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Monday, July 27, 2026, 2:42 am

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जोधपुर में शिक्षाविदों का महासंगम: उच्च शिक्षा में भारतीय मूल्यों और नवाचार से गढ़ेगा देश का भविष्य

सुनील वर्मा. जोधपुर

डॉ. एस.एन. मेडिकल कॉलेज में विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान द्वारा आयोजित एक दिवसीय कार्यकर्ता प्रशिक्षण वर्ग में शिक्षा, तकनीक और भारतीय संस्कृति का एक सुंदर और मानवीय रूप देखने को मिला। परिसर में खेजड़ी का पौधा लगाकर शुरू हुए इस बौद्धिक समागम में प्रदेश भर से आए कुलगुरुओं, वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने देश के भविष्य को संवारने का खाका खींचा।

शिक्षार्थियों को नर से नारायण बनाने का प्रयास: गोविंद कुमार

विद्या भारती के क्षेत्रीय संगठन मंत्री गोविंद कुमार ने शिक्षा को जीवन निर्माण का मुख्य माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल आजीविका कमाने का साधन नहीं है, बल्कि यह मनुष्य को श्रेष्ठ बनाने का मार्ग है। आज की युवा पीढ़ी समाज में बदलाव लाने की ताकत रखती है और यदि उसे सही दिशा दिखाई जाए तो भारत पूरी दुनिया को एक नया रास्ता दिखा सकता है।

डिग्री से परे शोध और नवाचार पर केंद्रित हों विश्वविद्यालय: प्रो. पवन कुमार शर्मा

जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर पवन कुमार शर्मा ने विश्वविद्यालयों की भूमिका पर विचार साझा करते हुए कहा कि शिक्षण संस्थानों को केवल परीक्षा कराने और डिग्री बांटने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उच्च शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक कौशल का समावेश करके ही हम ऐसे युवाओं को तैयार कर सकते हैं जो समाज की वास्तविक समस्याओं का समाधान निकाल सकें।

सांस्कृतिक जड़ों से जुड़कर ही बनेगी ज्ञान महाशक्ति: प्रो. कैलाश डागा

मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय कुलगुरु प्रोफेसर कैलाश डागा ने भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारी सांस्कृतिक और ज्ञान धरोहर केवल पुरानी यादें नहीं हैं, बल्कि यह भविष्य का मार्ग प्रशस्त करने वाली बड़ी शक्ति हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ने का अवसर देती है।

टिकाऊ विकास का आधार है पारंपरिक कृषि: प्रोफेसर वी.एस. जैतावत

कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर कुलगुरु प्रोफेसर वी.एस. जैतावत ने देश की खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण पर बात की। उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक कृषि पद्धतियां आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। जब हम अपने पारंपरिक कृषि ज्ञान और आधुनिक अनुसंधान को एक साथ लाएंगे, तभी देश में सतत और पर्यावरण के अनुकूल विकास संभव हो पाएगा।

सिक्योरिटी एंड क्रिमिनल जस्टिस: डॉ. देवेंद्र विश्नोई

सरदार पटेल यूनिवर्सिटी ऑफ पुलिस, सिक्योरिटी एंड क्रिमिनल जस्टिस के प्रति कुलगुरु डॉ. देवेंद्र विश्नोई ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एवं साइबर सुरक्षा को भविष्य की शिक्षा का अनिवार्य विषय बताया।

भारतीय शिक्षा व्यवस्था को पुनर्गठित करने की आवश्यकता: प्रो. संजय शर्मा

विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के क्षेत्र संयोजक प्रो. संजय शर्मा ने संगठन की कार्ययोजना, उद्देश्य एवं आगामी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के आलोक में भारतीय शिक्षा को भारतीय दृष्टि से पुनर्गठित करने को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।

तकनीक और नैतिकता से सशक्त होगी शिक्षा: डॉ. सुनील जांगिड़

डॉ. जांगिड़ ने बताया कि तकनीक कभी भी इंसान का स्थान नहीं ले सकती, बल्कि यह हमारी कार्यक्षमता बढ़ाने का एक माध्यम है। यदि एआई का प्रयोग भारतीय मूल्यों और सामाजिक नैतिकता को ध्यान में रखकर किया जाए, तो यह शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।

चिकित्सक संवेदनशील एवं नैतिक मूल्यों से परिपूर्ण हो: डॉ. बी.एस. जोधा

डॉ. एस.एन. मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉ. बी.एस. जोधा ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा में एआई, डिजिटल हेल्थ, भारतीय ज्ञान परंपरा और मानवीय संवेदनाओं का समन्वय भविष्य की आवश्यकता है।

शिक्षा का उद्देश्य कुशल, संस्कारित और राष्ट्रप्रेमी युवाओं का निर्माण: अन्य वक्ता

कार्यक्रम के अन्य सत्रों में लक्की प्रोफेशनल इंस्टीट्यूट के डॉ. अर्जुन सिंह, तथा वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराग सिंह ने भी अपने विचार साझा किए। सभी विशेषज्ञों का एकमत से मानना था कि शिक्षा का मुख्य उद्देश्य कुशल, संस्कारित और राष्ट्रप्रेमी युवाओं का निर्माण करना है।

नई प्रांतीय कार्यकारिणी की घोषणा

सर्वसम्मति से डॉ. ओमप्रकाश विश्नोई को प्रांत अध्यक्ष, डॉ. भवानी सिंह को प्रांत मंत्री, शशांक दवे को सहमंत्री और धर्मेंद्र चौहान को कोषाध्यक्ष चुना गया। नवनियुक्त टीम ने राष्ट्रहित और भारतीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

भारतीय ज्ञान प्रणाली परीक्षा के विजेताओं का सम्मान

समारोह के दौरान विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान, जोधपुर प्रांत द्वारा 31 जनवरी एवं 1 फरवरी को आयोजित भारतीय ज्ञान प्रणाली परीक्षा के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। इस परीक्षा में जोधपुर प्रांत के लगभग 1600 विद्यार्थियों ने भाग लिया था। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 6 विद्यार्थियों को प्रोत्साहन राशि के रूप में 2,500 रुपये का चेक एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor