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Thursday, July 9, 2026, 3:28 am

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गजल : मनशाह ‘नायक’

ग़ज़ल : मनशाह ‘नायक’

कोई हंसता है कोई रोता है…

कोई हँसता है कोई रोता है
ये तो तक़दीर का तकाज़ा है
…..
तुझ से तेरा रुमाल अच्छा है
आंसुओं के करीब रहता है
…..
क्यूं उसे ज़ोर से पुकारो हो
दूर बैठा वो मन की सुनता है
…..
दो ही मंज़र हैं सारी दुनिया में
धूप है और कहीं पे साया है
…..
और तो क्या है मेरी ग़ज़लों में
तेरी यादें हैं तेरा चेहरा है
…..
मन में मूरत जो बस गई “नायक”
रात दिन अब उसी की पूजा है
…..
मनशाह “नायक”

(हर्मिटेज, सूरसागर, जोधपुर)

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor