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Thursday, February 26, 2026, 3:23 am

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जोधपुर की वीना अचतानी को मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान, “मातृभाषा रत्न” से हुईं विभूषित

यह प्रतिष्ठित सम्मान “शब्द प्रतिभा बहुक्षेत्रीय सम्मान फाउंडेशन नेपाल” द्वारा दिया गया, जो नेपाल सरकार में पंजीकृत संस्था है। संस्था की ओर से जारी डिजिटल प्रशस्ति पत्र में वीना अचतानी के मातृभाषा सेवा क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों का विशेष उल्लेख किया गया है।

राखी पुरोहित. नेपाल. काठमांडू

भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, पहचान और आत्मगौरव का आधार होती है। इसी विचार को साकार करते हुए जोधपुर की सम्माननीय वीना अचतानी को नेपाल की प्रतिष्ठित संस्था द्वारा “मातृभाषा रत्न” मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 21 फरवरी 2026 के अवसर पर प्रदान किया गया।

यह प्रतिष्ठित सम्मान “शब्द प्रतिभा बहुक्षेत्रीय सम्मान फाउंडेशन नेपाल” द्वारा दिया गया, जो नेपाल सरकार में पंजीकृत संस्था है। संस्था की ओर से जारी डिजिटल प्रशस्ति पत्र में वीना अचतानी के मातृभाषा सेवा क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों का विशेष उल्लेख किया गया है। इस उपलब्धि से न केवल जोधपुर बल्कि पूरे राजस्थान का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन हुआ है।

प्रशस्ति पत्र में स्पष्ट किया गया है कि वीना अचतानी को मातृभाषा के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार में उनके निरंतर योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया। संस्था के अध्यक्ष आनंद गिरि मायालु तथा चयन समिति प्रमुख मंजु खरे (दतिया) के हस्ताक्षर से जारी इस प्रमाणपत्र में उनके उज्ज्वल भविष्य और दीर्घायु जीवन की कामना भी की गई है।

वीना अचतानी पिछले कई वर्षों से मातृभाषा के प्रति जागरूकता फैलाने, स्थानीय भाषाई परंपराओं को सहेजने और नई पीढ़ी को अपनी भाषा से जोड़ने के प्रयासों में सक्रिय रही हैं। उन्होंने विभिन्न साहित्यिक मंचों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सामाजिक आयोजनों के माध्यम से मातृभाषा के महत्व को रेखांकित किया है। उनका मानना है कि “जिस समाज की भाषा मजबूत होती है, उसकी संस्कृति और सोच भी सशक्त होती है।”

अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस, जो हर वर्ष 21 फरवरी को मनाया जाता है, भाषाई विविधता और बहुभाषावाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से समर्पित है। ऐसे महत्वपूर्ण दिन पर वीना अचतानी को यह सम्मान मिलना उनके कार्यों की वैश्विक मान्यता को दर्शाता है।
जोधपुर के साहित्यिक और सामाजिक संगठनों ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त किया है। शहर के विभिन्न बुद्धिजीवियों का कहना है कि यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे मारवाड़ की सांस्कृतिक विरासत का सम्मान है। स्थानीय शिक्षाविदों ने भी इसे नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया है।

वीना अचतानी ने इस सम्मान को स्वीकार करते हुए कहा कि यह पुरस्कार उनके लिए जिम्मेदारी को और बढ़ा देता है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा केवल बोलने का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी भावनाओं और विचारों की आत्मा है। यदि हम अपनी भाषा को भूल जाएंगे तो अपनी जड़ों से कट जाएंगे।

उन्होंने आगे कहा कि आज के डिजिटल युग में जहां विदेशी भाषाओं का प्रभाव बढ़ रहा है, वहीं मातृभाषा को बचाए रखना एक सामाजिक दायित्व है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अपनी मातृभाषा में भी दक्षता विकसित करें और उसे गर्व के साथ अपनाएं। नेपाल की संस्था द्वारा जारी यह ई-प्रशस्ति पत्र वैध डिजिटल प्रमाणपत्र (Valid E-Certificate) के रूप में मान्य है। इसमें पंजीकरण संख्या SPMBFN/IMLD/2026/0084 अंकित है, जो इसकी आधिकारिकता को दर्शाता है।
राजस्थान में भाषा और साहित्य के क्षेत्र में कार्य करने वाले संगठनों ने कहा कि वीना अचतानी का यह सम्मान साबित करता है कि यदि समर्पण और निरंतरता हो तो स्थानीय स्तर पर किया गया कार्य भी अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच सकता है। समाजसेवियों का मानना है कि आज आवश्यकता है कि हम अपनी क्षेत्रीय भाषाओं—जैसे मारवाड़ी, राजस्थानी और हिंदी—को संरक्षित रखें। स्कूलों और सामाजिक संस्थाओं को चाहिए कि वे बच्चों को अपनी मातृभाषा में पढ़ने-लिखने और बोलने के लिए प्रोत्साहित करें।
वीना अचतानी की इस उपलब्धि ने जोधपुर में भाषा प्रेमियों के बीच नया उत्साह पैदा किया है। यह सम्मान एक संदेश भी देता है कि सीमाएं भाषाओं को नहीं बांध सकतीं। जब कोई व्यक्ति अपनी मातृभाषा के लिए समर्पित भाव से कार्य करता है, तो उसकी गूंज अंतरराष्ट्रीय स्तर तक सुनाई देती है।

अंततः, “मातृभाषा रत्न” सम्मान केवल एक उपाधि नहीं, बल्कि मातृभाषा के प्रति समर्पण और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। वीना अचतानी ने यह साबित कर दिया है कि अपनी जड़ों से जुड़कर ही वैश्विक पहचान बनाई जा सकती है। जोधपुर की यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगी कि वे अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को गर्व के साथ अपनाएं और उन्हें विश्व मंच तक पहुंचाने का संकल्प लें।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor