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Tuesday, August 18, 2026, 4:03 pm

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प्रतिदिन सकारात्मक समाचार : राजस्थान के पर्यटन को नई ऊंचाई दे सकते हैं पंकज भाटिया के सुझाव

होटल चेक-इन और चेक-आउट व्यवस्था में पर्यटक-अनुकूल बदलाव से बढ़ेगा ठहराव, संतुष्टि और पर्यटन कारोबार

दिलीप कुमार पुरोहित. जयपुर

9783414079 diliprakhai@gmail.com

राजस्थान की पहचान केवल उसके ऐतिहासिक किलों, महलों, लोक संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य से नहीं, बल्कि उसकी ‘अतिथि देवो भवः’ की परंपरा से भी है। देश-विदेश से राजस्थान आने वाला हर पर्यटक यहां की मेहमाननवाजी को अपने अनुभव का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है। इसी भावना को और मजबूत करने तथा होटल व्यवसाय को अधिक पर्यटक-अनुकूल बनाने के उद्देश्य से होटल व्यवसाय से जुड़े जैसलमेर के पंकज भाटिया ने राजस्थान सरकार और पर्यटन विभाग के स्तर पर कुछ व्यावहारिक सुझाव भेजे हैं। इन सुझावों में होटल चेक-इन एवं चेक-आउट व्यवस्था को यात्रियों की वास्तविक यात्रा परिस्थितियों के अनुरूप बनाने पर विशेष जोर दिया गया है।

पंकज भाटिया का मानना है कि राजस्थान में आने वाले पर्यटकों की यात्रा का अनुभव उस समय और बेहतर हो सकता है, जब होटल की सुविधाएं उनके आगमन और प्रस्थान के समय के अनुरूप सहज रूप से उपलब्ध हों। उनके सुझावों को यदि चरणबद्ध ढंग से अपनाया जाता है तो यह राजस्थान के पर्यटन क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकता है।

यात्रा के समय के अनुरूप हो होटल चेक-इन

भाटिया ने सुझाव दिया है कि जिन शहरों में पहली प्रमुख ट्रेन, बस अथवा अन्य परिवहन सेवा सुबह पहुंचती है, वहां होटल व्यवसायियों को यात्रियों की सुविधा के लिए प्रारंभिक चेक-इन की व्यवस्था उपलब्ध कराने का प्रयास करना चाहिए।

अक्सर पर्यटक सुबह किसी शहर में पहुंच जाते हैं और उनकी होटल बुकिंग का निर्धारित चेक-इन समय बाद का होता है। ऐसे में यदि होटल अपनी उपलब्धता के अनुसार सुबह आने वाले यात्रियों के लिए प्रारंभिक चेक-इन की सुविधा विकसित करें तो पर्यटक बिना समय गंवाए अपने कमरे में जाकर आराम कर सकते हैं और इसके बाद शहर की पर्यटन यात्रा शुरू कर सकते हैं।

यह व्यवस्था विशेष रूप से परिवारों, वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों के साथ यात्रा करने वाले पर्यटकों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

स्लॉट आधारित चेक-इन से बढ़ेगी सुविधा

भाटिया ने अधिक कमरों वाले होटलों में स्लॉट-वाइज चेक-इन व्यवस्था विकसित करने का सुझाव भी दिया है। इसके तहत होटल अपनी उपलब्धता के अनुसार अलग-अलग समय स्लॉट निर्धारित कर सकते हैं। उदाहरण के लिए सुबह 6 बजे, 8 बजे अथवा अन्य निर्धारित समय पर उपलब्ध कमरों को यात्रियों को उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे होटल प्रबंधन को भी कमरों की उपलब्धता व्यवस्थित करने में सुविधा होगी और पर्यटकों को भी अपने आगमन के समय के अनुरूप बेहतर विकल्प मिल सकेंगे।

‘23+1 मॉडल’ बन सकता है नया विकल्प

पंकज भाटिया का एक महत्वपूर्ण सुझाव ‘23+1 मॉडल’ को लेकर है। उनके अनुसार यदि कोई होटल 24 घंटे की चेक-इन व्यवस्था अपनाता है तो पर्यटक को लगभग 23 घंटे का वास्तविक ठहराव उपलब्ध कराया जा सकता है तथा लगभग एक घंटे का समय कमरे की सफाई और अगली बुकिंग के लिए तैयार करने के लिए रखा जा सकता है। यह मॉडल होटल उद्योग और पर्यटकों दोनों के लिए संतुलित व्यवस्था के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे पर्यटक को अपने भुगतान के अनुरूप अधिक उपयोगी ठहराव का अनुभव मिलेगा, वहीं होटल प्रबंधन को कमरों की सफाई और संचालन के लिए आवश्यक समय भी प्राप्त होगा।

‘अर्ली अराइवल लाउंज’ बने पर्यटकों का स्वागत केंद्र

जिन होटलों में तत्काल कमरा उपलब्ध कराना संभव नहीं हो, वहां भाटिया ने ‘Early Arrival Lounge/Guest Waiting Room’ विकसित करने का सुझाव दिया है। ऐसे लाउंज में सुबह होटल पहुंचने वाले पर्यटकों के लिए आरामदायक बैठने की व्यवस्था के साथ चाय, नाश्ता, सामान्य इंटरनेट सुविधा और आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। इससे होटल में प्रवेश करते ही पर्यटक को राजस्थान की मेहमाननवाजी का सुखद अनुभव मिलेगा। यह व्यवस्था राजस्थान के होटल उद्योग के लिए एक विशिष्ट पहचान भी बन सकती है। पर्यटक होटल में कमरे की प्रतीक्षा के समय को भी आराम और आतिथ्य के अनुभव में बदल सकेंगे।

वेबसाइट और बुकिंग प्लेटफॉर्म पर स्पष्ट जानकारी

भाटिया ने होटल की वेबसाइट, बुकिंग प्लेटफॉर्म और रिसेप्शन पर चेक-इन एवं चेक-आउट के समय की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया है। इससे पर्यटक अपनी यात्रा की योजना होटल की वास्तविक सुविधाओं के अनुरूप पहले से बना सकेंगे। यदि होटल अपनी वेबसाइट और ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था में प्रारंभिक चेक-इन, उपलब्ध स्लॉट, अर्ली अराइवल लाउंज तथा अन्य सुविधाओं की जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करें तो पर्यटकों के लिए होटल का चयन करना और यात्रा की योजना बनाना और आसान हो जाएगा।

पर्यटन अनुभव को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

पंकज भाटिया के सुझाव केवल होटल की व्यवस्था में बदलाव की बात नहीं करते, बल्कि इनके पीछे राजस्थान के पर्यटन अनुभव को अधिक सहज, सुविधाजनक और यादगार बनाने की सोच दिखाई देती है। पर्यटक जब किसी नए शहर में पहुंचता है तो उसकी पहली जरूरत आराम, सुविधा और स्पष्ट जानकारी होती है। यदि होटल उद्योग इन तीनों पहलुओं को प्राथमिकता देता है तो राजस्थान की पर्यटन यात्रा का पहला अनुभव ही सकारात्मक बनाया जा सकता है। राजस्थान में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यहां आने वाला पर्यटक केवल एक स्मारक देखने नहीं आता, बल्कि वह यहां की संस्कृति, खान-पान, लोक जीवन, आतिथ्य और जीवनशैली को अनुभव करता है। होटल इस पूरे अनुभव की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इसलिए होटल सुविधाओं में पर्यटक-केंद्रित छोटे-छोटे सुधार भी पर्यटन क्षेत्र को नई दिशा दे सकते हैं।

‘अतिथि देवो भवः’ की भावना को आधुनिक व्यवस्था से जोड़ने का प्रयास

पंकज भाटिया ने अपने सुझाव में इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए कहा है कि राजस्थान की ‘अतिथि देवो भवः’ की परंपरा को आधुनिक पर्यटन व्यवस्था से जोड़ा जाए। यदि पर्यटक के आगमन के समय से ही उसे सुविधा, सम्मान और सहज सेवा मिलती है तो राजस्थान के प्रति उसके मन में सकारात्मक अनुभव और मजबूत होगा। इन सुझावों के पीछे उद्देश्य होटल व्यवसाय पर अतिरिक्त आर्थिक भार डालना नहीं, बल्कि उपलब्ध संसाधनों और आधुनिक तकनीक का बेहतर उपयोग करते हुए पर्यटक सुविधा को प्राथमिकता देना है। होटल अपनी क्षमता और उपलब्धता के अनुसार इन व्यवस्थाओं को लागू कर सकते हैं।

सरकार और होटल उद्योग मिलकर बना सकते हैं मॉडल

भाटिया ने राजस्थान सरकार और पर्यटन विभाग से अनुरोध किया है कि होटल एवं पर्यटन व्यवसायियों की बैठक आयोजित कर इन सुझावों पर विचार किया जाए तथा उपयुक्त सुझावों को स्वैच्छिक एवं व्यावहारिक ‘सर्वोत्तम व्यवहारिक व्यवस्था’ के रूप में अपनाने की दिशा में पहल की जाए। यदि सरकार, पर्यटन विभाग और होटल उद्योग मिलकर ऐसी व्यवस्था विकसित करते हैं तो राजस्थान देश में पर्यटक-अनुकूल होटल चेक-इन व्यवस्था का एक उत्कृष्ट मॉडल प्रस्तुत कर सकता है। पंकज भाटिया की यह पहल इसी दिशा में एक रचनात्मक सुझाव के रूप में सामने आई है। राजस्थान की समृद्ध पर्यटन विरासत के साथ यदि आधुनिक सुविधा और संवेदनशील आतिथ्य को जोड़ा जाए तो प्रदेश में आने वाले पर्यटकों का अनुभव और बेहतर हो सकता है। इससे पर्यटकों की संतुष्टि बढ़ेगी, होटल व्यवसाय को नई संभावनाएं मिलेंगी और राजस्थान की ‘अतिथि देवो भवः’ की पहचान देश-दुनिया में और मजबूत होगी।

राइजिंग भास्कर की सकारात्मक पत्रकारिता की प्रतिबद्धता के अनुरूप यह पहल इस बात का उदाहरण है कि समाज, व्यवसाय और सरकार के बीच संवाद के छोटे-छोटे सुझाव भी बड़े सकारात्मक बदलाव की नींव बन सकते हैं।
Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor