लेखक : शिव सिंह
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आज के समय में बांझपन (Infertility) केवल महिलाओं से जुड़ी समस्या नहीं रह गई है। सांख्यिकी बताते हैं कि लगभग 40-50% बांझपन के मामलों में कारण पुरुष होते हैं, जिनमें ‘लो स्पर्म काउंट’ (Oligospermia) सबसे प्रमुख है।
स्पर्म काउंट कम होने के मुख्य कारण
आधुनिक समाज में स्पर्म काउंट घटने के पीछे कई शारीरिक, पर्यावरणीय और जीवनशैली से जुड़े कारक हैं:
* अस्वस्थ जीवनशैली: अत्यधिक तनाव, नींद की कमी, और शारीरिक गतिविधि न करना हार्मोनल असंतुलन पैदा करता है।
* खान-पान और नशा: जंक फूड का अधिक सेवन, मोटापा, धूम्रपान (Smoking) और शराब का सेवन स्पर्म की गुणवत्ता और संख्या दोनों को नुकसान पहुँचाते हैं।
* पर्यावरणीय कारक: कीटनाशकों, रसायनों और भारी धातुओं (जैसे लेड) के संपर्क में रहने से प्रजनन क्षमता घटती है।
* बढ़ता तापमान: अंडकोष (Testicles) का तापमान शरीर के सामान्य तापमान से थोड़ा कम होना चाहिए। बहुत टाइट कपड़े पहनना, लंबे समय तक लैपटॉप को गोद में रखना या गर्म पानी से लगातार नहाना स्पर्म उत्पादन को बाधित करता है।
* चिकित्सकीय स्थिति: वैरिकोसेल (अंडकोष की नसों का सूजना), संक्रमण (Infections), और कुछ दवाइयों के दुष्प्रभाव भी इसके कारण हो सकते हैं।
बचाव के उपाय (Prevention)
अच्छी खबर यह है कि जीवनशैली में थोड़े बदलाव करके स्पर्म काउंट और उसकी गुणवत्ता में काफी सुधार किया जा सकता है:
* संतुलित आहार: अपने भोजन में जिंक, विटामिन-C, विटामिन-D और ओमेगा-3 फैटी एसिड शामिल करें। अखरोट, कद्दू के बीज, सफेद तिल , और हरी पत्तेदार सब्जियां बहुत फायदेमंद होती हैं।
* नियमित व्यायाम: रोज़ाना 30-45 मिनट व्यायाम करें। यह टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है। हालांकि, बहुत अधिक इंटेंस वर्कआउट से बचें।
* तनाव कम करें: कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) टेस्टोस्टेरोन पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। योग और ध्यान (Meditation) को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
* नशीले पदार्थों से दूरी: धूम्रपान और शराब को पूरी तरह छोड़ देना या सीमित करना सबसे प्रभावी कदम है।
* पर्यावरण का ध्यान रखें: काम के दौरान रसायनों से बचें और लैपटॉप को हमेशा डेस्क पर रखकर इस्तेमाल करें।
सलाह:
कम स्पर्म काउंट कोई ऐसी समस्या नहीं है जिसका समाधान न हो सके। अगर आप को भी यह समस्या है तो संपर्क करे।
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