अनुबंध वृद्धजन कुटीर की प्रमुख अनुराधा अडवानी ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत हनुमंत परिवार द्वारा सुंदरकांड पाठ से हुई। भक्ति भाव से ओतप्रोत इस पाठ ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। सुंदरकांड के सामूहिक पाठ के दौरान उपस्थित सभी वृद्धजन श्रद्धा और भक्ति में डूबे नजर आए। भजनों की मधुर ध्वनि और हनुमान जी की स्तुति से ऐसा प्रतीत हुआ जैसे परिसर किसी मंदिर का रूप ले चुका हो।
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
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होली का पर्व केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि उमंग, अपनत्व और पारिवारिक स्नेह का प्रतीक है। इसी भावना को साकार करते हुए अनुबंध वृद्धजन कुटीर में इस वर्ष होली उत्सव बड़े ही हर्षोल्लास और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। रंग, गुलाल, चंग की थाप और भक्ति रस से सराबोर इस आयोजन ने वृद्धजनों के चेहरों पर ऐसी मुस्कान बिखेरी, मानो वे फिर से अपने युवावस्था के दिनों में लौट गए हों।
अनुबंध वृद्धजन कुटीर की प्रमुख अनुराधा अडवानी ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत हनुमंत परिवार द्वारा सुंदरकांड पाठ से हुई। भक्ति भाव से ओतप्रोत इस पाठ ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। सुंदरकांड के सामूहिक पाठ के दौरान उपस्थित सभी वृद्धजन श्रद्धा और भक्ति में डूबे नजर आए। भजनों की मधुर ध्वनि और हनुमान जी की स्तुति से ऐसा प्रतीत हुआ जैसे परिसर किसी मंदिर का रूप ले चुका हो।
सुंदरकांड के उपरांत होली के पारंपरिक रंगों का उत्सव प्रारंभ हुआ। अशोक, खीम सिंह और उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत की गई पारंपरिक गेर ने सभी का मन मोह लिया। राजस्थानी संस्कृति की इस विशिष्ट शैली में रंग-बिरंगे परिधानों और जोशपूर्ण नृत्य के साथ कलाकारों ने ऐसा समां बांधा कि वृद्धजन भी अपनी सीटों से उठकर तालियां बजाने लगे। गेर की ताल और चंग की थाप ने पूरे परिसर को जीवंत बना दिया।
उर्मिला, मुकेश चौहान और जागनाथ गहलोत सहित अन्य कलाकारों ने चंग की संगत में पारंपरिक लोकगीत प्रस्तुत किए। “फागण आयो रे…” और “होली खेले रघुवीरा…” जैसे गीतों पर वृद्धजनों ने झूमकर आनंद लिया। कई बुजुर्गों ने भी गीतों की पंक्तियां दोहराते हुए अपने पुराने दिनों की यादें ताजा कीं। कार्यक्रम के दौरान गुलाल से एक-दूसरे का स्वागत किया गया और सभी ने प्रेमपूर्वक होली की शुभकामनाएं दीं।
अनुराधा अडवानी ने बताया कि अनुबंध वृद्धजन कुटीर का उद्देश्य केवल आवास और देखभाल तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां रहने वाले प्रत्येक वृद्धजन को परिवार जैसा वातावरण प्रदान करना है। ऐसे सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों से उनमें नई ऊर्जा और उत्साह का संचार होता है। उन्होंने कहा कि होली जैसे त्योहार बुजुर्गों के जीवन में नई खुशियां लाते हैं और उन्हें समाज से जुड़े रहने का अवसर देते हैं।
कार्यक्रम के दौरान हल्के नाश्ते और मिठाइयों की भी व्यवस्था की गई। सभी ने मिलकर गुजिया, नमकीन का आनंद लिया। रंगों से सराबोर चेहरे और हंसी-खुशी से भरा वातावरण यह दर्शा रहा था कि उम्र केवल एक संख्या है, मन की उमंग ही असली जवानी है।कार्यक्रम के समापन पर अनुराधा अडवानी और नरेंद्र अडवानी ने सभी कलाकारों, सहयोगियों और उपस्थित अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समाज के सहयोग और सहभागिता से ही ऐसे आयोजन सफल हो पाते हैं। उन्होंने भविष्य में भी इसी तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प दोहराया। इस प्रकार अनुबंध वृद्धजन कुटीर में मनाया गया होली उत्सव न केवल रंगों का पर्व रहा, बल्कि यह प्रेम, सम्मान और सामूहिकता का जीवंत उदाहरण बन गया। यहां के बुजुर्गों के चेहरों पर खिली मुस्कान यह संदेश दे गई कि सच्चा उत्सव वही है, जो दिलों को जोड़ दे और जीवन में नई उम्मीद जगा दे।
Author: Dilip Purohit
Group Editor








