Explore

Search

Monday, August 24, 2026, 3:38 am

Monday, August 24, 2026, 3:38 am

LATEST NEWS
[wonderplugin_slider id=1]
Lifestyle

सभी संस्कारों का जीवंत चित्रण की समृद्ध परंपरा है मथेरन कला : डॉ. किराडू

राखी पुरोहित. बीकानेर 

राजस्थानी साफा पाग़ पगड़ी वह कला संस्कृति संस्थान एवं थार विरासत बीकानेर के संयुक्त तत्वाधान में सात दिवसीय उछब थरपन्ना के अवसर पर आज लक्ष्मी नारायण रंगा सृजन सदन में एक कला संगोष्ठी का आयोजन किया गया। साथ ही मथेरन कला के वरिष्ठ कलाकार चंद्रप्रकाश महात्मा को कमला देवी रंगा सृजन सम्मान प्रदत किया गया । गोष्ठी के विषय बीकानेर की परंपरागत मथेरन कला एवं ग्रंथ चित्रावली जैसे महत्वपूर्ण विषय पर वरिष्ठ कला विशेषज्ञ डॉ. राकेश किराडू ने अपने उद्बोधन में कहा कि बीकानेर की परंपरागत मथेरन कला विश्व विख्यात है । मथेरन कला बीकानेर स्थापना काल से ही चित्र कर्म करते हुए आए हैं यह एक जाति विशेष के कलाकार समाज में व्यक्ति के जन्म से लेकर मृत्यु तक समस्त संस्कारों पर बहुत ही भव्य चित्रण करते रहे हैं जिसमें चित्रित जन्म कुंडली, शादी विवाह के समय बनने वाले तोरण मायाजी बागवाड़ी अंतिम संस्कार के समय बनने वाले गंगा जी के पगलिया आदि के चित्र सदैव ही बनते आए हैं ।

इसके अलावा मथेरन चित्रकार तीज त्योहार पर भी चित्रण करते आए हैं । अक्षय तृतीया पर जो चंदा उड़ने की हमारी बहुत ही समृद्ध परंपरा है वह चंदे यह जाति विशेष लोग ही बनाते थे। इस अवसर पर डॉक्टर किराडू ने आगे कहा कि मथेरन कला के महत्व को समझते हुए वर्तमान में बीकानेर विश्वविद्यालय में चित्रकला विभाग के तहत मथेरन कला को पढ़ाया जा रहा है यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

संगोष्ठी में अपने विचार रखते हुए वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने कहा कि मथेरन कला ही नहीं एक जीवन दर्शन है जिसके माध्यम से व्यक्ति के 16 संस्कारों को भी समझा जा सकता है। ऐसी कला को और ऐसे कलाकारों को समाज द्वारा सम्मान देना सामाजिक दायित्व है । इसी क्रम में अपने विचार रखते हुए कल विशेषज्ञ कृष्णचंद्र पुरोहित ने कहा कि मथेरन कला बीकानेर की लोक कला है जिसमें परंपरागत रंगों का उपयोग किया जाता है साथ ही गणगौर जैसे त्योहार पर मथेरन जाति की बनाई हुई कलात्मक डर घर-घर पूजी जाती है । संगोष्ठी में अपने विचार रखते हुए वरिष्ठ शिक्षाविद राजेश रंगा, धर्मेंद्र छंगानी, भवानी सिंह , मनमोहन पालीवाल, महेश पुरोहित, श्याम सुंदर किराडू सहित अनेक लोगों ने मथेरन कला को बीकानेर की कला पहचान बताई। इस अवसर पर बैठे रंग कला के वरिष्ठ कलाकार चंद्र प्रकाश महात्मा को श्रीमती कमला देवी रंग सृजन सेवा सामान अर्पित किया गया। इस अवसर पर अपने सामान के प्रति उत्तर में बोलते हुए मथेरन कलाकार चंद्र प्रकाश महात्मा ने कहा कि यह मेरा सामान नहीं बीकानेर के सारे युवा कलाकारों का सम्मान है। मैं यह सामान मेरी युवा शक्ति को समर्पित करता हूं। कार्यक्रम का संचालन युवा संस्कृति कर्मी आशीष रंगा ने किया और सभी का आभार व्यापित मोहित पुरोहित ने किया । कृष्ण चंद्र पुरोहित एवं राजेश रंगा ने गणगौर पर गणगौर पूजन और उनकी मूर्तियों पर चित्रण करना लक्ष्मीजी यानी दीपावली जैसे महत्वपूर्ण त्योहार पर लक्ष्मी जी का पूजन वाले जो चित्र हैं जिसे हम बीकानेरी भाषा में पाना कहते हैं। उसका भी चित्रण बहुत भव्य रूप से यह मथेरन कला के हिसाब से करते हैं। इसी तरह आज के उदाहरण है जिनके ऊपर मथेरन चित्रकारों ने अपनी टुलिका से रंग प्राप्त कर किया है । इसी क्रम में मथेरन चित्रकारों में असंख्य पांडुलिपियों का विसर्जन किया है और उन पांडुलिपियों में विषय अनुरूप चित्रण किया है जो अपने आप में पूरे विश्व में अनोखा और अनूठा है ऐसी पांडुलिपियों आज भी बीकानेर के राज्य के संग्रहालय और निजी संग्रहालय में लाखों की संख्या में मौजूद है जो हमारी पुरा संपदा का एक बहुत ही अनुपम उदाहरण है। जिसको लेकर अनेक विद्यार्थी शोध कर रहे हैं और वर्तमान में शोध कार्य कर रहे हैं। मुझे उम्मीद है आगे आने वाले वर्षों में सुधार थी मथेरन कला को लेकर और उनकी पांडुलिपियों को लेकर इस परंपरा को और आगे ले जाएंगे।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor