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Sunday, August 23, 2026, 10:36 am

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अवैध कनेक्शन एवं बूस्टर के खिलाफ प्रभावी एक्शन लें ताकि उपभोक्ताओं को पर्याप्त एवं नियमित पेयजल उपलब्ध हो -शासन सचिव, पीएचईड़ी जयपुर

राइजिंग भास्कर डॉट कॉम. जयपुर

शासन सचिव, पीएचईड़ी डॉ. समित शर्मा ने प्रदेश भर में अवैध कनेक्शन एवं बूस्टर को चिन्हित कर अवैध जल कनेक्शन करने वालों के विरूद्ध पैनल्टी लगाने के साथ ही एफआईआर दर्ज कराने जैसे सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
शासन सचिव, पीएचईड़ी गुरूवार को जल भवन में प्रदेश भर के अभियंताओं के साथ वीसी के माध्यम से समीक्षा बैठक ले रहे थे। डॉ. शर्मा ने कहा कि पानी की चोरी एवं अवैध कनेक्शन की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। कई शहरों में हजारों की संख्या में अवैध जल कनेक्शन चिन्हित हो चुके हैं, उनके अनुपात में अवैध कनेक्शन हटाने की कार्रवाई काफी कम हुई है। पानी की चोरी से नियमित उपभोक्ताओं को पूरा पानी नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनमें असंतोष व्याप्त है। साथ ही, राज्य सरकार को करोड़ों रूपए की राजस्व हानि भी हो रही है। उन्होंने संबंधित जिलों के अधीक्षण अभियंताओं को स्पष्ट निर्देश दिए कि राइजिंग मैन लाइन एवं वितरण लाइन से 28 फरवरी तक सभी अवैध कनेक्शन चिन्हित कर हटाने की कार्यवाही की जाए। इसके लिए आवश्यकता होने पर प्रशासन एवं पुलिस की सहायता भी ली जाए।
उन्होंने कहा कि अवैध कनेक्शन हटाने के दौरान विरोध होने पर पुलिस की इमदाद लें एवं अवैध कनेक्शन धारक के विरूद्ध पी.डी.पी. एक्ट 1984 सेक्शन 3, सब सेक्शन 2 एवं आईपीसी की धारा 379 एवं 430 के तहत एफआईआर भी दर्ज कराई जाए।
बैठक में उदयपुर शहर में भुवाणा स्थित हाईराइज बिल्डिंग आर्चीज पैरेडाइज का प्रकरण सामने आने पर पीएचईडी सचिव ने अधिशाषी अभियंता उदयपुर को अवैध कनेक्शन पर कार्रवाई करते हुए संबंधित के खिलाफ 5 लाख 55 हजार 500 रूपए की पैनल्टी लगाने एवं 48 घंटों में  वसूल करने के निर्देश दिए। पैनल्टी जमा नहीं कराने की स्थिति में संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
अजमेर में रेलवे के अधिकारी द्वारा जल कनेक्शन को अवैध तरीके से किए जाने व पेयजल वितरण लाइन के साथ छेड़छाड़ करने पर पैनल्टी वसूल करने के निर्देश दिए। पैनल्टी जमा नहीं कराने पर विधिक कार्यवाही करने एवं रेलवे के उच्च अधिकारियों को विभागीय कार्यवाही करने के लिए पत्र लिखने के निर्देश दिए।
डॉ. समित शर्मा ने जलदाय विभाग की पाइप लाइन में अवैध बूस्टर्स के खिलाफ कार्रवाई करने एवं बूस्टर जब्त करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि जनवरी 2024 से चलाए गए अभियान के तहत अभी तक विभाग द्वारा कुल 8 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
अवैध जल कनेक्शन पर कार्रवाई का प्रावधान- अवैध जल कनेक्शन के खिलाफ कार्रवाई के संबंध में 30 मार्च 2018 को जारी विभागीय आदेश के बिन्दु संख्या 19 के तहत 1210 रूपए का एकमुश्त शुल्क तथा 30 किलोलीटर प्रतिमाह जल उपभोग के हिसाब से कम से कम एक साल के कुल जल उपभोग शुल्क की पांच गुना पैनल्टी वसूली का प्रावधान है।  बूस्टर लगाकर पानी खींचने पर कार्रवाई का प्रावधान-  30 मार्च 2018 को जारी विभागीय आदेश के बिन्दु संख्या 18 के तहत प्रथम बार में 1 हजार 210 रूपए एकमुश्त राशि तथा बूस्टर जब्त करने, दूसरी बार करने पर उक्त राशि दुगुनी वसूलने एवं सिक्यूरिटी राशि जब्त किए जाने का प्रावधान है। साथ ही, जल संबंध विच्छेद करने का प्रावधान भी है।
डॉ.शर्मा ने निर्देश दिए कि लीकेज का पता लगने पर 24 घंटे के अंदर लाइन को सही किया जाए, जिससे पानी का अपव्यय रोका जा सके।
डॉ. शर्मा ने जलाशयों की लोकेशन मैपिंग कर उनकी सफाई को मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से मॉनिटर करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रदेश भर में खोदे गए ट्यूबवैल, हैण्डपंप आदि शीघ्र कमिशनिंग कर आमजन को पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिस समस्या का समाधान फील्ड स्तर पर किया जा सकता है उसका समाधान फील्ड स्तर पर हो जाए जबकि मुख्यालय स्तर की समस्या वरिष्ठ अधिकारियों के ध्यान में लाई जाए ताकि आमजन को भटकना नहीं पड़े।
डॉ. शर्मा ने परियोजनाओं में गुणवत्ता बनाए रखने के लिए गुणवत्ता नियंत्रण दलों को एक्टिव करने एवं साइट्स की विजिट कर सैम्पल लेने के निर्देश दिए। खराब गुणवत्ता के कार्य पाए जाने पर संबंधित फर्म के साथ ही आपूर्तिकर्ता कंपनी एवं अभियंता के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस अपनाते हुए कार्य में किसी प्रकार की अनियमितताएं बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।
डॉ. शर्मा ने कहा कि थर्ड पार्टी निरीक्षण रिपोर्ट के बिना परियोजना पर कार्यरत फर्म को भुगतान नहीं किया जाए। जल जीवन मिशन की समीक्षा करते हुए उन्होंने एफएचटीसी की गति बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने जलधारा कमांड सेंटर की कार्य प्रणाली एवं स्काडा सिस्टम के बारे में भी संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor