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Tuesday, August 25, 2026, 10:04 am

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Lifestyle

होली पर जोधपुर और बीकानेर के विख्यात कवियों की कविताएं

कवि : एनडी निंबावत ‘सागर’

आओ होली के रंगों में रंग जाएं…

आओ होली के रंगों में रंग जाएं
राग-द्वेष को भूल,सबको गले लगाएं
….आओ होली के रंगों में…..
जल गई दुष्ट होलिका अग्नि में
बच गया भक्त प्रहलाद, खुशियां मनाएं
….आओ होली के रंगों में…..
बुराई का आखिर होता ही है अंत
भीतर से ऐसा हम, विश्वास जगाएं
….आओ होली के रंगों में…..
ये सनातन संस्कृति, है जीवन का आधार
जिसे बचाने आओ निभाएं, हम परम्पराएं
….आओ होली के रंगों में…..
दूर हैं हम आपसे, तो क्या हुआ
आप तो सदा रहते, हमारे दिल में समाएं
….आओ होली के रंगों में…..
खुश रहो, मस्त रहो, फलो-फूलों
स्वीकार करें होली पर, हमारी शुभकामनाएं
….आओ होली के रंगों में…..

आपके सम्पूर्ण परिवार
को
हमारे सम्पूर्ण परिवार
की ओर से
रंगों के त्यौहार
होली की
हार्दिक शुभकामनाएं

एडवोकेट एनडी निंबावत “सागर”
जोधपुर (राज.)

कवि : नाचीन बीकानेरी

अबकी बार होली ऐसे

इन आस्था की लकड़ियों से
वर्षों से जलती आई है होली
सच भी है ,और सचाई भी है
लकड़ियां जल राख हो जाती है ।

कब तक लकड़ियां जलाएंगे
जंगल भी उदास हो जाएंगे
संकल्प लें,वृक्ष अबकी नहीं काटेंगे
अब तो प्रतीकात्मक होली मनाएंगे

हमारे मन का कलमष जलाएं ।
अबकी बार होली ऐसे मनाएं ।।

वर्षों से खेल रहे हैं
पानी से हम होली
न जाने कितना पानी
व्यर्थ ही कर देते हैं ।

पानी की एक -एक बूंद से
किसी की जान बच सकती है
इस बार हम होली ऐसे खेलें
एक – एक बूंद पानी बचाएं ।

पानी की हम कीमत जाने ।
अबकी बार होली ऐसे मनाएं ।।

भौतिकता की दौड़ में
पीछे छूट रहे हैं रिश्ते
रिश्तों में आई कड़वाहट को
आपसी सद्भाव से बचाएं ।

स्नेह की गुलाल लगा कर
आपसी बैर भाव को भुलाएं
समाज में बढ़ते तमस को
आपसी प्रेम की ज्योत से हटाएं ।

अपनों के इत्र की खुशबू लगा ।
अबकी बार होली ऐसे मनाएं ।।

सत्य का बोलबाला हो
बेईमानों की अब छंटनी करें
जन-जन के प्रयास से हम
स्वच्छ समाज स्वच्छ देश बनाएं ।

विषमता की अब दीवारें तोड़ें
जाति – धर्म से ऊपर उठ कर
होली के मधुर गीतों के संग
हंसी – खुशी से होली मनाएं ।

आओ रंगों की रंगोली सजाएं ।
अबकी बार होली ऐसे मनाएं ।।

मईनुदीन कोहरी “नाचीज बीकानेरी”
मो. 9680868028

होली मुबारक

होली खेलने से पहले होली पूजन करले ।
फिर अपने दामन को खुशियों से भरलें ।।
होली की खुशियां पूरे देश में फैल जाए ।
“नाचीज़ “को भी इस मौके पर याद करलें ।।

नाचीज़ बीकानेरी 9680868028

कवि : अशफाक अहमद ‘फौजदार’

यार आ अब तो लगा गुलाल होली में

यार आ अब तो लगा गुलाल होली मेँ।
क्योँ रखते हो कोई मलाल होली मेँ।

बिज्र भी पूरा खुशी से झूम रहा है।
बँशी बजा रहे है गोपाल होली मेँ।

उनका गाल और भी गुलाबी हो गया।
थोड़ा यार ने मला गुलाल होली मेँ।

घनश्याम के दीदार उसको हुए हैँ।
अब मत पूछो राधा का हाल होली मेँ।

दोस्तों सब के मन के मैल धुल गये हैँ।
सब ने खूब रक्खा ख्याल होली मेँ।

कोई गा रहा है कोई थिरक रहा है।
शिव बूटी ने मचाया धमाल होली मेँ।

यारो गले लगने का लुत्फ कुछ और है।
मत रक्खो शर्म हया का ख्याल होली मेँ।

मानो लिवइनरिलेशन शिपवालो तुम।
क्योँ रुमानी रिश्तों मेँ हड़ताल होली मेँ।

मँहगाई की नागिन ने फन फैलाये।
सब की बिगड़ी है सुर ताल होली मेँ।

क्योँ बैँको मेँ घोटाले करने दिये।
अब जनता करती है सवाल होली मेँ।

अशफाक अहमद “फौजदार”

जोधपुर

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor