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Thursday, March 12, 2026, 9:46 am

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RIF 2026 : हॉलीवुड, बॉलीवुड, रॉलीवुड फिल्में प्रदर्शित…इनोवेशन, तकनीक, बदलाव, भविष्य की आहट पर लेखकों, कलाकारों और डायरेक्टर्स के साथ विशेषज्ञों ने किया मंथन

31 जनवरी से 5 फरवरी तक शहर में सिनेमाई हलचल, मनोरंजन, ज्ञानवर्धन और जिज्ञासा के पटल पर सार्थक संवाद भी हुआ…।

दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर

9783414079 diliprakhai@gmail.com

राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (RIF) 2026 का 12वां संस्करण 31 जनवरी से 5 फरवरी तक जोधपुर में आयोजित किया गया। फेस्टिवल में राजस्थानी फिल्मों की दशा और दिशा पर मंथन हुआ वहीं विदेशी शॉर्ट फिल्मों के प्रदर्शन से सिनेमाई जगत में इनोवेशन और बदलाव और भविष्य की आवश्यकताओं का चित्रण हुआ। वहीं राजस्थानी सिनेमा और बालीवुड का तुलनात्मक अध्ययन करने का अवसर मिला। इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा राजस्थानी फिल्मों के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा की गई। अभिनेता रजित कपूर ने संस्कृति और संस्कार का राजस्थानी फिल्मों को आधार बताया । स्टेज ओटीटी के सीसीओ और सह-संस्थापक प्रवीण सिंघल, डायरेक्टर पुनीत, फिल्म और टीवी एक्टर सुज़ैन बर्नर्ट, फिल्म निदेशक सीमा कपूर, लेखक व निर्देशक पंकज तंवर सहित कई फिल्म निर्देशकों और अभिनेताओं और कलाकारों ने विभिन्न मुद्दों पर मंथन किया। सार्थक बहस के साथ एक दिशा तय कर गया रिफ का 12वां संस्करण।

31 जनवरी :

उद्घाटन : 15 वर्ष बाद जोधपुर आए रजित कपूर

राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (RIFF) 2026 के बारहवें संस्करण का 31 जनवरी का आगाज हुआ। कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में हिंदी सिनेमा और रंगमंच (थिएटर) के सुप्रसिद्ध लेखक, निर्देशक और अभिनेता रजीत कपूर मुख्य अतिथि के रूप मौजूद रहे। वहीं राजस्थान पर्यटन विभाग के उप निदेशक भानुप्रताप ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। वहीं कंट्री पार्टनर मालगोरजटा वेजेस, राजस्थानी मधु, मिराज नॉर्थ इंडिया जीएम अरुण टाक, स्टैग को फाउंडर प्रवीण सिंघल और समाजसेवी पवन मेहता विशिष्ठ अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत में रिफ फेस्टिवल आयोजक सोमेंद्र हर्ष ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए 12वें रिफ फेस्टिवल के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर रजीत कपूर ने कहा कि वह लगभग 15 वर्षों से जोधपुर आए हैं लेकिन जोधपुर और राजस्थान की संस्कृति ने उन्हें हमेशा प्रभावित किया है। कपूर ने कहा कि राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल न केवल राजस्थानी भाषा, लोक कला और समृद्ध संस्कृति को आगे बढ़ाने का भी एक सशक्त मंच बनेगा बल्कि सिनेमा के विविध रंगों को दर्शाएगा। उन्होंने कहा कि यदि अभी भी अच्छी फिल्म स्कीम के साथ फिल्म बनाया जाए तो दर्शक उसे काफी पसंद करते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राजस्थान पर्यटन विभाग के उपनिदेशक भानुप्रताप ने कहा कि राजस्थानी फिल्मों को बढ़ावा देने के लिए राजस्थान सरकार सतत रूप से प्रयास कर रही है और राजस्थान फिल्म मेकिंग पॉलिसी भी बनाई गई है। उन्होंने कहा कि इस पॉलिसी के तहत फिल्म निर्माताओ को राज्य सरकार की ओर से अनुदान भी दिया जा रहा है, ताकि बेहतर राजस्थानी फिल्में बन सके। कार्यक्रम के अंत में रिफ को फाउंडर अंशु हर्ष ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

इन फिल्मों का हुआ प्रदर्शन 

अंडर दी स्किन – इटेलियन शार्ट फिल्म, एन ऑर्डरनरी कपल – अमेरिकन फिल्म, वेलकम तो वेगास – कोरियन फिल्म , लॉस्ट वर्ल्ड – बंगाली फिल्म, डांस ऑफ़ शिवा – डोक्युमेन्ट्री फ्रांस, काकोरी – हिंदी शार्ट फिल्म, शोपिन शोपिंन- पोलैंड, दी सुमेरपुर फाइल्स डोक्युमेंट्री इंग्लिश, बिरहा शार्ट फिल्म, झोलाछाप भोजपुरी फिल्म अ टीचर्स गिफ्ट को प्रोडक्शन यु के एंड इंडिया फिल्में प्रदर्शित की गई। बोले तो मीठों लागे म्यूजिक एल्बम की स्क्रीनिंग की गई।

काकोरी, बिरहा और सुमेरपुर फाइल्स ने दर्शकों को किया आकर्षित 

काकोरी फिल्म 1920 के दशक के ब्रिटिश भारत के अशांत परिवेश पर आधारित, काकोरी फिल्म प्रसिद्ध काकोरी रेल कांड की शताब्दी मनाती है और औपनिवेशिक शासन को चुनौती देने वाले निडर क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित करती है। यह फिल्म राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाकुल्लाह खान, चंद्रशेखर आजाद और उनके साथियों के नेतृत्व में हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन द्वारा ब्रिटिश खजाने को लूटने की साहसिक योजना को दर्शाती है। इस फिल्म के डायरेक्टर कमलेश मिश्रा है। वही बिरहा फिल्म पिता पुत्र के प्रेम को दर्शाती हुई फिल्म है जिसके डायरेक्टर पुनीत और एक्टर रजित कपूर यहां उपस्थित थे। एक दिन एक रात मैं इस फिल्म को शूट किया गया। डॉ. अनिल पुरोहित द्वारा प्रारंभ की गई और बिल एवं मेलिंडा गेट्स फ़ाउंडेशन द्वारा प्रायोजित फ़िल्म सुमेरपुर फाइल्स भारत में एचआईवी/एड्स हस्तक्षेप के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल का दस्तावेज़ है। पाली, जालोर और सुमेरपुर की पृष्ठभूमि में आधारित यह परियोजना प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवारों की विशिष्ट संवेदनशीलताओं को केंद्र में रखकर कार्य करती है। अपने प्रकार की यह देश की पहली पहल थी, जिसने एक स्थानीय पुनर्वास प्रयास से आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्तर की मॉडल परियोजना का स्वरूप लिया।

1 फरवरी 

शॉर्ट फिल्म, फीचर फिल्म, डॉक्यूमेंट्री और म्यूजिक वीडियो में दिखा उत्साह 

मिराज सिनेमा, ब्लू सिटी मॉल में 19 से अधिक फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। शॉर्ट फिल्म, फीचर फिल्म, डॉक्यूमेंट्री और म्यूजिक वीडियो को लेकर दर्शकों में खास उत्साह देखने को मिला। टॉक शो में स्टेज OTT के CCO व को-फाउंडर प्रवीण सिंघल, फिल्म व टीवी अभिनेत्री सुज़ैन बर्नेट, व अभिनेता संगीतकार रतुल शंकर और भारतीय निर्देशक व निर्माता सतराजित सेन ने अपने अनुभव साझा किए। संचालन RIFF की फेस्टिवल डायरेक्टर अंशु हर्ष ने किया।

स्टेज ओटीटी के सीसीओ और सह-संस्थापक प्रवीण सिंघल ने बताया कि ओटीटी आज केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रहा, बल्कि लोकल कहानियों को ग्लोबल मंच देने का मजबूत जरिया बन चुका है। ओटीटी के जरिए देश-विदेश में रह रहे लोग अपनी भाषा, संस्कृति और जड़ों से जुड़ी कहानियों से दोबारा जुड़ पा रहे हैं। फिल्म और टीवी एक्टर सुज़ैन बर्नर्ट ने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को लेकर कहा कि वेब सीरीज़ की कहानियां फिल्म और टीवी दोनों से अलग होती हैं। वेब सीरीज़ ऐसे विषयों पर बनती हैं जिन्हें न तो दो घंटे की फिल्म में समेटा जा सकता है और न ही रोज़ाना आने वाले टीवी शो में दिखाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि टीवी में काम की रफ्तार बहुत तेज़ होती है, जहाँ रोज़ लंबे घंटे शूटिंग करनी पड़ती है, जबकि फिल्मों में प्रक्रिया काफी धीमी होती है। वेब सीरीज़ इन दोनों के बीच का माध्यम है। रतुल शंकर ने कहा कि उनका मुख्य दृष्टिकोण संगीत से जुड़ा हुआ है, क्योंकि वे पेशे से एक म्यूज़िशियन हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी पहली फिल्म करीब 25 साल पहले की थी, जब वे स्कूल से निकलकर कॉलेज में आए ही थे। इतने वर्षों बाद निर्देशक शतरजीत ने उन्हें अपनी फिल्म में अभिनय का मौका दिया। उन्होंने कहा कि ओटीटी के आने से स्टारडम की जगह टैलेंट को अहमियत मिली है। बंगाली फिल्म निर्देशक सत्राजित सेन ने कहा कि सिनेमा और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स समाज को गहराई से प्रभावित करते हैं। भले ही ओटीटी पर सेंसरशिप अभी पूरी तरह लागू न हो, लेकिन आत्म-नियमन बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि कई निजी संस्थाएं सेल्फ-रेग्युलेटरी बॉडी बनाकर कंटेंट की समीक्षा कर रही हैं। सत्राजित सेन का मानना है कि कहानी कहने पर कोई रोक नहीं होनी चाहिए, लेकिन उसे कहने का नजरिया सकारात्मक और सामाजिक रूप से जिम्मेदार होना चाहिए। RIFF जैसे फिल्म फेस्टिवल नए फिल्मकारों, संगीतकारों और कलाकारों को एक ऐसा मंच देते हैं, जहाँ उनकी प्रतिभा को पहचान मिलती है।

इन फिल्मों का हुआ प्रदर्शन

19 से अधिक फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। उक्यांग नागवा मेघालय शॉर्ट एनिमेशन फिल्म लोककथाओं और पारंपरिक वीरता पर आधारित रही, जिसने कम समय में गहरी छाप छोड़ी। वेरे ओरु केस मलयालम फीचर फिल्म एक रहस्यमयी केस पर केंद्रित रही, जिसमें सस्पेंस और दमदार अभिनय देखने को मिला। फौजी शॉर्ट एनिमेशन फिल्म ने साहस, कर्तव्य और राष्ट्रप्रेम का संदेश देकर युवाओं को प्रेरित किया। खीर शॉर्ट फिल्म ने ग्रामीण परिवेश में मानवीय रिश्तों और भावनाओं को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया।

रजित कपूर की मास्टर क्लास में दिखा उत्साह

अभिनेता रजीत कपूर की मास्टर क्लास हुई। ‘विचार और अभिनय के बीच बनने की कला’ शीर्षक से आयोजित यह मास्टर क्लास अभिनय की सूक्ष्म प्रक्रिया पर केंद्रित थी। दशकों लंबे अनुभव के आधार पर अभिनय की तैयारी, चरित्र निर्माण, संवादों की समझ, मंच और कैमरे के लिए अभिनय के अंतर तथा अभिनेता के आंतरिक संसार पर विस्तार से प्रकाश डाला। रंजित कपूर के साथ संवाद करने, प्रश्न पूछने और अभिनय की बारीकियों को सीधे समझने का अवसर भी मिला।

“ओटीटी रागा – क्राफ्टिंग स्टोरीज इन द स्ट्रीमिंग एरा ” पर सेमिनार ने जगाया जोश

दोपहर 3 से 4 बजे तक “OTT Raga: Crafting Stories in the Streaming Era” विषय पर चर्चा आयोजित हुई। इसमें डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर कहानी कहने की नई प्रवृत्तिर्यो और संभावनाओं पर संवाद हुआ।

2 फरवरी  

10 से अधिक फिल्मों का प्रदर्शन किया गया 

10 से अधिक फिल्मों का नि:शुल्क प्रदर्शन किया गया। मेरा स्कूल,खाटो मीठो, बींदणी नंबर 1, बैसा रा नैन, मोरचंग, ओमलो, रूबरू, चक्का जाम,अली अली, बैरन, अनप्लग्ड, महारो श्याम ये सभी, फिल्म स्क्रीनिंग के साथ राजस्थानी भाषा की दिशा और दशा पर बातचीत को दर्शाने वाली साबित हुई। सीमा कपूर की बायोग्राफी यूं गुजरी है अब तलक पर उनके साथ चर्चा सार्थक हुई।

फिल्म निदेशक सीमा कपूर की आत्मकथा ‘यूँ गुजरी अब तक’ पर हुआ सार्थक संवाद

प्रतिष्ठित फिल्म निदेशक सीमा कपूर की आत्मकथा “यूँ गुजरी अब तक” पर विशेष संवाद एवं पुस्तक चर्चा कार्यक्रम आयोजित किया गया। संचालन प्रोग्राम होस्ट अंशु हर्ष ने किया। सीमा कपूर ने बेहद सहज और बेबाक अंदाज में अपने जीवन संघर्ष, रचनात्मक यात्रा और आत्मखोज के अनुभव साझा किया। सीमा कपूर ने बताया कि यह पुस्तक लिखने का विचार अचानक नहीं आया, बल्कि जीवन के लंबे अनुभवों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि उनके जीवन की राह आसान नहीं रही और शुरुआत में उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी कठिन संघर्ष करना पड़ा। आध्यात्मिक खोज पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्ति की आत्मखोज कभी समाप्त नहीं होती। उन्होंने अपनी कहानी को पूरी ईमानदारी के साथ लिखा है, क्योंकि सच्चाई का अपना एक आत्मसम्मान होता है। सीमा कपूर ने बताया कि उनके पिता की थियेटर कंपनी राजस्थान के गांव-गांव में प्रस्तुतियां देती थी। 1969 के बाद सिनेमा के उदय के साथ थियेटर कंपनियों का दौर कमजोर पड़ने लगा, जिसके बाद उनके पिता भवानीमंडी (राजस्थान) में बस गए। अभिनेता ओम पुरी के साथ अपने संबंधों पर चर्चा भी की। उन्होंने अपने भाई रणजीत कपूर का भी उल्लेख किया। महिलाओं के लिए आर्थिक और वैचारिक स्वतंत्रता बेहद जरूरी है, लेकिन स्वतंत्रता और स्वच्छंदता के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। सीमा कपूर ने दर्शकों के सभी प्रश्नों का विस्तार से उत्तर दिया।

आधुनिकता की दौड़ में लोकभाषा, रीति-रिवाज, सांस्कृतिक पहचान संकट में : पूनिया

ओपन फोरम का आयोजन किया गया। इस फेस्टिवल में सिनेमा: क्षेत्रीय भाषाएं और राजस्थानी भाषा की पहचान, भविष्य और चुनौतियां विषय पर एक विशेष टॉक शो हुआ। इस मंच पर फिल्म, ओटीटी और कंटेंट जगत से जुड़े दिग्गजों ने राजस्थानी भाषा को सिनेमा और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मजबूत पहचान दिलाने, उसकी संभावनाओं और आने वाली चुनौतियों पर गहन मंथन किया। भाजपा हरियाणा प्रभारी एवं पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने क्षेत्रीय भाषाओं, खासकर राजस्थानी भाषा के संरक्षण पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आधुनिकता की दौड़ में हमारी लोक भाषा, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक पहचान संकट में है।  RIFF जैसे आयोजन लोक संस्कृति को थामने और नई पीढ़ी से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। स्टेज OTT राजस्थान की कंटेंट हेड रेनू राणा ने बताया कि जोधपुर में पले-बढ़े होने के कारण राजस्थानी सिनेमा से उनका जुड़ाव बचपन से रहा है। उन्होंने कहा कि एक समय राजस्थानी फिल्म इंडस्ट्री अपने शिखर पर थी और देश की शुरुआती रीजनल इंडस्ट्रीज में शामिल रही। स्टेज के माध्यम से अपनी जड़ों से दोबारा जुड़ने का अवसर मिला और स्टेज OTT के माध्यम से उस सपने को साकार करने का मंच मिला।

संघर्ष, दर्शक और कंटेंट की गुणवत्ता पर जोर

लेखक व निर्देशक पंकज तंवर ने कहा कि सिनेमा और कंटेंट की दुनिया में आगे बढ़ने के लिए निरंतर संघर्ष और आत्ममंथन जरूरी है। उन्होंने बताया कि यदि कोई फिल्म, गीत या कंटेंट दर्शकों तक नहीं पहुंच पा रहा है, तो उसकी वजह समझकर खुद को और मजबूत करना चाहिए। सोशल मीडिया के दौर में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, इसलिए बेहतर कहानी, बेहतर गीत और उच्च स्तर का काम ही पहचान दिला सकता है। फिल्म निर्देशक कपिल तंवर ने बताया कि अपनी शॉर्ट फिल्म के लिए वे राजस्थान की आत्मा से जुड़ा संगीत तलाश रहे थे। इसी दौरान उन्हें म्यूजिक डायरेक्टर अजय सोनी का रिकॉर्ड किया गया घूमर बेहद पसंद आया, जिसे उन्होंने फिल्म में शामिल किया। कपिल तंवर ने कहा कि वे बॉलीवुड के बजाय स्थानीय लोक वाद्ययंत्रों और फोक म्यूजिक को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने माना कि यह थोड़ा जोखिम भरा होता है, लेकिन यह प्रयोग सफल रहा।

RIFF मंच से राजस्थानी भाषा को लेकर भावुक अपील

RIFF के फाउंडर व फेस्टिवल डायरेक्टर सोमेंद्र हर्ष ने राजस्थानी भाषा के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि प्रोफेशनल जीवन में भले ही अंग्रेज़ी जरूरी हो, लेकिन घर और समाज में अपनी मातृभाषा में अधिक से अधिक बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि आज भी हम अपनी भाषा का प्रयोग करते रहेंगे तो आने वाली पीढ़ियों तक राजस्थानी जीवित रहेगी। ऋषि सिंह सिसौदिया, संस्थापक ऋषि एंटरटेनमेंट टी सीरीज ने बताया कि राजस्थानी गाने की पहचान बनाए रखने के लिए सही म्यूज़िक, विज़ुअलाइजेशन और प्रमोशन जरूरी है। लंगा-मंगणियार और लोक कला को जोड़कर नए कम्पोज़िशन के साथ मेहनत से गाना लोगों तक पहुंचे और राजस्थानी म्यूज़िक मजबूत बने।

3 फरवरी  

सोशल मीडिया नहीं, थिएटर बनाएगा स्टार : मुकेश छाबड़ा

प्रख्यात फिल्म निर्देशक एवं कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने “अभिनय की कला की खोज” विषय पर युवा कलाकारों से संवाद किया। छाबड़ा ने कहा कि सफलता कभी आसान नहीं होती और हर सफल व्यक्ति ने अपने जीवन में कठिन संघर्ष किया है। यहां उन्हें सकारात्मक बदलाव की संभावना दिखाई देती है।। मुकेश छाबड़ा ने कहा कि इंडस्ट्री में काम पाने का आधार आज भी टैलेंट और ऑडिशन है, न कि सिर्फ सोशल मीडिया फॉलोअर्स। राजस्थान में सिनेमा को लेकर कुछ सकारात्मक हो रहा है।

कास्टिंग डायरेक्टर बनने का सफर और सही कास्टिंग का नजरिया

मुकेश छाबड़ा ने बताया कि उन्होंने करियर की शुरुआत दिल्ली में पढ़ाई और एक निजी कंपनी में नौकरी से की, जहां बच्चों की कास्टिंग में मदद करते-करते इस क्षेत्र से जुड़ाव बना। शुरुआती दौर में कास्टिंग को उन्होंने पेशा नहीं माना, लेकिन लगातार काम करते हुए यह उनकी पहचान बन गया। वे किसी अभिनेता को नहीं, बल्कि कहानी के अनुसार सही कैरेक्टर को चुनते हैं।

कास्टिंग में धैर्य और निरंतर मेहनत सबसे जरूरी: छाबड़ा

वाजिद खान के सवाल पर मुकेश छाबड़ा ने कहा कि कास्टिंग प्रक्रिया में समय लगना सामान्य है और कलाकारों को यह नहीं सोचना चाहिए कि उनकी प्रोफाइल भुला दी जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कास्टिंग कंपनियां सही समय और सही प्रोजेक्ट का इंतजार करती हैं। थिएटर और प्रशिक्षण पर लगातार काम करें, क्योंकि टैलेंट कभी व्यर्थ नहीं जाता।

फेक कास्टिंग से बचाव को लेकर कलाकारों को दी गई अहम सलाह

RIFF के संवाद सत्र के दौरान जब कुछ कलाकारों ने फेक कास्टिंग के मामलों को लेकर सवाल उठाया और बताया कि इस तरह की धोखाधड़ी से कई लोग भ्रमित हो जाते हैं, तो इस पर कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने बताया कि फर्जी लोग हर क्षेत्र में मौजूद होते हैं, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में ग्लैमर के कारण यह ज्यादा दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि किसी भी कॉल, मैसेज या पैसों की मांग पर भरोसा करने से पहले आधिकारिक सोशल मीडिया पेज और कंपनी से क्रॉस-चेक करना जरूरी है। सही जानकारी, जागरूकता और सतर्कता ही फेक कास्टिंग से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है। जिया परिहार से बातचीत करते हुए मुकेश छाबड़ा ने बताया कि कास्टिंग के दौरान सोशल मीडिया फॉलोअर्स नहीं, बल्कि कलाकार की ट्रेनिंग, थिएटर अनुभव और अभिनय क्षमता को प्राथमिकता दी जाती है। शिवानी और उनकी जुड़वा सिस्टर से बातचीत करते हुए मुकेश छाबड़ा ने कहा कि लॉकडाउन के कारण छूटा अवसर किसी की गलती नहीं था, इसलिए कलाकारों को खुद को दोष नहीं देना चाहिए।

20 से अधिक फिल्मों का हुआ प्रदर्शन

20 से अधिक फिल्मों का विशेष प्रदर्शन किया गया। रघुवीरम – द बर्डसॉन्ग, टुकटुक वाली, घूमर, लॉर्ड्स सिग्नल, स्ट्रेज़ और ऐ ज़िंदगी सहित कई चर्चित फिल्मों को निशुल्क ग्रुप स्क्रीनिंग के माध्यम से दिखाया गया।

रेत, मौसम, लोककथाएं, संगीत, नृत्य और वीरता राजस्थान की विशेषता : देशपांडे

RIFF 2026 के ओपन फोरम के माध्यम से सिनेमा के ज़रिये पर्यटन, निवेश और सांस्कृतिक विरासत के प्रचार-प्रसार पर विशेष चर्चा हुई, जहाँ देश-विदेश से आए फिल्मकार, कलाकार और नीति विशेषज्ञ राजस्थान की रचनात्मक संभावनाओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया। पैनल डिस्कशन में फिल्म अभिनेता मकरंद देशपांडे ने कहा कि राजस्थान की मिट्टी, मेहमाननवाज़ी और कहानियों ने मेरे सिनेमा को गढ़ा। उन्होंने कहा कि राजस्थान से उनका रिश्ता सिर्फ़ शूटिंग तक सीमित नहीं, बल्कि आत्मीय अनुभवों और अनगिनत कहानियों से जुड़ा है। उन्होंने जैसलमेर और सीकर सहित कई स्थानों पर सहज शूटिंग अनुभव साझा किए और लोगों की मेहमाननवाज़ी को अविस्मरणीय बताया। रेत, मौसम, लोककथाएँ, संगीत, नृत्य और वीरता राजस्थान की पहचान हैं, जो सिनेमा में साफ़ दिखाई देती हैं। सरफरोश और हम दिल दे चुके सनम जैसी फ़िल्में इसका प्रमाण हैं। उन्होंने राजस्थान इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल की सराहना करते हुए कहा कि यह मंच नए कलाकारों को सम्मान और सिनेमा के ज़रिये संस्कृति को आगे बढ़ाने का बेहतरीन अवसर देता है। भारतीय फ़िल्ममेकर व लेखिका सीमा कपूर ने कहा कि उनका राजस्थान से रिश्ता बचपन से जुड़ा है, जहाँ झालावाड़ की हरियाली, पहाड़, नदियाँ और सांस्कृतिक विविधता ने उन्हें गढ़ा। उन्होंने बताया कि राजस्थान एक नहीं, अनेक रूपों वाला प्रदेश है, जिसकी हर बोली और कला अलग पहचान रखती है। पपेट थिएटर से लेकर टेलीविज़न सीरियल्स और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों तक, उनके अधिकांश रचनात्मक कार्यों की जड़ें राजस्थान में रहीं। लुप्त होती लोककलाओं और स्वतंत्र फ़िल्ममेकर्स के लिए राज्य स्तर पर संरक्षण व आर्थिक सहयोग की ज़रूरत है।

राजस्थान की विविध संस्कृति को ओटीटी के ज़रिये दुनिया तक पहुँचाने का सबसे बड़ा माध्यम है सिनेमा

स्टेज ओटीटी के सीसीओ व को-फाउंडर प्रवीण सिंघल ने कहा कि राजस्थान को चुनने का कारण इसकी बहुरंगी संस्कृति, बदलती बोलियाँ और हर ज़िले की अलग पहचान है। उन्होंने बताया कि ओटीटी और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने सिनेमा को सीधे लोगों के घर तक पहुँचा दिया है। स्टेज ओटीटी ने पिछले चार वर्षों में राजस्थान के हर ज़िले पर आधारित डॉक्यूमेंट्री सीरीज़ बनाकर वहां की संस्कृति, पहनावे और पर्यटन को सामने रखा है। स्टेज ओटीटी आज 50 से 60 मिलियन यानी करीब 5–6 करोड़ दर्शकों तक पहुँच बना चुका है। राजस्थान के कलाकारों व फ़िल्ममेकर्स को बड़ा अवसर दे रहा है।

फ़िल्में पर्यटन और होटल इंडस्ट्री के लिए सबसे बड़ी ब्रांड एम्बेसडर

होटल फेडरेशन ऑफ राजस्थान, जोधपुर डिवीजन के अध्यक्ष पवन मेहता ने कहा कि राजस्थान अपने आप में एक परफेक्ट फ़िल्म फ़्रेम है और फ़िल्ममेकर्स आते हैं। राजस्थान टूरिज़्म के डिप्टी डायरेक्टर भानु प्रताप ने कहा कि फ़िल्म शूटिंग से राज्य के पर्यटन को वैश्विक पहचान मिल रही है। RIFF के फ़ेस्टिवल डायरेक्टर सोमेंद्र हर्ष ने कहा कि राजस्थान आज इंटरनेशनल फ़िल्म को-प्रोडक्शन का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। उन्होंने बताया कि एक फ़िल्म की शूटिंग से करीब 300 परिवारों के घरों का चूल्हा चलता है, जिससे स्थानीय रोज़गार को बड़ा सहारा मिलता है। विदेशी फ़िल्मकारों को भारत में निवेश पर 30% तक इंसेंटिव और स्थानीय कहानी व कलाकारों को शामिल करने पर अतिरिक्त लाभ दिया जा रहा है, जिससे राजस्थानी सिनेमा को नई पहचान मिल रही है।

4 फरवरी 

राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में लगा फिल्मी हस्तियों का जमावड़ा

जहां फिल्म अभिनेता एवं एंकर अनुप सोनी ने स्टेज से स्क्रीन तक विषय पर आयोजित मास्टर क्लास में युवाओं को मार्गदर्शन किया तो वहीं महिलाओं सशक्तिकरण को लेकर” स्टोरीज़ दैट एंड्योर – वुमेन, कल्चर और सिनेमा ” और “सिनेमस्थान – आपका कैमरा, हमारा राजस्थान “विषय पर ओपन फोरम आयोजित हुआ जिसमें फिल्मी हस्तियों ने अपने अपने विचार रखे, साथ ही युवाओं के विभिन्न प्रश्नों के भी जवाब दिए।

अभिनेता एवं एंकर अनूप सोनी की हुई मास्टर क्लास

मास्टर क्लास में अनूप सोनी ने बताया कि इस तरह के फिल्म फेस्टिवल का मुख्य उद्देश्य नए कलाकारों, उभरते एक्टर्स और क्रिएटिव लोगों को बे प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना है। अनूप सोनी ने बताया कि थिएटर में पूरा नाटक रैखिक क्रम में चलता है, जबकि फ़िल्मों में शूटिंग नॉन-लिनियर होती है। इसलिए थिएटर का अनुभव स्क्रीन एक्टिंग में कलाकार के लिए एक बड़ी ताक़त बनता है।किसी भी अभिनेता के लिए एक मजबूत और अच्छी तरह लिखी गई स्क्रिप्ट बेहद जरूरी होती है। दुनिया का सर्वश्रेष्ठ अभिनेता भी कमजोर स्क्रिप्ट में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं दे सकता। केवल डायलॉग बोलना नहीं, बल्कि कैमरे के सामने सच्चाई और मौलिकता दिखाना ही ऑडिशन में सफलता की कुंजी होती है।

“सिनेमस्थान – आपका कैमरा, हमारा राजस्थान ” विषय पर हुआ टॉक शो

“सिनेमस्थान – आपका कैमरा, हमारा राजस्थान ” विषय पर आयोजित हुए टॉक शो में भारतीय सिनेमा की कई हस्तियों ने अपने विचार रखे। रफ फाउंडर और फेस्टिवल निदेशक अंशु हर्ष की मेजबानी में हुए टॉक शो में भारतीय अभिनेता ओजस्वी शर्मा ने बताया ने कि फ़िल्म फेस्टिवल्स एक ऐसा मंच हैं जहाँ देश की विभिन्न भाषाओं में बने सिनेमा को एक साथ देखने और समझने का अवसर मिलता है। अभिनेता और कवि शैलेश लोढ़ा ने कहा कि समाज में पढ़ने-देखने की संस्कृति धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है। पहले सारिका, माधुरी जैसी पत्रिकाएँ लोगों के जीवन का हिस्सा थीं, लेकिन अब लोगों ने गहराई से पढ़ना छोड़ दिया है। उन्होंने ज़ोर दिया कि संस्कृति टिकट से नहीं, संस्कार से बनती है, जैसे केरल, बंगाल और मराठी रंगमंच में दिखता है। राजस्थान की विविध बोलियों और भाषाओं को मंच देना ज़रूरी है। वहीं प्रवीण सिंघल ने कहा कि व्यस्त जीवन के बावजूद लोगों का जोधपुर जैसे शहर में फ़िल्म फेस्टिवल में आना इसकी ज़रूरत को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि नए सिनेमा के लिए नई सोच और नई जगहों से शुरुआत ज़रूरी है। फिल्म अभिनेता रजित कपूर ने कहा कि फ़िल्म फेस्टिवल्स का असली उद्देश्य तब पूरा होता है जब शहर के आम लोग उससे जुड़ें। RIFF द्वारा लोकल भाषा और सिनेमा को बढ़ावा देना काबिले-तारीफ है। फ़ेस्टिवल डायरेक्टर सोमेंद्र हर्ष ने कहा कि फ़ेस्टिवल को ट्रैवल कराने का उद्देश्य सिनेमा को बड़े शहरों से निकालकर राजस्थान के लोगों तक पहुँचाना है। जयपुर में रहने के बाद सबसे पहले उनकी मातृभूमि जोधपुर पहुँचा। उन्होंने स्पष्ट किया कि दर्शक संख्या कंटेंट पर निर्भर करती है और राजस्थानी भाषा की फिल्मों को सबसे अधिक रिस्पॉन्स मिला। फ़ेस्टिवल पूरी तरह नॉन-प्रॉफिट और फ्री है क्योंकि कंटेंट इसी शर्त पर मिलता है। भारतीय अभिनेता मकरंद देशपांडे ने कहा कि फ़िल्म फेस्टिवल केवल फ़िल्में दिखाने का मंच नहीं, बल्कि सोच, संवाद और संस्कृति को ज़िंदा रखने का माध्यम होते हैं। सिनेमा को समझने और महसूस करने के लिए धैर्य और संवेदनशील दर्शक ज़रूरी हैं। कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने कहा कि फ़िल्म फेस्टिवल्स नए कलाकारों के लिए सीखने और खुद को समझने का अहम मंच होते हैं।

स्टोरीज़ दैट एंड्योर – वुमेन, कल्चर और सिनेमा विषय पर हुआ टॉक शो

ओपन फोरम की श्रृंखला के तहत महिलाओं के ओपन फ़ोरम का स्टोरीज़ दैट एंड्योर – वुमेन, कल्चर और सिनेमा आयोजन किया गया जिसमें फ़िल्म महोत्सव में देश-विदेश के फ़िल्ममेकर, कलाकार और सिनेमाप्रेमियो ने भाग लिया। अभिनेत्री इति आचार्य ने राजस्थान से दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री तक के अपने सफर के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि 17 वर्ष की उम्र में घर से करीब 3000 किलोमीटर दूर कर्नाटक जाकर, नई भाषा, संस्कृति और माहौल में खुद को स्थापित करना बेहद चुनौतीपूर्ण था। भाषा, खान-पान और अपनापन हर स्तर पर संघर्ष रहा, लेकिन कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री के लोगों ने उन्हें अपनाया, सिखाया और आगे बढ़ने का मौका दिया। उन्होंने कहा कि एक महिला के तौर पर एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में चुनौतियाँ ज़्यादा होती हैं। भारतीय फ़िल्म निर्देशक निवेदिता पोहनकर ने कहा कि उनके जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष किसी असमानता से नहीं, बल्कि खुद को लेखक और निर्देशक के रूप में समझने की प्रक्रिया से जुड़ा रहा है। अभिनेत्री अदिति पोहनकर ने कहा कि अभिनय के सफर में संघर्ष से ज़्यादा ज़रूरी है प्रक्रिया को स्वीकार करना। जैसे खेल में रोज़ अभ्यास ज़रूरी होता है, वैसे ही अभिनय में भी तैयारी और अनुशासन अहम है। भारतीय अभिनेत्री जयति भाटिया ने बताया कि वे सौभाग्यशाली रहीं कि उन्हें घर से बराबरी का माहौल मिला, लेकिन शारीरिक चुनौती और कम आत्मविश्वास के कारण अभिनय का सपना कभी नहीं देखा। मुंबई में लुक के आधार पर रिजेक्शन मिले, लेकिन उन्होंने काम करते रहना चुना। जयति ने कहा कि ‘वर्किंग एक्टर’ बने रहना ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रही। आज सिनेमा व ओटीटी में टैलेंट और ग्लैमर का संतुलन सकारात्मक बदलाव है। अभिनेत्री और फिटनेस आइकन श्वेता मेहता ने कहा कि फिटनेस और बॉडी बिल्डिंग से जुड़ी महिलाओं को अभिनय में आज भी पूर्वाग्रहों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि मसल्स होने के कारण उन्हें संवेदनशील, रोमांटिक और पारिवारिक किरदारों के लिए अनुपयुक्त माना गया। स्टेज ओटीटी राजस्थान की कंटेंट हेड रेणु राणा ने बताया कि वे पिछले 20–22 वर्षों से इंडस्ट्री से जुड़ी हैं और उनके लिए संघर्ष एक सीखने की यात्रा रहा है। राजस्थान की हालिया वेब सीरीज़ में महिला पात्रों को नायक और एंटी-हीरोइन के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। रेणु राणा के अनुसार, महिलाएँ संस्कृति की संवाहक हैं और उनके बिना सिनेमा की भावनात्मक गहराई अधूरी रहती है।

इन शॉर्ट फिल्मों का हुआ प्रदर्शन

कुंजारानी देवी, बेलियाम, रेजोल्यूशन, ओस्लो, हाइजीनुवा परफ्यूम, एबोव द लिमिट्स, जे, योलो जिलों, द मैन हू हर्ल्स न्यूज, गेस्ट्स, लेटर फ्रॉम द वुल्फ स्ट्रीट का प्रदर्शन किया गया।

5 फरवरी 

सिनेमा, संस्कृति और राजस्थान की विरासत के संगम का मंच बना रिफ

– मेहरानगढ़ में आयोजित हुई भव्य अवॉर्ड नाईट
– सिनेमा जगत उत्कृष्ट योगदान के लिए 9 हस्तियों को स्पेशल अवार्ड्स से किया सम्मानित
– सिनेमा, अभिनय, निर्देशन, लेखन और तकनीकी क्षेत्रों में 87 प्रतिभाओं को दिए अवार्ड

राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का समापन समारोह एवं अवॉर्ड नाईट ऐतिहासिक मेहरानगढ़ दुर्ग में आयोजित हुआ। रंग-बिरंगे सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच आयोजित मेगा अवार्ड नाइट में अभिनेता, निर्देशक और सिनेमा जगत से जुड़ी नामचीन हस्तियाँ ने शिरकत की।

पूर्व नरेश गजसिंह एवं पूर्व महारानी हेमलता राजे के मुख्य आतिथ्य में आयोजित हुए 12 वें राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के समापन समारोह एवं मेगा अवार्ड नाइट में भारतीय और अंतरराष्ट्रीय सिनेमा जगत की दिग्गज हस्तियों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए स्पेशल अवार्ड्स से सम्मानित किया गया। साथ ही सिनेमा, अभिनय, निर्देशन, लेखन और तकनीकी क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 87 प्रतिभाओं को भी सम्मानित किया गया।

RIFF टीम के RIFF फाउंडर व फेस्टिवल डायरेक्टर सोमेंद्र हर्ष ने बताया कि अवार्ड सेरेमनी ने सिनेमा, संस्कृति और राजस्थान की विरासत को एक मंच पर खूबसूरती से प्रस्तुत किया। पाँच दिनों तक चले इस आयोजन के दौरान 78 से अधिक हिंदी, इंग्लिश और राजस्थानी सहित विभिन्न श्रेणियों की फिल्में प्रदर्शित की गईं, जिनमें फीचर फिल्में, शॉर्ट फिल्में और डॉक्यूमेंट्री शामिल रहीं। निदेशक अंशु हर्ष ने रिफ के सफल आयोजन के लिए सभी का आभार व्यक्त किया। मुख्य अतिथि पूर्व नरेश गजसिंह ने कहा कि सिनेमा एक ऐसा सशक्त माध्यम है, जो विभिन्न संस्कृतियों को आपस में जोड़ता है और समाज की श्रेष्ठ रचनात्मकता को सामने लाता है। उन्होंने राजस्थानी भाषा में फिल्मों, डॉक्यूमेंट्री और टेलीविजन धारावाहिकों के निर्माण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि राजस्थानी एक समृद्ध भाषा है, जो लोगों का भरपूर मनोरंजन करने के साथ उनकी सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करती है। उन्होंने बताया कि राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के माध्यम से जोधपुर तक संस्कृति, समझ और जानकारी पहुँची है, जिससे शहर को बड़ा लाभ हुआ है।

अभिनेता और मशहूर कवि शैलेश लोढ़ा ने कहा कि मारवाड़ की कला, संस्कृति, संगीत और साहित्य के प्रति लोगों का अनुराग अद्भुत है और उन्हें अपने शहर पर गर्व है। उन्होंने युवाओं से अन्य भाषाएँ सीखने के साथ-साथ मारवाड़ी भाषा और संस्कृति को सहेजने की अपील की। उन्होंने अपने पिता श्याम सिंह लोढ़ा की स्मृति में घोषणा की कि अगले वर्ष राजस्थान में बनने वाली फीचर फिल्मों को दो सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार दिए जाएंगे, जिनकी राशि एक लाख रुपये और पचास हजार रुपये होगी।

सम्मान से अभिभूत हुए अभिनेता रजित कपूर

अभिनेता रजित कपूर ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए एक बड़ा और अप्रत्याशित आश्चर्य है। वे यहां फिल्में देखने और अपनी शॉर्ट फिल्मों को प्रस्तुत करने आए थे, लेकिन इस तरह का पुरस्कार मिलने की उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। उन्होंने कहा कि एक अभिनेता के रूप में निरंतर सीखते रहना और आगे बढ़ने की कोशिश करना उनका कर्तव्य है। रंगमंच हमेशा उनके जीवन का अहम हिस्सा रहा है और सिनेमा व थिएटर का यह सफर आगे भी जारी रहेगा। रजत कपूर ने बताया कि बीते दिनों में उन्होंने पैदल पूरे पुराने शहर को देखा, ओसियां तक गए और अब उन्हें जोधपुर की हवा और माहौल से गहरा जुड़ाव महसूस हो रहा।

फिल्म अभिनेता मकरंद देशपांडे ने कहा कि किसी कलाकार के लिए पुरस्कार मिलना बड़ी बात नहीं होती, बल्कि यह अधिक महत्वपूर्ण है कि वह सम्मान किस स्थान पर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि मेहरानगढ़ किला अपने आप में इतिहास, कला और संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। ऐसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थल पर सम्मानित होना हर कलाकार के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है।

इन हस्तियों का हुआ सम्मान

1. RIFF 2026 में भारतीय सिनेमा में दीर्घकालीन और उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रसिद्ध अभिनेता रजित कपूर को लीजेंडरी अवार्ड ऑफ एक्सीलेंस से सम्मानित किया गया
2. अंतरराष्ट्रीय सिनेमा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दीना रोज़नमेयर को ऑनरेरी अवार्ड ऑफ एक्सीलेंस प्रदान किया गया।
3. राजस्थान की कला और संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले कवि, लेखक और टीवी कलाकार शैलेश लोढ़ा को प्राइड ऑफ राजस्थान अवार्ड से नवाजा गया।
4. भारतीय सिनेमा में कास्टिंग और प्रतिभाओं को मंच देने में अहम भूमिका निभाने वाले कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा को ऑनरेरी अवार्ड ऑफ एक्सीलेंस से सम्मानित किया गया।
5. थिएटर, टेलीविजन और सिनेमा में सशक्त अभिनय के लिए जानी जाने वाली वरिष्ठ अभिनेत्री जयति भाटिया को भारतीय सिनेमा एवं टीवी में योगदान हेतु ऑनरेरी अवार्ड ऑफ एक्सीलेंस प्रदान किया गया।
6. अभिनेता और टीवी होस्ट अनूप सोनी को भारतीय सिनेमा और टेलीविजन में उनके प्रभावशाली अभिनय और योगदान के लिए अवार्ड ऑफ एक्सीलेंस से सम्मानित किया गया।
7. सिनेमा जगत में लेखन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए लेखिका और अभिनेत्री सीमा कपूर को बेस्ट ऑथर इन द फील्ड ऑफ सिनेमा अवार्ड प्रदान किया गया।
8. युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत और राजस्थान से उभरती प्रतिभा शहज़ाद अली को यूथ आइकन ऑफ राजस्थान अवार्ड से सम्मानित किया गया।
9. RIFF 2026 की थीम Cinemasthan – Your Lens, Our Rajasthan के अंतर्गत राजस्थान की संस्कृति और कहानियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आगे बढ़ाने के लिए STAGE OTT को थीम अवार्ड प्रदान किया गया। कार्यक्रम का मंच संचालन जैसेलमेर के मरु श्री विजय बालानी व अभिनेत्री इति आचार्य ने किया। कार्यक्रम के सहयोगी सुरेश राठी ग्रुप रहे।

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor