पिल्ला तड़प-तड़प कर दम तोड़ रहा था और उसकी मां असहाय होकर इधर-उधर दौड़ रही थी। इस घटना ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। आनंद हर्ष ने बताया कि अगले दिन जब उन्होंने “112 इंडिया” की सेवाओं के बारे में समाचार पढ़ा, तो उन्हें पता चला कि सरकार ने नागरिकों की सुरक्षा और सहायता के लिए कई तरह की सुविधाएं एक ही फोन कॉल पर उपलब्ध करवाई हैं। पुलिस, फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस जैसी सेवाएं अब एक ही नंबर से संचालित हो रही हैं। क्यों न इस सेवा में एनिमल हेल्प की सुविधा भी जोड़ दी जाए।
राइजिंग भास्कर. जोधपुर
शहर के युवा लेखक आनंद हर्ष ने सड़क हादसों में घायल होने वाले बेजुबान जानवरों की मदद के लिए सरकार से 112 इंडिया हेल्पलाइन में प्रावधान करने की मांग उठाई है। उन्होंने एक मार्मिक अनुभव साझा करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक और डिजिटल युग में भी कई बार ऐसे असहाय जीवों की मदद समय पर नहीं हो पाती, जिससे उनकी जान चली जाती है।
आनंद हर्ष ने अपनी प्रतिक्रिया में बताया कि हाल ही में उन्होंने एक चौराहे पर बेहद दर्दनाक दृश्य देखा। एक वाहन की टक्कर से एक कुत्ते का नवजात पिल्ला घायल होकर सड़क पर तड़प रहा था, जबकि उसकी मां चारों ओर दौड़-दौड़कर जोर-जोर से भौंक रही थी। मानो वह अपनी भाषा में लोगों से मदद की गुहार लगा रही हो। लेकिन वहां मौजूद लोग उस दृश्य को देखकर भी आगे बढ़ते रहे और कोई भी तत्काल मदद के लिए आगे नहीं आया।
उन्होंने कहा कि उस समय यह दृश्य मानवता को शर्मसार करने वाला था। पिल्ला तड़प-तड़प कर दम तोड़ रहा था और उसकी मां असहाय होकर इधर-उधर दौड़ रही थी। इस घटना ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। आनंद हर्ष ने बताया कि अगले दिन जब उन्होंने “112 इंडिया” की सेवाओं के बारे में समाचार पढ़ा, तो उन्हें पता चला कि सरकार ने नागरिकों की सुरक्षा और सहायता के लिए कई तरह की सुविधाएं एक ही फोन कॉल पर उपलब्ध करवाई हैं। पुलिस, फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस जैसी सेवाएं अब एक ही नंबर से संचालित हो रही हैं।
इसी दौरान उनके मन में यह विचार आया कि यदि इसी व्यवस्था में एनिमल हेल्पलाइन की सुविधा भी जोड़ दी जाए तो सड़क हादसों में घायल होने वाले बेजुबान जानवरों की भी समय रहते मदद की जा सकती है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार हर वर्ष बड़ी संख्या में जानवर सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं। कई मामलों में यदि उन्हें समय पर इलाज मिल जाए तो उनकी जान बचाई जा सकती है। लेकिन जानकारी और व्यवस्था के अभाव में ऐसा संभव नहीं हो पाता।
आनंद हर्ष का मानना है कि जिस तरह इंसानों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए हेल्पलाइन व्यवस्था बनाई गई है, उसी तरह बेजुबान जानवरों के लिए भी त्वरित सहायता तंत्र होना चाहिए। इससे समाज में संवेदनशीलता और करुणा का संदेश भी जाएगा। उन्होंने कहा कि जानवर भी प्रकृति की ही रचना हैं और उन्हें भी जीने का उतना ही अधिकार है जितना इंसानों को। यदि सरकार और समाज मिलकर एक सरल और प्रभावी हेल्पलाइन प्रणाली बना दें, तो सड़क हादसों में घायल होने वाले कई जानवरों की जान बचाई जा सकती है।
युवा लेखक ने नागरिकों से भी अपील की कि वे ऐसी घटनाओं को देखकर अनदेखा न करें, बल्कि जहां तक संभव हो घायल जानवरों की मदद के लिए आगे आएं। उनका कहना है कि किसी असहाय जीव की मदद करना ही सच्ची मानवता है। आनंद हर्ष की यह भावुक अपील अब शहर में चर्चा का विषय बन रही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि सरकार इस सुझाव पर गंभीरता से विचार करे तो यह पहल पशु संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण पहल हो सकती है।








