जागृति संस्थान के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ आरटीआई कार्यकर्ता नंदलाल व्यास से विशेष बातचीत
दिलीप कुमार पुरोहित. पंकज जांगिड़. जोधपुर
आरटीआई कानून। सूचना को लेकर आम नागरिक को अधिकार देने वाला। मगर सूचना के अधिकार को लेकर आज यह कानून किस स्थिति में है? क्या वाकई आरटीआई कानून देश के लोगों की मदद कर रहा है? क्या भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर लगाम लगाने और कार्य को पारदर्शी बनाने में कानून मदद करता है? ऐसे कई सवाल है जिनको लेकर जागृति संस्थान के अध्यक्ष वरिष्ठ आरटीआई कार्यकर्ता नंदलाल व्यास से राइजिंग भास्कर ने बातचीत की। इस बातचीत के संपादित अंश यहां प्रस्तुत हैं।
राइजिंग भास्कर : नंदलाल जी, सबसे पहले आपसे यह जानना चाहेंगे कि जागृति संस्थान की स्थापना का विचार कैसे आया?
नंदलाल व्यास : वर्ष 2008 में जब मैंने जागृति संस्थान की स्थापना की, तब मेरे मन में एक ही उद्देश्य था—सूचना के अधिकार अधिनियम का वास्तविक लाभ आम नागरिक तक पहुंचे। आरटीआई कानून एक ऐसा सशक्त माध्यम है, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाई जा सकती है और जनता अपने अधिकारों के प्रति सजग हो सकती है। लेकिन उस समय देखा कि आम आदमी इस कानून से डरता है या उसे इसकी प्रक्रिया समझ में नहीं आती। इसी खालीपन को भरने के लिए जागृति संस्थान की नींव रखी गई।
राइजिंग भास्कर : जागृति संस्थान के प्रमुख उद्देश्यों के बारे में विस्तार से बताइए।
नंदलाल व्यास : हमारे संस्थान का मुख्य उद्देश्य आरटीआई कानून का प्रचार-प्रसार करना, उपभोक्ता संरक्षण को लेकर जागरूकता फैलाना और आम जनता को निशुल्क आरटीआई सहायता प्रदान करना है। इसके साथ ही हम प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने को समाजहित का कार्य मानते हैं। संस्थान के माध्यम से हम विभिन्न सरकारी विभागों से लोकहित से जुड़ी सूचनाएं प्राप्त कर उन्हें समाज के सामने लाते हैं, ताकि व्यवस्था में सुधार की गुंजाइश बने।
राइजिंग भास्कर : इतने वर्षों में जागृति संस्थान ने क्या-क्या उपलब्धियां हासिल की हैं?
नंदलाल व्यास : यह हमारे लिए संतोष की बात है कि अब तक हम 5 हजार से अधिक लोगों को आरटीआई कानून के प्रति जागरूक कर चुके हैं। करीब 2000 से अधिक नागरिकों को आरटीआई आवेदन, सूचना प्राप्ति और अपील प्रक्रिया में सीधी मदद दी गई है। इसके अलावा ब्रॉशर, पम्पलेट और पत्र प्रकाशित कर बांटे गए, ताकि लोगों को सरल भाषा में कानून की जानकारी मिल सके। हमने 30 से अधिक सम्मेलन आयोजित किए, जिनमें आरटीआई से जुड़ी व्यावहारिक जानकारियां साझा की गईं। समाज, राज्य और देशहित में अच्छा कार्य करने वाले आरटीआई कार्यकर्ताओं को 15 से अधिक कार्यक्रमों में सम्मानित भी किया गया। हर साल 12 अक्टूबर को आरटीआई स्थापना दिवस मनाकर इस कानून के महत्व को रेखांकित किया जाता है।
राइजिंग भास्कर : आप अक्सर कहते हैं कि आरटीआई कानून अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है। आपका आशय क्या है?
नंदलाल व्यास : देखिए, आरटीआई कानून का उद्देश्य बहुत ही सकारात्मक था—जनता को सवाल पूछने का अधिकार देना। आज भी यह कानून अपने आप में मजबूत है। समस्या कानून से ज्यादा उसके क्रियान्वयन में है। कई जगह अधिकारी सहयोग करते हैं, तो कहीं-कहीं अनावश्यक देरी या टालमटोल भी देखने को मिलती है। इससे आम नागरिक हतोत्साहित होता है। मैं यह नहीं कहता कि सभी अधिकारी गलत हैं, लेकिन कुछ मामलों में संवेदनशीलता और सहयोग की कमी जरूर दिखाई देती है।
राइजिंग भास्कर : आरटीआई कार्यकर्ताओं को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?
नंदलाल व्यास : आरटीआई कार्यकर्ता समाजहित में काम करता है, लेकिन कई बार उसे गलत नजरिए से देखा जाता है। कुछ लोगों द्वारा उन्हें ब्लैकमेलर कह दिया जाता है, झूठे मुकदमे दर्ज हो जाते हैं या डराने-धमकाने की कोशिश होती है। यह स्थिति चिंताजनक है। हालांकि यह भी सच है कि कई अधिकारी और विभाग ऐसे हैं, जो ईमानदारी से सहयोग करते हैं। जरूरत है कि सकारात्मक उदाहरणों को बढ़ावा दिया जाए और संवाद की संस्कृति विकसित की जाए।
राइजिंग भास्कर : क्या आपको लगता है कि आरटीआई कानून को और मजबूत करने की जरूरत है?
नंदलाल व्यास : बिल्कुल। कानून को कमजोर कहना उचित नहीं होगा, लेकिन उसे समय-समय पर और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। सूचना आयोगों को मजबूत करना, समयबद्ध सूचना उपलब्ध कराना और आरटीआई कार्यकर्ताओं की सुरक्षा पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है। यदि अधिकारी और नागरिक एक-दूसरे को विरोधी नहीं, बल्कि सहभागी मानें, तो व्यवस्था अपने आप सुधर सकती है।
राइजिंग भास्कर : आम नागरिकों के लिए आपका क्या संदेश है?
नंदलाल व्यास : मेरा यही संदेश है कि आरटीआई से डरें नहीं। यह आपका संवैधानिक अधिकार है। सही तरीके, सही भाषा और सही उद्देश्य से सवाल पूछेंगे तो परिणाम सकारात्मक ही होंगे। जागृति संस्थान हमेशा आम नागरिक के साथ खड़ा है और भविष्य में भी रहेगा।
राइजिंग भास्कर : भविष्य की योजनाएं क्या हैं?
उत्तर: हम चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा युवा आरटीआई कानून को समझें और जिम्मेदारी के साथ इसका उपयोग करें। आने वाले समय में प्रशिक्षण कार्यक्रम, डिजिटल जागरूकता और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच बढ़ाने पर हमारा विशेष फोकस रहेगा।
राइजिंग भास्कर : लोकतंत्र में आरटीआई कानून को किस नजर से देखते हैं?
नंदलाल व्यास : आरटीआई कानून लोकतंत्र की रीढ़ है। यदि इसे सकारात्मक सोच, पारदर्शिता और सहयोग की भावना से लागू किया जाए, तो यह न केवल व्यवस्था को बेहतर बना सकता है, बल्कि आम नागरिक को भी सशक्त कर सकता है। जागृति संस्थान इसी विश्वास के साथ अपने सेवा कार्य में निरंतर जुटा हुआ है।
Author: Dilip Purohit
Group Editor










