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Thursday, March 12, 2026, 10:48 am

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अटल पेंशन योजना 2030-31 तक विस्तारित: सुरक्षा कवच या आम आदमी से छलावा?…एक रिपोर्ट

18 से 40 वर्ष के युवाओं के लिए गारंटीड पेंशन का वादा, मगर महंगाई और जीवन प्रत्याशा के गणित में कितनी टिकाऊ है यह योजना? अगर समग्र विश्लेषण करें तो यह योजना आम आदमी के साथ छलावा है…क्योंकि 18 साल का युवा जब 60 साल के बाद 5000 रुपए पेंशन प्राप्त करेगा तो तत्कालीन महंगाई प्रत्याशा के कारण उसकी कीमत 450-500 रुपए के बराबर होगी और वह एक सप्ताह का राशन भी नहीं खरीद पाएगा…यह योजना अतार्किक और सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करने का प्रयास है…प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चाहिए कि इस योजना की समीक्षा करें और इसे रिलॉन्च करें…।

दिलीप कुमार पुरोहित. नई दिल्ली

9783414079 diliprakhai@gmail.com

केंद्र सरकार ने अटल पेंशन योजना (APY) की अवधि को 2030-31 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। असंगठित क्षेत्र और निजी क्षेत्र में कार्यरत करोड़ों कामगारों के लिए यह योजना सामाजिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण माध्यम मानी जाती है। सरकार का दावा है कि यह योजना बुजुर्गावस्था में न्यूनतम आय की गारंटी देती है। वर्तमान में इसके 8.67 करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर हैं।

लेकिन सवाल यह है कि 1000 से 5000 रुपए तक की गारंटीड मासिक पेंशन क्या भविष्य की महंगाई के सामने टिक पाएगी? 18 साल का युवा यदि आज इस योजना में जुड़ता है, तो 42 वर्षों बाद मिलने वाली 1000 या 5000 रुपए की पेंशन की वास्तविक कीमत क्या रह जाएगी? और 40 वर्ष की आयु में जुड़ने वाले व्यक्ति के लिए यह योजना कितनी व्यवहारिक है? इन सभी पहलुओं की विस्तृत समीक्षा जरूरी है।

योजना की प्रमुख विशेषताएं

  • पात्रता: 18 से 40 वर्ष की आयु

  • पेंशन: 1000, 2000, 3000, 4000 या 5000 रुपए प्रति माह (60 वर्ष की आयु के बाद)

  • बैंक या पोस्ट ऑफिस में बचत खाता अनिवार्य

  • एक व्यक्ति केवल एक खाता

  • मासिक या तिमाही भुगतान की सुविधा

  • 2022 से आयकर दाता इस योजना के पात्र नहीं

सरकार का उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, घरेलू कामगारों, छोटे व्यापारियों और कम आय वर्ग के लोगों को वृद्धावस्था में न्यूनतम आर्थिक सुरक्षा देना है।

योगदान का गणित: 18 साल बनाम 40 साल

यदि कोई 18 वर्ष की आयु में जुड़ता है
पेंशन (₹) मासिक योगदान (₹)
1000 42
2000 84
3000 126
4000 168
5000 210

42 वर्षों तक 210 रुपए जमा करने पर कुल योगदान होगा:
210 × 12 × 42 = 1,05,840 रुपए

इसके बदले 60 वर्ष के बाद 5000 रुपए प्रतिमाह (यानी 60,000 रुपए प्रतिवर्ष) की पेंशन मिलेगी।

यदि कोई 40 वर्ष की आयु में जुड़ता है
पेंशन (₹) मासिक योगदान (₹)
1000 291
2000 582
3000 873
4000 1164
5000 1454

20 वर्षों तक 1454 रुपए जमा करने पर कुल योगदान होगा:
1454 × 12 × 20 = 3,48,960 रुपए

महंगाई का गणित: 42 साल बाद 1000 और 5000 की कीमत क्या होगी?

भारत में औसत महंगाई दर लगभग 5-6% के बीच रहती है। यदि हम 6% वार्षिक महंगाई दर मान लें, तो 42 वर्षों बाद पैसे की क्रय शक्ति लगभग 11-12 गुना घट सकती है।

18 वर्ष के युवा के लिए (42 साल बाद)

  • आज के 1000 रुपए की कीमत 42 साल बाद लगभग 90-100 रुपए के बराबर रह जाएगी।

  • 5000 रुपए की कीमत घटकर लगभग 450-500 रुपए के बराबर हो सकती है।

अर्थात 2068-2070 के आसपास 5000 रुपए की पेंशन से संभवतः एक सप्ताह का राशन भी मुश्किल से आ पाए।

40 वर्ष के व्यक्ति के लिए (20 साल बाद)

यदि महंगाई दर 6% मानें तो 20 वर्षों में पैसे की क्रय शक्ति लगभग 3.2 गुना घट सकती है।

  • 1000 रुपए की पेंशन की वास्तविक कीमत लगभग 310-350 रुपए रह जाएगी।

  • 5000 रुपए की पेंशन की कीमत लगभग 1500-1700 रुपए के बराबर होगी।

यानी 2046 के आसपास 5000 रुपए शायद बिजली-पानी का बिल भरने तक सीमित रह जाए।

जीवन प्रत्याशा का सवाल

भारत में औसत जीवन प्रत्याशा लगभग 69-70 वर्ष है। शहरी क्षेत्रों में यह 72-75 वर्ष तक भी पहुंच रही है।

यदि कोई व्यक्ति 60 वर्ष की आयु में रिटायर होता है और औसतन 75 वर्ष तक जीवित रहता है, तो उसे लगभग 15 वर्षों तक पेंशन मिल सकती है।

18 वर्ष की आयु में 5000 वाली योजना

  • कुल योगदान: लगभग 1.05 लाख रुपए

  • यदि 15 वर्षों तक पेंशन मिली: 60,000 × 15 = 9 लाख रुपए

कागज पर यह बड़ा लाभ दिखता है।

लेकिन महंगाई समायोजन के बाद वास्तविक लाभ बहुत कम रह जाएगा।

40 वर्ष की आयु में 5000 वाली योजना

  • कुल योगदान: लगभग 3.49 लाख रुपए

  • 15 वर्षों में कुल पेंशन: 9 लाख रुपए

यहां भी आंकड़े आकर्षक लगते हैं, परंतु वास्तविक क्रय शक्ति घट चुकी होगी।

योजना के पक्ष में तर्क

  1. गारंटीड पेंशन – यह बाजार आधारित योजना नहीं है, इसलिए जोखिम कम है।

  2. कम आय वर्ग के लिए आसान – 42 या 84 रुपए जैसी छोटी राशि से शुरुआत संभव।

  3. सरकारी सुरक्षा – पेंशन की गारंटी केंद्र सरकार देती है।

  4. सामाजिक सुरक्षा का आधार – जिनके पास EPF, NPS या अन्य निवेश विकल्प नहीं हैं, उनके लिए न्यूनतम सहारा।

योजना की सीमाएं और आलोचना

  1. महंगाई से असंबद्ध पेंशन – राशि फिक्स है, महंगाई से लिंक नहीं।

  2. बहुत लंबी लॉक-इन अवधि – 42 साल तक पैसा बंधा रहता है।

  3. कम रिटर्न की संभावना – यदि वही राशि SIP या अन्य निवेश में लगाई जाए तो बेहतर रिटर्न मिल सकता है।

  4. टैक्सपेयर्स बाहर – 2022 के बाद आयकर दाता इसमें शामिल नहीं हो सकते।

क्या सरकार आम आदमी को भ्रमित कर रही है?

यह कहना अतिशयोक्ति होगा कि सरकार लोगों को “बेवकूफ” बना रही है। दरअसल यह योजना निवेश योजना नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा योजना है। सरकार का उद्देश्य गरीब और असंगठित क्षेत्र के कामगारों को न्यूनतम आय सुनिश्चित करना है।लेकिन समस्या यह है कि पेंशन राशि महंगाई के अनुरूप नहीं बढ़ती। यदि इसे महंगाई से लिंक किया जाता, तो यह योजना अधिक प्रभावी होती।

वैकल्पिक तुलना: SIP बनाम APY

यदि 18 वर्ष का व्यक्ति 210 रुपए प्रतिमाह 42 वर्षों तक 10% वार्षिक रिटर्न वाले म्यूचुअल फंड SIP में निवेश करे, तो रिटायरमेंट पर उसके पास लगभग 15-20 लाख रुपए हो सकते हैं। उस रकम से 60 वर्ष के बाद वह 8-10 हजार रुपए मासिक निकाल सकता है।लेकिन इसमें बाजार जोखिम है, जबकि APY में गारंटी है।

राइजिंग भास्कर विचार : सहारा है, समाधान नहीं

अटल पेंशन योजना को पूर्ण समाधान मानना गलत होगा। यह गरीब और असंगठित क्षेत्र के लोगों के लिए न्यूनतम सुरक्षा कवच है, लेकिन समृद्ध वृद्धावस्था की गारंटी नहीं। 18 वर्ष के युवा के लिए यह योजना लंबी अवधि में महंगाई के कारण कमजोर पड़ सकती है। 40 वर्ष के व्यक्ति के लिए यह योजना अपेक्षाकृत व्यावहारिक है, क्योंकि समय कम है और जोखिम लेने की क्षमता भी कम होती है।

अटल पेंशन योजना : ‘सुरक्षा जाल’ तो है पर ‘आर्थिक स्वतंत्रता’ का मार्ग नहीं

  • यदि आप पूरी तरह असंगठित क्षेत्र में हैं और कोई अन्य पेंशन विकल्प नहीं है — तो यह योजना लाभप्रद है।

  • यदि आप निवेश के अन्य विकल्प समझते हैं और लंबी अवधि का दृष्टिकोण रखते हैं — तो APY के साथ अन्य निवेश भी जरूरी है।

अटल पेंशन योजना “सुरक्षा जाल” तो है, पर “आर्थिक स्वतंत्रता” का मार्ग नहीं। सरकार यदि भविष्य में इसे महंगाई से जोड़ दे, तो यह वास्तव में बुजुर्गों के लिए सम्मानजनक जीवन की गारंटी बन सकती है। फिलहाल यह योजना गरीब वर्ग के लिए एक आधारभूत सहारा है — लेकिन बदलती अर्थव्यवस्था और बढ़ती महंगाई के दौर में इसकी प्रभावशीलता पर गंभीर बहस जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चाहिए कि अटल पेंशन की समीक्षा करे और इसे व्यावहारिक बनाते हुए रिलॉन्च करें।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor