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Sunday, August 23, 2026, 2:29 pm

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Lifestyle

जनिशी की आंखें दान, अब दो दृष्टिहीन को मिल सकेगी रोशनी

राइजिंग भास्कर. जोधपुर

जनिशी पुत्री मलाराम बारूपाल (15) निवासी 40/k-221 मूड़ी मचान होटल एंड रेस्टोरेंट के पास झोपड़ी रोड, मैन बनाड़ रोड की मृत्यु होने पर उनके नेत्रदान किए गए। शनिवार को सुबह जनिशी का स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें मथुरादास माथुर अस्पताल में भर्ती करवाया गया। जहां उपचार के दौरान उनका निधन हो गया। दिवंगत के पिता मालाराम, चाचा पुखराज, माणकराम, भाई बसंत, अभिनव, दिलीप, कुशाल, मोहित और अन्य संबंधियों को आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान द्वारा दिवगंत के नेत्रदान करवाने के लिए आग्रह किया गया। सबकी सहमति मिलने पर आई बैंक के तकनीकी कर्मचारी मैना व्यास ने दिवंगत के दोनों आंखों के कॉर्निया प्राप्त किए। अब जनिशी की आंखों से दो दृष्टिहीन इस सुंदर संसार को देख पाएंगे। आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान जोधपुर चैप्टर के अध्यक्ष राजेंद्र जैन ने बताया कि नेत्रदान के लिए 9314419846, 9829073223, 9414916403, 9414127858 नंबर पर संपर्क किया जा सकता है।

अनमोल दान : आंखें

मरने के बाद, एक नेक काम करते जाइए,
दो अमूल्य “मोती” का दान करते जाइए।
इन्हें न जलाएं, न खाक में मिलाएं, 
इस बेशकीमती धन को दान देते जाएं।
ये चिराग जलने दें, इन्हें मत बुझाइए, 
मरने के बाद, एक नेक काम करते जाइए।
अंधों की जिंदगी में, दर-दर पर है ठोकर, 
जो काट रहे जीवन, नैन बिना रोकर।
बेकार किसी की जान को, आसान करते जाइए,
मरने के बाद, एक नेक काम करते जाइए।
सूनी भयानक रात लगे चांद बिना, 
जैसे “बेनूर चेहरा” लगे आंख बिना।
उजड़े चमन दीप जला फिर बहार लाइए,
मरने के बाद, एक नेक काम करते जाइए। 
मौत से बदत्तर आंखों का अंधेरा, 
मुद्दत से काली रात मिटे फिर हो सवेरा।
ऐसे किसी मजबूर का, भगवान बनते जाइए,
मरने के बाद, एक नेक काम करते जाइए।

-: नेत्रदान महादान :-

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor