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Sunday, August 23, 2026, 3:23 pm

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रविंद्र नाथ टैगोर की जयंती पर गोष्ठी सम्पन्न

राखी पुरोहित. बीकानेर

गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर की 164वीं जयंती के अवसर पर राजस्थानी युवा लेखक संघ द्वारा एक विशेष विचार गोष्ठी का आयोजन आज दोपहर नत्थूसर गेट बाहर स्थित लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन सदन में किया गया।

वैचारिक गोष्ठी ‘राजस्थानी अर रवीन्द्र नाथ टैगोर’ विषय पर बतौर मुख्य वक्ता अपने विचार व्यक्त करते हुए राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने कहा कि गुरुवर टैगोर का राजस्थानी के साथ एक साहित्यक एवं आत्मिक गहरा रिश्ता था, गुरुवर राजस्थानी साहित्य और संस्कृति की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते रहे, उन्होने राजस्थानी गीतों एवं दोहों में वीरतापूर्ण भाव को हमेशा रेखांकित किया।
रंगा ने आगे कहा कि टैगोर हमेशा राजस्थानी को भारतीय भाषा परिवार की महत्वपूर्ण भाषा बताते हुए उसे भाषा वैज्ञानिक दृष्टि से सक्षम बताते रहे।
गोष्ठी में अपने विचार व्यक्त करते हुए कवि गिरीराज पारीक ने कहा कि गुरुवर ने राजस्थानी साहित्य में वीरता और साहस के चित्रण की हमेशा प्रशंसा की है। इसी कड़ी में शिक्षाविद् राजेश रंगा ने कहा कि रवीन्द्रनाथ टैगोर का राजस्थानी एवं राजस्थान से एक रिश्ता और था, वे 1927 में भरतपुर में 30 व 31 मार्च को प्रवास पर रहे। उन्हें नीला रंग बहुत पसंद था। इसी कारण भरतपुर में अलसी के नीले पौधों पर उन्होने अपनी चर्चित कविता ‘नीलमणि’ का सृजन भी भरतपुर में किया। यह कविता उनके रंग मणि नामक पुस्तक में संकलित है।
गोष्ठी में विशेषकर शिक्षाविद् सहभागी रहे उनमें से अशोक शर्मा ने कहा कि रवीन्द्रनाथ टैगोर विशेषकर राजस्थानी लोकगीतों के प्रशंसक रहे महावीर स्वामी ने कहा कि गुरुवर राजस्थानी भाषा के लोक साहित्य को भारतीय लोक साहित्य में अनूठा बताया था।
भवानी सिंह ने कहा कि वैसे भी राजस्थान और बंगाल के बीच हमेशा से एक रागात्मक रिश्ता रहा है और भाषायी स्तर पर यदि हम गौर करे तो बंगाली के कई शब्द राजस्थानी भाषा में रचे बसे है। वहीं अनेक राजस्थानी मूल तासीर के शब्दों में भी बंगाली भाषा तक अपनी यात्रा की है।
घनश्याम साध ने कहा कि इस तरह यह स्पष्ट होता है कि गुरुवर रवीन्द्रनाथ टैगोर जिन्होने भारत की प्रतिष्ठा नोबल साहित्य पुरस्कार के माध्यम से प्रतिष्ठित की, ऐसे महान् साहित्यकार का राजस्थानी भाषा के प्रति लगाव और राजस्थानी साहित्य और संस्कृति की मुक्त कंठ प्रशंसा करना राजस्थानी और राजस्थानियों के लिए गर्व की बात है।
गोष्ठी में महावीर स्वामी, दिनेश व्यास, आशीष रंगा, विजयगोपाल पुरोहित, सुनील व्यास, सुनील शर्मा सहित अनेक सहभागियों ने अपने विचार रखते हुए गुरुवर को राजस्थानी का हित चिंतक बताया।
गोष्ठी का संचालन आशीष रंगा ने एवं आभार राहुल ने ज्ञापित किया।

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor