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Sunday, August 23, 2026, 9:17 am

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प्रॉपर्टी हड़पने के लिए पोती द्वारा 86 साल के दादा पर फर्जी केस करने का आरोप

पुलिस अनुसंधान केअनुसार अंकुरिता कोठारी और उसके पति अमित गोदावत ने प्रॉपर्टी हड़पने की नीयत से अपने ही दादा, भाई और फूफा पर फर्जी एफआईआर दर्ज करवाई

राइजिंग भास्कर. जोधपुर

प्रॉपर्टी हड़पने के लिए पोती द्वारा 86 साल के दादा पर फर्जी केस करने का आरोप है। पुलिस ऐसा अपने अनुसंधान में बता रही है।अंकुरिता कोठारी और उसके पति अमित गोदावत (जैन) (प्रॉपर्टी डीलर) ने प्रॉपर्टी हड़पने की नीयत से अपने ही दादा, भाई और फूफ़ा जी के ऊपर फ़र्ज़ी FIR दर्ज करा दी। पुलिस अनुसंधान में मामले की परत खुल गई है।

जोधपुर शहर में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें 86 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक पर उनकी ही पोती द्वारा झूठे आरोप लगाकर फर्जी प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अंकुरिता कोठारी एवं उनके पति अमित गोदावत (जैन) जो कि एक प्रॉपर्टी डीलर हैं – ने पारिवारिक संपत्ति पर कब्जा करने की नीयत से अपने दादा कैलाशचंद कोठारी, भाई सिद्धार्थ कोठारी, और फूफा कैलाश जैन के विरुद्ध झूठी FIR दर्ज करवाई।

पुलिस जांच में यह बात स्पष्ट हुई है कि शिकायत में लगाए गए अधिकांश आरोप झूठे, मनगढ़ंत एवं स्वार्थ प्रेरित हैं। सूत्रों के अनुसार, यह पूरा षड्यंत्र सर्राफा बाजार स्थित एक दुकान, जो कैलाशचंद कोठारी के नाम पर है, को हड़पने के उद्देश्य से रचा गया था।

धमकी देने का भी आरोप:

विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि अमित गोदावत ने पूर्व में कई बार अपने दादा ससुर कैलाशचंद कोठारी को धमकी दी थी कि “यदि आपने यह दुकान अपनी पोती (अंकुरिता) के नाम नहीं की, तो मैं बासनी स्थित आपकी फैक्ट्री में ताला तोड़कर कब्जा कर लूंगा। आप मेरा कुछ नहीं बिगाड़ पाओगे। पुलिस और प्रशासन में मेरी अच्छी पहचान है, और RIICO में मेरा जिगरी दोस्त बैठा है।”

RIICO मैं बैठे “जिगरी दोस्त” ने भी अपनी दोस्ती निभाते हुए फ़ाइल को No Dues Certificate देने से इनकार कर दिया जबकि वास्तविकता कुछ और ही है। 86 साल का वयोवृद्ध व्यक्ति पिछले दो साल से RIICO के चक्कर काट रहा है, अनगिनत पत्र जोधपुर और यहाँ तक कि जयपुर में भी भेजें लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई।

इस तरह की धमकियों से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि पूरा प्रकरण पूर्व नियोजित दबाव व संपत्ति हड़पने की मंशा से प्रेरित था। यह मामला केवल कानून के दुरुपयोग का नहीं, बल्कि पारिवारिक रिश्तों, सामाजिक मर्यादाओं और बुज़ुर्गों के सम्मान पर भी गहरी चोट है।

समाज के लिए चेतावनी:

परिवार के वरिष्ठ और सम्माननीय सदस्यों को झूठे मुकदमों में फँसाना एक गंभीर सामाजिक अपराध है। इससे न केवल परिवार बिखरता है, बल्कि समाज में भी अविश्वास और अशांति का माहौल उत्पन्न होता है। ऐसे मामलों में कानून को सख्त कदम उठाने चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति व्यक्तिगत लालच में आकर बुज़ुर्गों के सम्मान व अधिकारों का हनन न कर सके।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor