जैन चातुर्मास और पर्युषण : जैन धर्म की सभी परम्पराओं का एक समग्र दृष्टिकोण
लेखक : अनिल के. जैन 9810046108. जोधपुर जैन धर्म मूलतः अहिंसा, आत्म-संयम, तपस्या, अपरिग्रह, क्षमा और आत्म-शुद्धि का धर्म है। इसलिए जैन पर्व केवल बाहरी उत्सव या उल्लास के अवसर नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, आत्मनिरीक्षण और आंतरिक परिवर्तन के पवित्र अवसर हैं। जैन धार्मिक परम्परा में चातुर्मास, श्वेताम्बर परम्परा का पर्युषण महापर्व तथा दिगम्बर परम्परा का … Read more