प्रतिष्ठित कवि, चिंतक, विचारक और पर्यावरणप्रेमी ऋतुराज को श्रद्धांजलि
दिलीप कुमार पुरोहित. जयपुर
जयपुर, 31 अक्तूबर । प्रगतिशील लेखक संघ, जनवादी लेखक संघ, जन संस्कृति मंच, इप्टा, समग्र सेवा संघ के संयुक्त तत्वावधान में यहाँ कुमारानन्द भवन में देश के प्रतिष्ठित कवि, चिंतक, विचारक और पर्यावरणप्रेमी ऋतुराज के निधन पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई और प्रगतिशील साहित्यिक आंदोलन की दृष्टि से एक अपूरणीय क्षति बताया। प्रलेस के राष्ट्रीय सचिव प्रेमचंद गाँधी ने कार्यक्रम का संयोजन किया।
वरिष्ठ साहित्यकार प्रोफेसर मोहन श्रोत्रिय ने कहा कि ऋतुराज प्रखर प्रगतिशील चेतना के लेखक और अंतर्मुखी व्यक्तित्व के धनी थे । उनके व्यक्तित्व के अनुरूप राष्ट्रीय स्तर पर जो सम्मान मिलना चाहिए वह भले ही ना मिला हो लेकिन उसे लेकर उनके मन में कभी कोई असंतोष या शिकायत का भाव नहीं रहा । लोग अक्सर लेखक के जाने के बाद उसके सही मूल्यांकन नहीं होने की बात करते हैं लेकिन उसके जीते जी अन्याय के विरुद्ध खड़े नहीं होते और ना उसके काम को रेखांकित करते हैं । उन्हें अपनी इस प्रवृत्ति पर गंभीरता से सीचना चाहिए । किसी समर्थ रचनाकार का समय पर सही मूल्यांकन नहीं होना भी एक अपराध है । वरिष्ठ लेखक-संपादक डॉ. हेतु भारद्वाज ने मैथिली शरण गुप्त की रचना साकेत की पंक्तियों के साथ याद किया। यह गर्व की बात है कि उनका परिवार ऋतुराज की साहित्य परंपरा को आगे बढ़ा रहा है।
प्रगतिशील लेखक संघ की प्रदेश महासचिव रजनी मोरवाल ने कहा कि युवा पीढ़ी उनसे हमेशा प्रेरणा ग्रहण करेगी । डॉ विशाल विक्रम सिंह ने कहा कि वे प्रगतिशील कविता के अद्भुत कवि और बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे । वरिष्ठ कवि सवाईसिंह शेखावत ने कहाकि वे विचारधारा को लेकर प्रतिबद्ध थे और अंतरंग संबंधों और वंचितों के संघर्षों को अपनी रचनाओं का हिस्सा बनाते थे । उनकी रचनाएँ पाठक को भीतर तक उद्वेलित करती हैं ।
प्रमुख साहित्यकार नंद भारद्वाज ने कहा कि ऋतुराज कहते थे कि हर रचना के पीछे कोई आधार होना चाहिए तभी वह बड़ी रचना बनती है और उसमें गहरी संवेदना होनी चाहिए । डॉ. सत्यनारायण, फारूक आफरीदी, सवाई सिंह, एमआई जाहिर,संजय विद्रोही, अजय अनुरागी, चेतना शर्मा, राजकुमार, कविता माथुर, डॉ जवा, डॉ. रेखा पांडे ने ऋतुराज की कविताओं के पाठ के साथ उनके अंतरंग संस्मरण सुनाए । वक्ताओं ने कहा कि उनकी अधिकांश कविताएँ हाशिए के समाज से जुड़ी हुई और उनके पक्ष में खड़ी हुई दिखाई देती हैं । उनकी रचनाओं का भावबोध बहुत गहरा है । प्रेमचंद गांधी ने कहा कि उन्होंने अपनी प्रगतिशील कविताओं के माध्यम से राजस्थान को एक नई पहचान दिलाई । पवन झा ने उनकी मेहदी हसन के पौराणिक गांव लूना की यात्रा का स्मरण किया । स्मृति सभा में बड़ी संख्या में साहित्यकार, पत्रकार, संस्कृतिकर्मी, प्रबुद्धजन और उनके उपस्थित थे ।

