कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुष्प अभिषेक से हुआ। मंदिर में सुगंधित पुष्पों, चंदन, केसर और विविध सुगंधित द्रव्यों से चैतन्य महाप्रभु का अभिषेक किया गया। प्रतिमाओं को सप्त नदियों के पवित्र जल से स्नान करवाया गया।
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
रविवार का दिन जोधपुर के चौखा स्थित हरे कृष्णा मूवमेंट के हरे कृष्णा मारवाड़ मंदिर परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति के अनूठे संगम का साक्षी बना। अवसर था चैतन्य महाप्रभु के अवतरण दिवस का, जिसे गेर पूर्णिमा और फूलों की होली के साथ अत्यंत उल्लास, श्रद्धा और अनुशासन के साथ मनाया गया। शाम होते ही मंदिर परिसर में भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया था। महिलाएं रंग-बिरंगे परिधानों में, पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में और बच्चे उत्साह से लबरेज दिखाई दे रहे थे। हर किसी के मुख पर एक ही नाम—हरे कृष्णा, हरे रामा।
पुष्प अभिषेक और सप्त नदियों के जल से स्नान: दिव्यता का आरंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुष्प अभिषेक से हुआ। मंदिर में सुगंधित पुष्पों, चंदन, केसर और विविध सुगंधित द्रव्यों से चैतन्य महाप्रभु का अभिषेक किया गया। प्रतिमाओं को सप्त नदियों के पवित्र जल से स्नान करवाया गया। वातावरण में शंखनाद और घंटियों की ध्वनि गूंज रही थी। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा परिसर किसी दिव्य लोक में परिवर्तित हो गया हो।
परंपरागत विधि-विधान के साथ अभिषेक की प्रत्येक रस्म श्रद्धापूर्वक अदा की गई। भक्तों की आंखें बंद थीं, हाथ जुड़े हुए थे और हृदय भाव-विभोर था।
संकीर्तन में डूबा परिसर: मधाई-जगाई की कथा ने छुआ हृदय
अभिषेक के पश्चात भक्तदास प्रभु ने संकीर्तन प्रस्तुत किया। “हरे कृष्णा, हरे कृष्णा, कृष्णा-कृष्णा हरे-हरे” की ध्वनि ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
भक्तदास प्रभु ने अपने उद्बोधन में चैतन्य महाप्रभु के अवतरण का उद्देश्य स्पष्ट किया—कलियुग में नाम संकीर्तन के माध्यम से मानवता का कल्याण। उन्होंने मधाई और जगाई के हृदय परिवर्तन की मार्मिक कथा सुनाई। किस प्रकार मधाई ने नित्यानंद प्रभु पर पत्थर फेंका, और जब यह समाचार महाप्रभु तक पहुंचा तो वे क्रोधित हुए, किंतु अंततः मधाई और जगाई ने क्षमा मांग ली। महाप्रभु ने उन्हें क्षमा कर अपने भक्तों में स्थान दिया।
यह कथा केवल अतीत की घटना नहीं, बल्कि आज के समाज के लिए भी एक संदेश है—घृणा का उत्तर प्रेम से, हिंसा का उत्तर क्षमा से।
वृंदावन की खोज और छह गोस्वामियों का योगदान
अपने प्रवचन में भक्तदास प्रभु ने महाप्रभु द्वारा वृंदावन की पुनः खोज के प्रसंग का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार महाप्रभु ने भक्ति की उस पवित्र भूमि को पुनर्जीवित किया और बाद में छह गोस्वामियों ने वहां भव्य मंदिरों का निर्माण करवाया। यह केवल स्थापत्य नहीं था, बल्कि संस्कृति, शिक्षा और आध्यात्मिकता का पुनर्जागरण था।
उन्होंने कहा—मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि शिक्षा-संस्कार और संस्कृति के केंद्र होते हैं। यहां आकर मन को शांति मिलती है और जीवन को दिशा।
मंदिर निर्माण: भामाशाहों के सहयोग से साकार हुआ सपना
भक्तदास प्रभु ने हरे कृष्णा मारवाड़ मंदिर के निर्माण की यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार लंका विजय के लिए सेतु निर्माण में गिलहरी से लेकर हनुमानजी तक का योगदान था, उसी प्रकार इस मंदिर के निर्माण में छोटे-बड़े सभी भामाशाहों का अमूल्य सहयोग रहा है।
रायल फाउंडर पेटर्न के रूप में जयप्रकाश अग्रवाल और होडल सिंह चौधरी का विशेष योगदान रहा। एंकर फाउंडर पेटर्न में डॉ. जयप्रकाश सोनी और डॉ. मीनाक्षी सोनी ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई। स्पेशल फाउंडर पेटर्न में सुरेश जी राठी, शशि जी राठी, सत्यनारायण धूत और निर्मल गहलोत का सहयोग सराहनीय रहा।
फाउंडर पेटर्न और रूम स्पॉन्सर्स के रूप में शहर के अनेक प्रतिष्ठित जनों ने तन-मन-धन से योगदान दिया। यह मंदिर आने वाली पीढ़ियों के लिए श्रद्धा, सेवा और संस्कार का केंद्र बनेगा।
पालकी महोत्सव और फूलों की होली: भक्ति का चरम उत्कर्ष
कार्यक्रम का सबसे उल्लासमय और भावपूर्ण क्षण था पालकी महोत्सव। सुसज्जित पालकी में चैतन्य महाप्रभु की प्रतिमा को विराजित कर भक्तों के बीच भ्रमण करवाया गया। जैसे ही पालकी आगे बढ़ी, चारों ओर से पुष्पवर्षा होने लगी।
महिलाएं, पुरुष और बच्चे नृत्य करते हुए पालकी के साथ चल रहे थे। “हरि बोल… हरि बोल…” की स्वर लहरियां वातावरण में गूंज रही थीं। फूलों की होली ने पूरे परिसर को रंग और सुगंध से सराबोर कर दिया। यह दृश्य मानो वृंदावन की होली का सजीव रूप हो।आरती के समय भक्त इतने भाव-विभोर हो गए कि कई लोगों की आंखों से अश्रुधारा बह निकली। जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा।
अन्न वाहन लोकार्पण: सेवा का सजीव संकल्प
कार्यक्रम का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक क्षण तब आया जब आनंद जी राठी, सुरेश जी राठी, सौरभ जी राठी और श्रीमती शशि जी राठी द्वारा अन्न वाहन का विधिवत लोकार्पण किया गया। राठी परिवार द्वारा हरे कृष्णा मूवमेंट को यह अन्न वाहन भेंट किया गया।
जैसे ही वाहन का अनावरण हुआ, उपस्थित भक्तों ने तालियों और जयकारों से स्वागत किया। यह केवल एक वाहन नहीं, बल्कि सेवा, करुणा और समाज कल्याण का चलता-फिरता प्रतीक है। इस अन्न वाहन के माध्यम से स्कूलों और अस्पतालों में निशुल्क भोजन वितरित किया जाएगा। जरूरतमंद बच्चों, रोगियों और वंचित वर्ग तक प्रसाद रूपी भोजन पहुंचेगा। यह पहल समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में एक बड़ा कदम है। सुरेश जी राठी ने कहा कि सेवा ही सच्ची भक्ति है। सुरेश जी राठी ने इसे परिवार का सौभाग्य बताया कि उन्हें इस पुण्य कार्य में सहभागी बनने का अवसर मिला। सौरभ जी राठी ने युवाओं से सेवा कार्यों में आगे आने का आह्वान किया।
अतिथियों का सम्मान और अनुशासित आयोजन
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुरेश जी राठी, श्रीमती शशि जी राठी और सौरभ जी राठी का आयोजकों द्वारा सम्मान किया गया। सेवा देने वाले भक्तों को भी मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया। तरुण गहलोत, निखिलात्मा दास प्रभु, घनश्याम ओझा, डॉ. जेपी सोनी, डॉ. मीनाक्षी सोनी सहित शहर के अनेक प्रबुद्धजन कार्यक्रम में उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में अनुशासन और व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया।
डिनर प्रसादम के साथ भक्ति उत्सव का समापन
संध्या समय डिनर प्रसादम के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। सैकड़ों भक्तों ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। यह दृश्य सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक एकता का प्रतीक था। हरे कृष्णा मूवमेंट के सभी प्रभुजियों और स्वयंसेवकों ने आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न करवाया। पूरे दिन का यह भक्ति उत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में प्रेम, सेवा और संस्कृति के पुनर्जागरण का संदेश देने वाला पर्व बन गया।
भक्ति, सेवा और संस्कृति का संगम
चैतन्य महाप्रभु का अवतरण दिवस जोधपुर में केवल मनाया नहीं गया, बल्कि जिया गया। पुष्प अभिषेक से लेकर पालकी महोत्सव, संकीर्तन से लेकर अन्न वाहन लोकार्पण तक—हर क्षण भक्ति और सेवा से ओतप्रोत रहा। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि जब समाज एकजुट होकर आध्यात्मिक और सामाजिक उद्देश्य के लिए आगे बढ़ता है, तो भक्ति केवल मंदिर की दीवारों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सेवा के रूप में समाज के हर कोने तक पहुंचती है। जोधपुर की धरती पर रविवार को यही संदेश गूंजता रहा—हरे कृष्णा… हरि बोल… प्रेम ही परम धर्म है।
हरे कृष्णा मारवाड़ मंदिर में निर्माण में इनका रहा सहयोग
रायल फाउंडर पेटर्न : जयप्रकाश अग्रवाल, होडल सिंह चौधरी। एंकर फाउंडर पेटर्न के रूप में डॉ. जयप्रकाश सोनी, डॉ. मीनाक्षी सोनी का सहयोग रहा। स्पेशल फाउंडर पेटर्न में सुरेश जी राठी, शशि जी राठी, सत्यनारायण धूत, निर्मल गहलोत का सहयोग रहा। फाउंडर पेटर्न में मुकेश खत्री, रामावतार अग्रवाल, सुनील गुप्ता, हनवंत खत्री, जयेश खत्री, अनिल सुथार, राजेंद्र मेहता, मीनाक्षी माथुर, मोहित अग्रवाल, चेलाराम, ऋषिराज सिंह, महावीर सिंह भाटी, रोहित जिंदल, मनसाराम भाटी, सुशील तोषनीवाल, मनदी सलारिया, शंकरलाल सैनी, जयप्रकाश सारस्वत, पुनीत मिर्धा, अमित पाल राना, नितिका डागा, अशोक चौपड़ा का सहयोग रहा। इसी तरह रूम स्पॉन्सर्स के रूप में विनोद लीला, पवन लोहिया, मीनाक्षी माथुर, अशोक माथुर, रामस्वरूप प्रजापत और जितेंद्र अग्रवाल का सहयोग रहा।












