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Sunday, August 23, 2026, 11:28 am

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पश्चिमी राजस्थान उद्योग हस्तशिल्प उत्सव 2026 : ठहाकों के बीच व्यंग्य के तीखे तीर, कवि सम्मेलन ने बांधा समा

देर रात तक श्रोताओं ने उठाया कवि सम्मेलन का लुत्फ

दिलीप कुमार पुरोहित. भगवान पंवार. जोधपुर

पश्चिमी राजस्थान उद्योग हस्तशिल्प उत्सव के तहत शनिवार की शाम हास्य-व्यंग्य को समर्पित रही, जहां कविताओं ने श्रोताओं को भरपूर हंसाया और साथ ही समाज से जुड़े कई सवालों पर सोचने को मजबूर कर दिया। राष्ट्रीय स्तर के हास्य-व्यंग्य कवियों की व्यंग्य फुलझड़ियों पर दर्शक देर रात तक ठहाके लगाते और तालियों से उत्साह बढ़ाते नजर आए।

कवि सम्मेलन के शुभारंभ पर आईजी बीएसएफ एम.एल. गर्ग के साथ लघु उद्योग भारती के निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष घनश्याम ओझा, उत्सव समन्वयक महावीर चोपड़ा, लघु उद्योग भारती प्रांत महामंत्री सुरेश कुमार विश्नोई, पूर्व अध्यक्ष शांति लाल बालड़, अतिरिक्त आयुक्त उद्योग एस.एल. पालीवाल, दीपक माथुर, हरीश लोहिया, सांस्कृतिक प्रभारी राकेश श्रीवास्तव, अभिनव परिहार एवं अंकुर अग्रवाल ने दीप प्रज्वलन कर किया गया। कवि सम्मेलन में डॉ. शशिकांत यादव, डॉ. भुवन मोहिनी, मुन्ना बैटरी, पार्थ नवीन, हीरामणि वैष्णव एवं दमन त्रिपाठी ने अपनी चुटीली, तीखी और प्रभावशाली रचनाओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए कवि डॉ. शशिकांत यादव ने अपने अनोखे अंदाज में “मैं यादव हूं, पर मैंने चारा नहीं खाया, मुझे गोबर से दुर्गंध नहीं आती” जैसे व्यंग्यात्मक संवादों से माहौल को ठहाकों से भर दिया। वहीं कवयित्री डॉ. भुवन मोहिनी ने “जय हो मां भगवती, जय हो मां लक्ष्मी” वंदना से वातावरण को आध्यात्मिक रंग प्रदान किया। कवि हीरामणि वैष्णव ने हास्य-व्यंग्य के साथ अद्भुत दार्शनिक अंदाज प्रस्तुत करते हुए श्रोताओं को गहराई से जोड़ा। उन्होंने अपनी कविता के माध्यम से कहा कि “राम के ननिहाल से मैं कृष्ण की मीरां की धरती पर आया हूं”, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। इसके साथ ही उन्होंने कई काव्यमय लतीफे सुनाकर पूरे माहौल को हास्य और विचार के सुंदर संगम से भर दिया।
कवि दमन त्रिपाठी ने चित्तौड़ और महाराणा प्रताप को प्रणाम करते हुए अपनी ओजपूर्ण प्रस्तुति से श्रोताओं में देशभक्ति का संचार कर दिया। “सुजलाम सुफलाम” तथा “मैं भारतीय हूं, भारत को नमन करता हूं” जैसी रचनाओं की प्रभावशाली प्रस्तुति से पूरा परिसर राष्ट्रप्रेम के भाव से ओत-प्रोत हो उठा और ओज का वातावरण बन गया। प्रारंभ में प्रमोद सिंघल ने सभी राष्ट्रीय कवियों का परिचय कराते हुए उनकी साहित्यिक उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor