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Thursday, April 16, 2026, 12:17 am

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शराब पर कुछ शेर : हंसराज बारासा हंसा

शाइर : हंसराज बारासा हंसा

1

थोड़ी थोड़ी करके बोतल से
शराब खूब पी गये
अब तो बोतल नही,मानो
अन्धा कुआं हो कोई
जिसमे डूब ही गये

2

शराबी ने अपने जिस्म को
एक बोतल का आकार दे डाला
ढक्कन खोला तो
मुंह पतला, पेट फूला
पैंदा चिपका सा
पैरों का आधार दे डाला

3

बोतल में पड़ी जब तक शराब है
हलक से उतरी तो शबाब है
पेट मे गयी तो पेट खराब है
पेट से नीचे गयी तो पेशाब है

4

शराब इतनी पी ली कि
बीच रास्ते मे ठहरा दिया
गनीमत उस बोतल की
जिसने रात भर मेरा पहरा दिया

5

शराब की बोतल है प्याला नही
रोटी है थाली मे निवाला नही

6

एक ने पी दूजे को पिला दी
तीजा पीने लग गया
ये क्या?अब तो समाज मे
हर शख्स पीने लग गया

7

मिलता है जब वाइज मुझसे
न पीने की सलाह देता है
हम तो पीये जायेंगे
जब तक अल्लाह देता है

8

शराब को कोई तो रंग दो
रखो न पानी के माफिक
पानी समझ शराब को
शराबी पानी की तरह पी रहा है

हंस राज”हंसा”
आदर्श बस्ती,मंडोर
जोधपुर (राजस्थान)

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor