Explore

Search

Friday, April 4, 2025, 8:37 am

Friday, April 4, 2025, 8:37 am

कविता : नाचीज बीकानेरी

Share This Post

 

आओ हम मिल दशहरा मनाते हैं

आओ हम मिल दशहरा मनाते हैं।
अब मारें अपने दश-दुष्कर्मों को ।।

क्यों मारते हैं हर वर्ष रावण को।
आओ हम मारें अपने अंहकार को।

मरता क्यों नहीं फिर ये, रावण ।
हां, रोकें हो रही अमानुषता को।।

न्याय नहीं जब शासन व्यवस्था में।
तो फिर आओ जमीर जगाने को।।

धर्म नहीं सिखाता है बुराई करना।
आओ सबका दुख दूर करने को।।

घर- समाज-देश में सब खुश रहें।
त्याग करें दशहरे पर अपने क्रोध को ।।

न जलाएं कागज बांस के ये पुतले ।
मन का मैल जलाएं, छोड़ें ईर्ष्या को।।

मद-मोह-लोभ जो भीतर छिपे हैं।
क्यों न मारें सब, इन दुष्ट रावणों को ।।

स्वच्छ रहे ये समाज, प्रदूषण से मुक्त।
प्रतीकात्मक रूप से मनाएं दशहरे को ।।

 

 

 

 

 

Rising Bhaskar
Author: Rising Bhaskar


Share This Post

Leave a Comment