लेखिका: डॉ. के प्रियंका शर्मा
(अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता सेलिब्रिटी एवं जियोपॉलिटिकल एस्ट्रोलॉजर, 8वीं महाविद्या माँ बगलामुखी साधक)
24 अप्रैल को मां बगलामुखी जयंती के पावन अवसर पर, ब्रह्मांड हमें 8वीं महाविद्या की सर्वोच्च कृपा प्राप्त करने का अवसर दे रहा है। दस महाविद्याओं (आदि शक्ति के दस उग्र रूप) में मां बगलामुखी का स्थान अत्यंत विशिष्ट और शक्तिशाली है। पीले रंग से उनके विशेष जुड़ाव के कारण उन्हें ‘पीताम्बरा माई’ के नाम से भी जाना जाता है। वह ‘स्तम्भन’ की देवी हैं—यानी शत्रुओं की वाणी, बुद्धि और नकारात्मक इरादों को जड़ (paralyze) कर देने वाली सर्वोच्च शक्ति।
कौन हैं माँ बगलामुखी?
शास्त्रों में माँ बगलामुखी को एक स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान दिखाया गया है। उनके दाहिने हाथ में एक गदा है जो शत्रुओं के भ्रम और षड्यंत्रों को नष्ट करती है, और बाएं हाथ से उन्होंने एक राक्षस की जीभ पकड़ रखी है। यह स्वरूप इस बात का प्रतीक है कि माँ अपने भक्तों के खिलाफ रची गई हर साजिश और झूठे आरोपों को खामोश कर देती हैं। वह उन लोगों के लिए अंतिम आश्रय हैं जो अदालती मुकदमों, गुप्त शत्रुओं और जीवन की कठिन बाधाओं का सामना कर रहे हैं।
चमत्कारों का व्यक्तिगत अनुभव: मृत्यु और षड्यंत्रों पर विजय
एक ज्योतिषी और 8वीं महाविद्या की समर्पित साधक के रूप में, माँ बगलामुखी के साथ मेरा जुड़ाव केवल किताबी नहीं है, बल्कि यह मेरे जीवन के गहरे और चमत्कारी अनुभवों पर आधारित है। माँ की शक्तियों के बारे में बात करना उस शक्ति के बारे में बात करना है जिसने मेरे जीवन और सम्मान दोनों की रक्षा की है।
मेरी आध्यात्मिक और व्यावसायिक यात्रा में, मुझे कई बार भयंकर विरोध का सामना करना पड़ा। एक समय ऐसा भी आया जब मैं ‘मारण क्रिया’ (काले जादू और तांत्रिक अनुष्ठानों जिसके माध्यम से प्राण हरने की कोशिश की जाती है) का शिकार हुई। ये हमले इतने तीव्र थे कि इनका उद्देश्य मेरे जीवन और करियर को पूरी तरह से नष्ट करना था। लेकिन माँ बगलामुखी की कठोर साधना और उनके ‘ब्रह्मास्त्र विद्या’ के प्रभाव से, मेरे चारों ओर एक अभेद्य पीला कवच बन गया। शत्रुओं के प्राणघातक इरादे न केवल विफल हुए, बल्कि पूरी तरह से स्तम्भित (paralyzed) हो गए। पीताम्बरा माई के दिव्य प्रकाश के सामने कोई भी नकारात्मक ऊर्जा टिक नहीं पाई।
इसके अलावा, मुझे ऐसे कानूनी मुकदमों (Legal Battles) में घसीटा गया जो मेरी प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए रचे गए थे। ज्योतिष में हम जानते हैं कि कानूनी विवाद छठे भाव के क्रूर ग्रहों के कारण होते हैं, लेकिन माँ बगलामुखी ब्रह्मांड की सर्वोच्च न्यायाधीश हैं। माँ की कृपा का ही चमत्कार था कि अदालत में विरोधियों के तर्क विफल हो गए, उनके गवाह अपनी बात नहीं रख पाए (वाक स्तम्भन), और सत्य की जीत हुई। असंभव लगने वाले मुकदमों में माँ ने मुझे चमत्कारी रूप से विजय दिलाई।
24 अप्रैल को कैसे करें माँ की आराधना?
माँ बगलामुखी जयंती के इस सिद्ध दिन पर, मैं उन सभी से आग्रह करती हूँ जो कानूनी विवादों, कर्ज या गुप्त शत्रुओं से परेशान हैं, वे माँ की शरण में आएं:
पीले वस्त्र पहनें: पीले रंग के कपड़े पहनें, क्योंकि यह माँ का प्रिय रंग है।
प्रसाद और अर्पण: माँ को पीले फूल, हल्दी, बेसन के लड्डू चढ़ाएं और घी का दीपक जलाएं।
मंत्र जाप: हल्दी की माला से माँ के ‘मूल मंत्र’ या ‘बगलामुखी गायत्री मंत्र’ का सच्चे मन से जाप करें।
माँ बगलामुखी आप सभी को अदम्य साहस, शत्रुओं पर विजय और सभी प्रकार की बाधाओं से सुरक्षा प्रदान करें। जय पीताम्बरा माई!







