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Friday, April 17, 2026, 4:59 am

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जैसलमेर पुष्करणा समाज के गौरव जस्टिस संजीत पुरोहित

जस्टिस संजीत पुरोहित के पिताजी विनोद पुरोहित पेशे से वकील रहे हैं और समाज में अपने सादगीपूर्ण व्यक्तित्व, न्यायप्रिय दृष्टिकोण और गहरी विधिक समझ के लिए जाने जाते हैं। उनके घर में विद्या और संस्कार का वातावरण रहा, जिसने संजीत पुरोहित के व्यक्तित्व को आकार दिया।

जगदीश पुरोहित. जोधपुर

राजस्थान के जैसलमेर पुष्करणा समाज के गौरव और जोधपुर की धरती के प्रतिभाशाली पुत्र जस्टिस संजीत पुरोहित आज पूरे समाज के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं। उन्होंने कम उम्र में अपनी कड़ी मेहनत, लगन और ईमानदारी के बल पर राजस्थान उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के पद तक पहुंचकर इतिहास रचा है।

संजीत पुरोहित का जन्म जोधपुर शहर के भीतरी भाग कल्लों की गली, भजन चौकी में एक संस्कारी और शिक्षित परिवार में हुआ। उनके पिताजी विनोद पुरोहित पेशे से वकील रहे हैं और समाज में अपने सादगीपूर्ण व्यक्तित्व, न्यायप्रिय दृष्टिकोण और गहरी विधिक समझ के लिए जाने जाते हैं। उनके घर में विद्या और संस्कार का वातावरण रहा, जिसने संजीत पुरोहित के व्यक्तित्व को आकार दिया। वर्तमान में परिवार का निवास 716/18, सेक्टर हाउसिंग बोर्ड, जोधपुर में है।

संजीत पुरोहित ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा जोधपुर में पूरी की। पढ़ाई में वे सदैव उत्कृष्ट रहे और अपने पिता के पदचिह्नों पर चलते हुए उन्होंने विधि (Law) को अपना जीवन लक्ष्य बनाया। वर्ष 1998 में उन्होंने बी.ए. की डिग्री प्राप्त की और तत्पश्चात 2001 में एल.एल.बी. की उपाधि हासिल की। शिक्षा के प्रति उनकी गहरी रुचि ने उन्हें यहीं नहीं रोका — उन्होंने एल.एल.एम. (Master of Laws) की पढ़ाई पूरी की और आगे बढ़ते हुए 2014 में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार (International Human Rights) विषय में एल.एल.एम. की उपाधि भी प्राप्त की। यह उनकी उच्च शिक्षा के प्रति निष्ठा और वैश्विक विधिक दृष्टिकोण का परिचायक है।

अपने पिता विनोद पुरोहित को अपना गुरु मानते हुए उन्होंने वर्ष 2001 से सक्रिय वकालत प्रारंभ की। उनकी निष्ठा, गहन अध्ययन और व्यावहारिक समझ ने उन्हें शीघ्र ही विधिक क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित स्थान दिलाया। भारत सरकार ने उनकी योग्यता को पहचानते हुए उन्हें 2015 से 2017 तक वरिष्ठ पैनल वकील (Senior Panel Advocate) नियुक्त किया। उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन और न्यायिक निष्ठा को देखते हुए उन्हें 2017 से 2020 तक भारत सरकार के सहायक सॉलिसिटर जनरल (Assistant Solicitor General of India) के रूप में नियुक्त किया गया। इस अवधि में उन्होंने सरकार के अनेक महत्वपूर्ण मामलों की पैरवी की और सटीक विधिक तर्कों से न्यायालय में अपनी पहचान बनाई।

संजीत पुरोहित ने एम्स जोधपुर, आईआईटी जोधपुर और अजमेर विद्युत वितरण निगम जैसी प्रमुख सरकारी संस्थाओं के लिए भी अधिवक्ता के रूप में कार्य किया। इन संस्थाओं के हितों की प्रभावशाली पैरवी कर उन्होंने अपनी विधिक दक्षता और समर्पण का परिचय दिया। जस्टिस संजीत पुरोहित ने बताया कि पिता विनोद पुरोहित ने न केवल उन्हें कानून की बारीकियों से परिचित कराया बल्कि यह भी सिखाया कि “वकील का धर्म केवल तर्क देना नहीं, बल्कि सत्य की रक्षा करना है।” यही शिक्षा आगे चलकर उनके पुत्र के न्यायिक दर्शन की नींव बनी तथा माता श्रीमती सरोज पुरोहित ने जीवन के नैतिक मूल्यों का पाठ पढ़ाया। उन्होंने हमेशा कहा कि “ज्ञान तभी सार्थक है जब वह विनम्रता से जुड़ा हो।” माता-पिता के संस्कारों ने संजीत को यह सिखाया कि “सफलता का अर्थ केवल पद प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज में न्याय और सत्य की स्थापना करना है।” आज न्यायमूर्ति संजीत पुरोहित अपने हर निर्णय में वही संवेदनशीलता और न्यायप्रियता प्रदर्शित करते हैं जो उन्हें अपने माता-पिता से विरासत में मिली है। उनका जीवन यह सशक्त संदेश देता है कि जब पिता का अनुशासन और मां का स्नेह साथ हो, तो कोई भी शिखर असंभव नहीं रहता I जस्टिस संजीत पुरोहित ने बताया कि पिता विनोद पुरोहित ने न केवल उन्हें कानून की बारीकियों से परिचित कराया बल्कि यह भी सिखाया कि “वकील का धर्म केवल तर्क देना नहीं, बल्कि सत्य की रक्षा करना है।” यही शिक्षा आगे चलकर उनके पुत्र के न्यायिक दर्शन की नींव बनी तथा माता श्रीमती सरोजा पुरोहित ने जीवन के नैतिक मूल्यों का पाठ पढ़ाया। उन्होंने हमेशा कहा कि “ज्ञान तभी सार्थक है जब वह विनम्रता से जुड़ा हो।” माता-पिता के संस्कारों ने संजीत को यह सिखाया कि “सफलता का अर्थ केवल पद प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज में न्याय और सत्य की स्थापना करना है।” आज न्यायमूर्ति संजीत पुरोहित अपने हर निर्णय में वही संवेदनशीलता और न्यायप्रियता प्रदर्शित करते हैं जो उन्हें अपने माता-पिता से विरासत में मिली है। उनका जीवन यह सशक्त संदेश देता है कि जब पिता का अनुशासन और मां का स्नेह साथ हो तो कोई भी शिखर असंभव नहीं रहता।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor