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Sunday, August 23, 2026, 2:41 pm

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Lifestyle

कलयुग में नि:स्वार्थ सेवा ही महत्वपूर्ण – राधाकृष्ण महाराज 

मंगल मनोरथ भागवत कथा दूसरे दिन मंगाचरण से आरंभ

शिव वर्मा. जोधपुर 

सूरसागर स्थित बड़ा रामद्वारा में महंत रामप्रसाद जी महाराज के सान्निध्य में मंगल मनोरथ श्रीमद्भ भागवत कथा के दूसरे दिन जगन्नाथ प्रभु को दंडवत प्रणाम करते वह मंगला चरण के साथ कथा आरंभ हुईं। व्यास पीठ से गौवतस राधाकृष्ण महाराज ने कहा कि सत्संग करने से व्यक्ति का विवेक जागृत होता है एवं व्यक्ति के व्यक्तित्व को और सुंदर बना देता है। भगवान अपनी कथा सुनने के लिए भगत के ह्रदय में विराजमान होते हैं। भागवत पुराण कैसे प्रकट उसका वर्णन करते हुए बताया कि नारदजी ने वेदव्यासजी को चार श्लोक बताए। वेदव्यासजी ने उन चार श्लोक 18 हजार श्लोकों द्वारा भागवत कथा पुराण का निर्माण किया। उस कथा को सुखदेव जी महाराज ने राजा परीक्षित को सुनाया। कलयुग में भागवत कथा के श्रवण करने से व्यक्ति का कल्याण हो सकता है। गुरु उनको बनाओ जिन्होंने भगवान को अपना जीवन समर्पण किया हो, अपने जीवन की डोर उन महापुरुषों व संतो को सौंप दे। कथा के मूल तत्व को धारण करें। किसी व्यक्ति का सम्मान करने से हमारी शोभा बढ़ती है। जीवन में छोटी-छोटी सेवा मिले तो से जरूर करें इससे चित शुद्ध होता है, चित जब शुद्ध होता है तो ईश्वर की और बढ़ने रास्ता खुल जाता है। कलयुग में तप से ज्यादा सेवा का महत्व बताया। इस अवसर पर बृज से मंगवाई तुलसीमाला प्रसाद के रूप में वितरित की। रात्रिकालीन सत्र में राधाकृष्ण महाराज द्वारा भव्य भजन संध्या आयोजित की गई।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor