बस को अपने आगोश में ले लिया। लोगों को बाहर निकलने का मौका भी नहीं मिला।

10 से 12 लोगों के जिंदा जल जाने की आशंका

नगर परिषद के असिस्टेंट फायर ऑफिसर कृष्णपाल सिंह राठौड़ ने बताया कि सूचना मिलते ही वे टीम के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हुए। उन्होंने कहा, बस पूरी तरह से आग का गोला बन चुकी थी। फायर ब्रिगेड की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। प्रथम दृष्टया करीब 10 से 12 लोगों के जिंदा जल जाने की आशंका है।

पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने जताया दुख

पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने घटना पर दुख जताते हुए कहा है कि लोगों को जल्द स्वास्थ्य लाभ मिले।

राइजिंग भास्कर तत्काल : सीएम साहब घड़ियाली आंसू नहीं, एक्शन लें…

राइजिंग भास्कर का मानना है कि हादसे के बाद तुरंत कलेक्टर और डीटीओ को निलंबित किया जाना चाहिए। क्योंकि कलेक्टर और डीटीओ कभी भी जैसलमेर से चलने वाली निजी बसों की जांच नहीं करते। कलेक्टर का काम है कि निजी बसों में यात्रियों का सुरक्षित परिवहन हो। डीटीओ को समय-समय पर जांच करनी चाहिए और ओवरलोड वाहनों के खिलाफ चालान करना चाहिए। फ्लाइंग टीम गठित होनी चाहिए और जैसलमेर से गंतव्य तक लगातार सवारियों की जांच होनी चाहिए। मगर कलेक्टर भी अव्यवस्थाओं के लिए सीधे-सीधे जिम्मेदार है। डीटीओ की जिम्मेदारी तो है ही। सभी हफ्ता वसूली में लगे हुए है और कलेक्टर जैसे जिम्मेदार व्यक्ति की जिम्मेदारी सबसे अधिक है जो ऐसी अव्यवस्थाओं के लिए सीधे-सीधे जिम्मेदार है। जब तक आठ-दस कलेक्टरों की इस प्रकार के होने वाले हादसों में सीधे-सीधे बली नहीं ली जाएगी, हादसे रुकने वाले नहीं है। होना तो यही चाहिए मगर चीफ सेक्रेटरी और मुख्यमंत्री जैसे जिम्मेदार लोग कलेक्टरों की हादसों के बाद दरियादिली और संवेदनाओं की प्रशंसा कर उन्हें चने के झाड़ पर चढ़ा देते हैं। जबकि हादसों के लिए ये ही वो कौम है जो सीधे-सीधे जिम्मेदार है। अफसर सारे नाकारा हो चुके हैं। पुलिस महकमा भी ऐसे हादसों के लिए जिम्मेदार है। पुलिस से अधिक उम्मीद की भी नहीं जानी चाहिए। इसलिए फिलहाल जैसलमेर बस हादसे में मुख्यमंत्री को सबसे पहले कलेक्टर और डीटीओ को निलंबित किया जाना चाहिए और निजी ट्रेवल एजेंसी के मालिक के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करते हुए तुरंत गिरफ्तारी होनी चाहिए और जमानत भी नहीं होनी चाहिए। जब तक सरकार सख्त नहीं होगी ऐसे हादसे रुकने वाले नहीं है। मुख्यमंत्री को अगर वाकई हादसे का दर्द है तो घड़ियाली आंसू बंद करके तुरंत कलेक्टर और डीटीओ को निलंबित करना चाहिए और ट्रेवल एजेंसी के मालिक को गिरफ्तार कर आपराधिक कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही बस के ड्राइवर के खिलाफ भी आपराधिक मुकदमा दर्ज होना चाहिए।

पाठकों आपको क्या लगता है? कार्रवाई होगी? या हादसा मानकर फाइल बंद हो जाएगी? 

राइजिंग भास्कर हमेशा खरी-खरी लिखता है। चुभती हुई बातें लिखना राइजिंग भास्कर के डीएनए में है। जब तक पाठकों के दिल तक बात नहीं पहुंचे और पाठकों को लगे नहीं कि राइजिंग भास्कर उनके दर्द को आवाज दे रहा है, हमारा मिशन रुकने वाला नहीं है। जैसलमेर से चली निजी बस में आग से मरने वाले अब इस दुनिया से जा चुके हैं। मगर उनके परिजनों के आंसू हम नहीं पौंछ पा रहे हैं, मगर ऐसे हादसे के जिम्मेदार लोगों को सजा दिलाने की मांग राइजिंग भास्कर कर रहा है। यही नहीं प्रशासन को सीधे-सीधे ऐसे हादसों में लापरवाह और जिम्मेदार मानते हुए सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। क्या ऐसा होगा? यह सवाल हम पाठकों के लिए छोड़ रहे हैं। साथ ही हम सत्ता के शीर्ष पर बैठे जिम्मेदारों को आगाह कर रहे हैं कि जब तक ऐसे हादसों के जिम्मेदार अफसरों को दोषी ठहराकर कार्रवाई नहीं होगी, हादसे रुकने वाले नहीं है। क्योंकि यह समस्या आज की नहीं है। यह समस्या वर्षों से चली आ रही है और निजी ट्रेवल एजेंसियां माफिया की तरह काम कर रही है। झगड़ा-फसाद और अव्यवस्थाओं की जड़ यह निजी ट्रेवल एजेंसियां हैं। इसकी जानकारी जिले के परिवहन अधिकारियों, जिला पुलिस अधिकारियों और कलेक्टरों को भी होती हैं। मगर कोई सख्त कार्रवाई नहीं करते। बात आगे बढ़ाएं तो पूरे मामले में सत्ता के लोग भी दोषी हैं। एमएलए और सांसदों तक को कार्रवाई करनी चाहिए, मगर वे भी वोटों की राजनीति से आगे कुछ देखते ही नहीं है। इसलिए इस बार पाठकों को आर-पार की कार्रवाई के लिए आवाज उठानी होगी। कोई भी मीडिया इतना खरा-खरा नहीं लिख रहा। सभी केवल खबरें छापकर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो रहे हैं। हम खबर से आगे की बात कर रहे हैं। इसलिए ऐसे हादसों के आस-पास जो भी दोषी पक्षकार हैं उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। अगर सरकार यह जिम्मेदारी नहीं उठाए तो न्यायपालिका को एक्शन लेना चाहिए। खम्मा घणी…।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor