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Thursday, March 12, 2026, 10:20 am

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जीवन की सांझ में नई भोर….जोधाणा वृद्धाश्रम के बुजुर्ग आत्मसंतोष, अध्यात्म और अध्ययन की राह पर

जोधाणा जन कल्याण सेवा समिति का जोधाणा वृद्धाश्रम…जहां सुबह सुबह सुहानी और सांझ कल्याणी होती है…प्रवेश करते ही बड़ा गार्डन मन को बाग-बाग कर देता है…हर कमरों की कहानी ऊर्जावान है…रसोई उन्नत, साफ-सफाई स्वागत करती है…हर बुजुर्ग जीवन के हर पल का आनंद लेते हैं…इंडाेर गेम, दर्शनीय स्थलों का भ्रमण और आश्रम की उदात्त भावनाएं इस आश्रम की गरिमा और गौरव में चार चांद लगा देते हैं…। एक रिपोर्ट

दिलीप कुमार पुरोहित. राखी पुरोहित | जोधपुर 

शाम की ढलती रोशनी में जब सूरज की किरणें जोधपुर की हवाओं में सुनहरी आभा घोल रही थीं, तब राइजिंग भास्कर के ग्रुप एडिटर दिलीप कुमार पुरोहित और एडिटर इन चीफ राखी पुरोहित ऑटो से महामंदिर क्षेत्र की ओर बढ़ रहे थे। गंतव्य था—रूपनगर, रूपाबाई का जाव, प्रथम गली, शिव शक्ति नगर तीसरी पोल के बाहर स्थित जोधाणा वृद्धाश्रम।

बाहर से देखने पर यह एक सुव्यवस्थित, विशाल भवन है। लेकिन भीतर कदम रखते ही एहसास होता है कि यह केवल भवन नहीं, भावनाओं का घर है। यहां सांझ की बेला में भी एक नई सुबह की किरण झलकती है। कौन कहता है कि बुढ़ापा जीवन की सांझ है? यहां आकर लगता है—बुढ़ापा जीवन की नई भोर है।

स्वागत में आत्मीयता, वातावरण में अपनापन

आश्रम के संरक्षक रतन सिंह गहलोत ने दोनों का आत्मीय स्वागत किया। उनके चेहरे पर संतोष की मुस्कान थी—जैसे उन्होंने जीवन के किसी बड़े उद्देश्य को साकार कर लिया हो। 3295 वर्ग गज में फैले इस वृद्धाश्रम का परिसर साफ-सुथरा, सुसज्जित और व्यवस्थित है।

रतन सिंह गहलोत बताते हैं, “आज के बदलते सामाजिक परिवेश में संयुक्त परिवारों का स्वरूप टूट गया है। बच्चे पढ़ाई और रोजगार के लिए देश-विदेश चले जाते हैं। कई बुजुर्ग निसंतान हैं, कई विधवा या विधुर हैं, किसी के बच्चे नहीं रहे, किसी की केवल बेटियां हैं जो विवाह के बाद ससुराल चली गईं। ऐसे अनेक कारणों से बुजुर्गों को सहारे की जरूरत होती है। उसी जरूरत से 1 जून 2013 को इस वृद्धाश्रम की स्थापना हुई।”

डायनिंग हॉल में सजी जीवन की मुस्कान

जब दिलीप कुमार पुरोहित और राखी पुरोहित डायनिंग हॉल में पहुंचे, तब वहां डिनर का समय था। विशाल, एयरकंडीशनर युक्त डायनिंग हॉल में बुजुर्ग शुद्ध शाकाहारी, पौष्टिक भोजन कर रहे थे। कोई हल्की-फुल्की बातचीत कर रहा था, कोई मुस्कुरा रहा था, कोई चुपचाप संतोष के साथ रोटी का कौर ले रहा था।

राखी पुरोहित ने एक दादीजी से पूछा, “मांजी, यहां आपको कैसा लगता है?” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “बिटिया, यहां हमें समय पर खाना मिलता है, दवा मिलती है, बात करने वाले लोग मिलते हैं। घर की याद तो आती है, पर अब यही हमारा घर है।” एक बुजुर्ग सज्जन बोले, “मैं रिटायरमेंट के बाद खुद अपनी इच्छा से यहां आया हूं। बच्चों पर बोझ क्यों बनूं? यहां मित्र मिल गए, समय पर चाय-नाश्ता, टीवी, अखबार सब मिलता है। जीवन व्यवस्थित हो गया है।” उनकी आंखों में न शिकायत थी, न कड़वाहट—बस एक शांत स्वीकार्यता और नई शुरुआत का भाव था।

प्रवेश की शर्तें—सम्मान और अनुशासन

आश्रम के मैनेजर दीपक गहलोत बताते हैं कि यहां प्रवेश निशुल्क है, लेकिन कुछ शर्तें हैं। आवेदक की आयु 60 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए। पुरुष या महिला दोनों प्रवेश ले सकते हैं। आवेदक को शपथ पत्र देना होता है कि वह अपनी स्वेच्छा से प्रवेश ले रहा है और आश्रम के नियमों को स्वीकार करता है।

प्रवेश के समय पूर्ण मेडिकल चेकअप होता है। किसी संक्रामक या गंभीर बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति को प्रवेश नहीं दिया जाता। आश्रम परिसर में मांसाहार, मद्यपान और धूम्रपान पूर्णतः वर्जित है। अंतिम निर्णय संचालन समिति का होता है। यह अनुशासन ही आश्रम को आदर्श बनाता है।

सुविधाएं—आम घरों से भी बढ़कर

दीपक गहलोत पूरे आश्रम का भ्रमण करवाते हैं। 30 आधुनिक एवं आरामदायक कमरे और डोरमेट्री हॉल में कुल 60 बेड की व्यवस्था है। प्रत्येक कक्ष में खिड़कियां, रोशनदान और बरामदे हैं ताकि ताजी हवा आती रहे। गर्मी में एसी, सर्दी में रूम हीटर। अटैच बाथरूम, गीजर, हेयर ड्रायर की सुविधा। लिफ्ट की व्यवस्था ताकि बुजुर्गों को सीढ़ियां न चढ़नी पड़ें।

स्वास्थ्य के लिए समय-समय पर चिकित्सकों की जांच, परामर्श, फिजियोथेरेपी सेंटर और एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध है। 24 घंटे सिक्योरिटी गार्ड और सीसीटीवी कैमरे सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। पुस्तकालय, वाचनालय, दैनिक समाचार पत्र और पत्रिकाएं—ज्ञान की रोशनी को जीवित रखते हैं। प्रत्येक कमरे में टीवी और डिश कनेक्शन, वाई-फाई की सुविधा, इन्वर्टर और जेनरेटर—सब कुछ यहां उपलब्ध है। आरओ तकनीक से शुद्ध पानी, विशाल रसोई और सुपाच्य, पौष्टिक भोजन की व्यवस्था—यह सब देखकर कह सकते हैं, “यह तो सच में आदर्श वृद्धाश्रम है।”

आध्यात्म और संस्कृति का संगम

आश्रम परिसर में मंदिर है। समय-समय पर श्रीमद्भागवत कथा, गीता पाठ, सुंदरकांड, जागरण और संत-महापुरुषों के प्रवचन होते हैं। तीज-त्योहार, सांस्कृतिक कार्यक्रम, जन्मदिन उत्सव—हर अवसर पर उत्सव का माहौल रहता है। हर निवासी का जन्मदिन मनाया जाता है। चेहरे पर चमक आ जाती है—जैसे बचपन लौट आया हो।

नई पीढ़ी को संस्कार

आश्रम में शहर के स्कूली बच्चों को आमंत्रित किया जाता है। उन्हें बुजुर्गों के प्रति सेवा और सम्मान का भाव सिखाया जाता है। जब बच्चे दादा-दादी से मिलते हैं, उनके साथ भजन गाते हैं, बातें करते हैं—तो दोनों पीढ़ियों के बीच एक सेतु बनता है।  “यह केवल वृद्धाश्रम नहीं, संस्कारशाला है।”

अंतिम यात्रा तक सम्मान

यदि किसी निवासी का देहांत हो जाता है, तो जाति-धर्म के अनुसार पूर्ण श्रद्धा और सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाता है। विधि पूर्वक अस्थि विसर्जन हरिद्वार में मां गंगा में कराया जाता है। यह व्यवस्था बताती है कि यहां केवल जीवन ही नहीं, मृत्यु भी सम्मान के साथ स्वीकार की जाती है।

सहयोग की परंपरा

दीपक गहलोत बताते हैं, “लोग अपने जन्मदिन, शादी की सालगिरह या अन्य अवसरों पर यहां भोजन प्रायोजित करते हैं। दो समय के भोजन, नाश्ता और दूध के लिए 6000 रुपये और एक समय के भोजन के लिए 2500 रुपये की सहयोग राशि ली जाती है।” आश्रम की भावी योजना डोरमेट्री हॉल का निर्माण और छत की मरम्मत करवाने की है। इसके लिए बड़े भामाशाह की आवश्यकता है। रतन सिंह गहलोत कहते हैं, “हम चाहते हैं कि कोई दानी सज्जन आगे आए और इस सेवा कार्य में सहयोग करे।”

मन की टीस, लेकिन चेहरे पर संतोष

यह सच है कि मन के किसी कोने में अपनों से दूर होने की टीस रहती है। परंतु यहां रहने वाले बुजुर्गों ने हालात से समझौता नहीं, बल्कि स्वीकार किया है। उन्होंने अपने शेष जीवन को सकारात्मकता के साथ जीने का निर्णय लिया है। जब एक बुजुर्ग से पूछा, “क्या आपको अपने बच्चों की याद आती है?” उन्होंने शांत स्वर में कहा, “याद तो आती है बेटा, पर अब यही मेरा परिवार है। यहां सब एक-दूसरे का ध्यान रखते हैं।” उन शब्दों में दर्द भी था और दृढ़ता भी।

एक संदेश समाज के नाम

जोधाणा वृद्धाश्रम यह संदेश देता है कि बुढ़ापा बोझ नहीं, अनुभव की पूंजी है। यदि समाज और परिवार साथ दें तो बुजुर्गों का जीवन गरिमा और सम्मान से भर सकता है। राइजिंग भास्कर की टीम जब लौट रही थी, तब रात गहरा चुकी थी। पर मन में उजाला था। उस सांझ में सचमुच एक नई सुबह दिखी। यह वृद्धाश्रम केवल चार दीवारों का नाम नहीं, यह संवेदना का घर है। यहां जीवन की सांझ में भी आशा की किरणें खिलती हैं। यहां बुजुर्ग अकेले नहीं हैं—वे सम्मानित हैं, सुरक्षित हैं, और सबसे बढ़कर—वे खुश हैं। शायद यही जीवन की सच्ची भोर है।

जोधाणा वृद्धाश्रम को इस प्रकार कर सकते हैं सहयोग : 

Account Name : Jodhana Jan Kalyan Seva Samiti

Bank Name : Punjab National Bank

Branch : Sumer School, Mahamandir, Jodhpur

Account No. : 51551131001281

IFSC Code : PUNB0515510

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor