साधारण शुरुआत…असाधारण सफलता…
एक ऐसी बेटी की कहानी, जिसने अभावों को अवसर में बदला और सपनों को साकार किया
पायल का कहना है कि IPCC में फेल होने के बाद अगर मैं रुक जाती, तो आज CA पायल राठी नहीं होती। और सबसे जरूरी—जीवन में अगर कोई सुरेश जी राठी जैसा मार्गदर्शक मिल जाए, तो उनका सम्मान कीजिए। ऐसे लोग ही समाज की असली पूंजी हैं।
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
9783414079 diliprakhai@gmail.com
हर सफलता के पीछे एक कहानी होती है—संघर्ष, धैर्य, असफलता और फिर उससे उबरने की कहानी। यह कहानी है सीए पायल राठी की, जिनके लिए आठवीं कक्षा के बाद पढ़ाई जारी रखना भी मुश्किल था। आर्थिक तंगी, पारिवारिक जिम्मेदारियां और संसाधनों की कमी—इन सबके बीच उन्होंने न केवल अपनी पढ़ाई जारी रखी, बल्कि देश की कठिनतम परीक्षाओं में से एक चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) को भी उत्तीर्ण कर दिखाया।
यह एक विशेष साक्षात्कार है, जिसमें पायल राठी अपने जीवन के उतार-चढ़ाव, संघर्ष और उन लोगों के बारे में बताती हैं, जिन्होंने उनके जीवन को नई दिशा दी।
प्रश्न 1: पायल जी, अपने बचपन और शुरुआती संघर्षों के बारे में बताइए।
पायल राठी: मेरा बचपन आर्थिक अभावों में बीता। घर की परिस्थितियां ऐसी थीं कि आठवीं कक्षा तक पढ़ पाना भी कठिन हो गया था। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, इसलिए मैंने आठवीं कक्षा से ही ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया। उस उम्र में जब बच्चे खेलते हैं, मैं छोटे बच्चों को पढ़ाकर घर की मदद करने लगी थी।
मेरे लिए पढ़ाई और जिम्मेदारी दोनों साथ-साथ चल रहे थे। कई बार ऐसा लगता था कि शायद अब आगे पढ़ाई संभव नहीं होगी, लेकिन भीतर कहीं एक जिद थी कि हालात चाहे जैसे भी हों, पढ़ाई नहीं छोड़नी है।
प्रश्न 2: दसवीं तक की पढ़ाई आपने कैसे पूरी की?
पायल राठी: दसवीं तक की पढ़ाई मेरे लिए एक बड़ी उपलब्धि थी। इसमें मदर टेरेसा स्कूल का बहुत बड़ा योगदान रहा। वहां से मुझे पढ़ाई जारी रखने का अवसर मिला। मैं दिन में अपनी पढ़ाई करती और शाम को ट्यूशन पढ़ाती।
हालांकि दसवीं के बाद स्थिति और कठिन हो गई। परिवार की आर्थिक समस्याएं बढ़ रही थीं। उस समय लगा कि शायद यहीं तक मेरा शैक्षणिक सफर है। मैंने मन ही मन सोच लिया था कि अब ट्यूशन पढ़ाकर ही जीवन आगे बढ़ाना है।
प्रश्न 3: फिर 12वीं तक की पढ़ाई का रास्ता कैसे खुला?
पायल राठी: यह मेरे जीवन का पहला बड़ा टर्निंग पॉइंट था। मुझे श्री महालक्ष्मी स्कूल के बारे में पता चला। मेरे कजन मामा श्री सोहनलालजी चांडक के रेफरेंस से मैं वहां पहुंची। वहां मेरी मुलाकात श्री नंदकिशोर शाह (नंदूसा) से हुई।
उन्होंने ग्यारहवीं और बारहवीं की पढ़ाई में मुझे पूरा सहयोग दिया। आर्थिक और मानसिक—दोनों तरह से सहारा मिला। उनके विश्वास ने मुझे हिम्मत दी कि मैं आगे बढ़ सकती हूं।
जब मैंने 12वीं पास की, तो वह मेरे लिए एक “माइलस्टोन” था। लेकिन तब तक मुझे यह भी नहीं पता था कि आगे क्या करना है।
प्रश्न 4: CA करने का विचार कैसे आया?
पायल राठी: सच कहूं तो मुझे CA के बारे में कुछ पता नहीं था। मेरा लक्ष्य बस इतना था कि ट्यूशन पढ़ाकर परिवार की मदद करूं। एक बार महेश नवमी के कार्यक्रम में मेरी मुलाकात एक सज्जन से हुई। उन्होंने मुझसे पूछा—“आगे क्या करना है?”
मैं चुप रही, फिर दोस्तों की देखा-देखी बोल दिया—“मुझे CA करना है।” जबकि मुझे CA का ‘C’ भी नहीं पता था। उन्होंने मुझे CPT का फॉर्म लाकर दिया, लेकिन उसके बाद वह दोबारा नहीं मिले। अब मेरे सामने नई समस्या थी—न पैसे, न मार्गदर्शन।
प्रश्न 5: CA की शुरुआत कैसे संभव हुई?
पायल राठी: महेश नवमी के उपलक्ष में डूंगरिया महादेव मंदिर में एक कार्यक्रम था, जिसमें मुख्य अतिथि श्री जे.एम. बूभ सर थे। उन्होंने पुरस्कार वितरण के दौरान CA स्कॉलरशिप की घोषणा की। यह सुनकर मेरे भीतर फिर उम्मीद जगी। मैंने सोचा—यह मौका है, इसे गंवाना नहीं है। यहीं से मेरी CA यात्रा शुरू हुई।
सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि मैं हिंदी मीडियम से पढ़ी थी और CA की पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम से करनी थी। शुरुआत में बहुत कठिन लगा। शब्द समझ नहीं आते थे, किताबें भारी लगती थीं। लेकिन मैंने तय कर लिया था कि पीछे नहीं हटना है।
प्रश्न 6: CPT में आपकी सफलता कैसी रही?
पायल राठी: मैंने खुद पढ़ाई की, साथ में ट्यूशन भी जारी रखी। मेहनत रंग लाई और मैंने CPT परीक्षा में जिला स्तर पर 8वीं रैंक हासिल की। इसका श्रेय मैं BR Jain Coaching Institute को देती हूं। यह मेरे आत्मविश्वास के लिए बहुत बड़ा मोड़ था। लगा कि मैं भी कर सकती हूं।
प्रश्न 7: IPCC में असफलता के समय आपने क्या महसूस किया?
पायल राठी: CPT के बाद IPCC की तैयारी शुरू की। कोचिंग ली, मेहनत की, लेकिन शायद तैयारी पर्याप्त नहीं थी। प्रथम प्रयास में असफल हो गई। यह मेरे जीवन का सबसे कठिन दौर था। मैंने सोचा कि शायद CA मेरे बस की बात नहीं है। मैंने CA छोड़ने का निर्णय लिया और ट्यूशन के साथ नौकरी करने लगी। मुझे टीचिंग जॉब मिल गई। उस समय लगा कि शायद यही सही रास्ता है।
प्रश्न 8: फिर जीवन में बदलाव कैसे आया?
पायल राठी: यही वह समय था जब मेरी मुलाकात श्री दौलत राठी सर से हुई, जो महालक्ष्मी स्कूल की प्रबंध समिति के सदस्य हैं। उन्होंने मेरी पूरी कहानी सुनी और घर आकर परिस्थितियां देखीं। उन्होंने मुझसे कहा—“तुम्हें पढ़ाई नहीं छोड़नी चाहिए।” फिर उन्होंने मेरा परिचय एक ऐसे व्यक्ति से करवाया, जिन्होंने मेरी जिंदगी बदल दी—श्री सुरेश जी राठी सर।
प्रश्न 9: सुरेश राठी सर की भूमिका कैसी रही?
पायल राठी: सुरेश राठी सर मेरे जीवन के सबसे बड़े मार्गदर्शक बने। उन्होंने न केवल आर्थिक सहयोग दिया, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी मेरा साथ दिया। जब मैं हार मान चुकी थी, तब उन्होंने मुझमें विश्वास जगाया। उन्होंने कहा—“तुम्हें CA बनना है, और तुम बनोगी।”
उनके विश्वास ने मुझे फिर से खड़ा कर दिया। मैंने दोबारा तैयारी शुरू की। इस बार लक्ष्य साफ था और आत्मविश्वास मजबूत।
प्रश्न 10: अंतिम सफलता का क्षण कैसा था?
पायल राठी: जब मैंने अंतिम परीक्षा पास की और “CA” शब्द अपने नाम के आगे जुड़ा देखा, तो आंखों में आंसू थे। मुझे अपने संघर्ष के दिन याद आए—आठवीं में ट्यूशन पढ़ाना, पैसों की कमी, असफलता का दर्द। यह सिर्फ मेरी जीत नहीं थी—यह मेरे परिवार, मेरे शिक्षकों और विशेष रूप से सुरेश राठी सर की जीत थी।
प्रश्न 11: आज आप युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगी?
पायल राठी: मैं यही कहना चाहूंगी कि परिस्थितियां कभी भी आपकी मंजिल तय नहीं करतीं। अगर आप ठान लें, तो रास्ते खुद बनते हैं। असफलता अंत नहीं है। IPCC में फेल होने के बाद अगर मैं रुक जाती, तो आज CA पायल राठी नहीं होती। और सबसे जरूरी—जीवन में अगर कोई सुरेश जी राठी जैसा मार्गदर्शक मिल जाए, तो उनका सम्मान कीजिए। ऐसे लोग ही समाज की असली पूंजी हैं।
यह उस विश्वास की कहानी है जो अभावों के बीच भी जीवित रहता है
सीए पायल राठी की कहानी केवल एक लड़की की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस विश्वास की कहानी है जो अभावों के बीच भी जीवित रहता है।
आठवीं से ट्यूशन पढ़ाने वाली लड़की से लेकर देश की प्रतिष्ठित परीक्षा पास करने तक का सफर आसान नहीं था। इसमें कई बार निराशा आई, कई बार लगा कि अब सब खत्म हो गया। लेकिन हर बार किसी न किसी रूप में एक हाथ आगे बढ़ा—मदर टेरेसा स्कूल, महालक्ष्मी स्कूल, नंदकिशोर शाह, दौलत राठी और अंततः सुरेश राठी सर का।
आज पायल राठी एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। उनका सपना पूरा हो चुका है। लेकिन उनकी कहानी हर उस बेटी के लिए प्रेरणा है, जो परिस्थितियों से लड़ रही है।
यह कहानी हमें सिखाती है—
“अगर इरादे मजबूत हों, तो हालात भी झुक जाते हैं।”








