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Thursday, July 9, 2026, 2:49 am

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जोधपुर की एमबीएम यूनिवर्सिटी में प्रारंभ होगा रेलवे के कवच सिस्टम पर कोर्स

-रेलवे के इरिसेट,सिकंदराबाद और यूनिवर्सिटी प्रबंधन के बीच जोधपुर में हुआ एमओयू
-इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों के लिए वैकल्पिक विषय के रूप में ‘रेलवे एडवांस सिंग्नलिंग और कवच’ पर पाठ्यक्रम उपलब्ध होगा
-सहयोग और समन्वय के लिए जल्द बनेगी समिति

डीके पुरोहित. जोधपुर 

राजस्थान के जोधपुर शहर में स्थित एमबीएम यूनिवर्सिटी में जल्द ही अत्याधुनिक रेलवे सिग्नल इंजीनियरिंग और एटीपी-कवच सिस्टम पर महत्वपूर्ण कोर्स प्रारंभ किया जाएगा। इससे विद्यार्थी रेलवे के इंजीनियरिंग से संबंधित कोर्स यहां से भी कर सकेंगे।इसके लिए एमबीएम यूनिवर्सिटी प्रबंधन और भारतीय रेलवे सिंग्नल इंजीनियरिंग एवं दूरसंचार संस्थान (इरिसेट) ने गुरुवार को यहां दोनों संस्थानों के उच्चाधिकारियों ने एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए। एमओयू पांच वर्षों के लिए होगा तथा बाद में इसे बढ़ाया भी जा सकेगा।

उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर डीआरएम पंकज कुमार सिंह ने बताया कि जोधपुर के एमबीएम यूनिवर्सिटी में भारतीय रेलवे सिंग्नल इंजीनियरिंग एवं दूरसंचार संस्थान (इरिसेट),सिकंदराबाद के सहयोग से स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (आईएटीपी)-कवच पर कौशल उन्मुख संकाय विकास कार्यक्रम और औद्योगिक प्रशिक्षण पीजी डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया जाएगा।

डीआरएम ने बताया कि इससे रेलवे के वर्कर क्लास में मैन पावर की कमी नही होगी और रेलवे का सुरक्षा तंत्र और अधिक सुदृढ़ होगा। डीआरएम ने बताया कि इससे इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों के लिए वैकल्पिक विषय के रूप में ‘रेलवे एडवांस सिंग्नलिंग और कवच’ पर पाठ्यक्रम उपलब्ध होगा।

रेल मंत्रालय के कवच (इरिसेट) के प्रधान कार्यकारी निदेशक, भारतीय रेलवे में कवच के जनक जोधपुर मूल के निवासी और एमबीएम यूनिवर्सिटी में शिक्षा प्राप्त ललित कुमार मनसुखानी और एमबीएम यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो.अजय कुमार शर्मा ने गुरुवार को यहां एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर उनकी यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग डीन जयश्री वाजपेयी, प्रो.एस के सिंह, इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रो. डॉ अखिल रंजन गर्ग और रेलवे की ओर से वरिष्ठ मंडल संकेत व दूरसंचार इंजीनियर अनुपम कुमार, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक विकास खेड़ा, उपमुख्य सिंग्नल एंड टेलीकॉम इंजीनियर दीपक चौधरी व उप मुख्य संकेत व दूरसंचार (प्रोजेक्ट) सुरेश नेहरा उपस्थित थे। बाद में मनसुखानी ने कहा कि ऐसी उम्मीद की जाती है कि तकनीकी शिक्षा के जगत में यह एमओयू एक मील का पत्थर साबित होगा और इसके द्वारा अनेक प्रकार के नवाचार एमबीएम और रेलवे दोनों को करने के अवसर प्राप्त होंगे

यह शिक्षाविद भी थे उपस्थित

इस अवसर पर यूनिवर्सिटी के एल्युमनी बी एल मोहता, अधिष्ठाता (छात्र कल्याण) प्रो. अरविन्द वर्मा एवं विभिन्न अभियांत्रिकी विभागों के विभागाध्यक्ष उपस्थित रहे जिसमें प्रो. अमरनाथ मोदी, प्रो. सुरेश सिंह साँखला, प्रो. मिलिन्द शर्मा, प्रो. सुरेन्द्र कुमार सिंह, प्रो. मनोज क़ुमार भास्कर, प्रो. सुशील सारस्वत , कपिल परिहार, प्रो. राम प्रसाद चौधरी, प्रो. अनिल व्यास, आर्किटेक्ट कमलेश कुम्हार प्रमुख थे ।

समन्वय समिति का होगा गठन
डीआरएम ने बताया कि दोनों संस्थाओं के बीच सहयोग, समन्वय और निगरानी लिए सीनियर प्रोफेसर(आईटी और कवच),सिकंदराबाद की अध्यक्षता में एक समन्वय समिति का गठन किया जाएगा जिसमें एमबीएम इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी के समन्वयक(आईटी एवं कवच) सह अध्यक्ष होंगे तथा कॉलेज के कुलपति द्वारा नामित दो प्रतिनिधि व इरिसेट सिकंदराबाद के दो प्रतिनिधि शामिल किए जाएंगे जिसमें से एक समन्वयक के रूप में कार्य करेगा।

कैसे होगा कवच कोर्स
भारतीय रेलवे सिंग्नल इंजीनियरिंग एवं दूरसंचार संस्थान सिकंदराबाद अपनी अत्याधुनिक कक्षाओं और प्रयोगशालाओं में सिग्नल,दूरसंचार,और स्वदेशी संचालित ट्रेन सुरक्षा (आईएटीपी -कवच) पर कौशल उन्मुख संकाय विकास कार्यक्रम और प्रौद्योगिक प्रशिक्षण प्रदान करेगा। जिसके तहत यूनिवर्सिटी द्वारा कवच पर शार्टटम पीजी डिप्लोमा और सर्टिफिकेट प्रदान किया जाएगा।

महत्वपूर्ण बिंदु
-पाठ्यक्रम में सिंग्नलिंग और कवच पर गहन प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
-विद्यार्थियों के सीखने और शैक्षिक उद्देश्य से क्षेत्रीय रेलवे और रेलवे डिविजन में शिक्षा प्रशिक्षण, व्यावसायिक प्रशिक्षण व साइट विजिट की व्यवस्था इरिसेट द्वारा की जाएगी और अनुसंधान में दोनों संस्थान परस्पर सहयोग करेंगे।
जोधपुर मूल के हैं रेलवे कवच सिस्टम के जनक मनसुखानी
गौरतलब है कि ललित मनसुखानी जोधपुर मूल के है तथा उन्होंने एमबीएम यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह भारतीय रेलवे के कवच के उत्कृष्टता केंद्र के प्रधान कार्यकारी निदेशक के पद पर कार्यरत है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor