जैसलमेर निवासी पंकज भाटिया के सुझावों पर भारतीय रिजर्व बैंक का सकारात्मक जवाब, भविष्य में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच और सुगमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
दिलीप कुमार पुरोहित. जैसलमेर
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देश में बैंकिंग सेवाओं को अधिक समावेशी (Inclusive) और सभी वर्गों के लिए सुलभ बनाने की दिशा में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जैसलमेर के जागरूक नागरिक पंकज भाटिया द्वारा एटीएम को दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने संबंधी भेजे गए सुझावों पर आरबीआई ने गंभीरता से विचार किया और विस्तृत टिप्पणियों के साथ उन्हें ई-मेल के माध्यम से जवाब भी भेजा। इसके बाद पंकज भाटिया ने आरबीआई का आभार व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई कि भविष्य में इन व्यवस्थाओं के लागू होने से लाखों दिव्यांग और बुजुर्ग उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
यह पूरा घटनाक्रम इस बात का उदाहरण भी है कि यदि कोई नागरिक जनहित से जुड़े सुझाव तथ्यों और तर्कों के साथ संबंधित संस्थानों तक पहुंचाता है तो उस पर सकारात्मक कार्रवाई संभव है। पंकज भाटिया ने जून 2026 में प्रधानमंत्री कार्यालय, भारतीय रिजर्व बैंक और विभिन्न बैंकों को ई-मेल भेजकर एटीएम केंद्रों को दिव्यांग एवं वरिष्ठ नागरिकों के लिए अधिक सुगम बनाने के संबंध में कई व्यावहारिक सुझाव दिए थे। बाद में आरबीआई के मार्केट कंडक्ट सेक्शन, डिपार्टमेंट ऑफ रेगुलेशन ने उन्हें ई-मेल भेजकर बताया कि उनके सुझावों की जांच की गई है तथा प्रत्येक बिंदु पर विभागीय टिप्पणियां तैयार की गई हैं।
आरबीआई द्वारा भेजे गए दस्तावेज में स्पष्ट किया गया कि कई सुझाव पहले से जारी दिशा-निर्देशों तथा Reserve Bank of India (Commercial Banks – Responsible Business Conduct) Directions, 2025 और भारत सरकार द्वारा जारी Accessibility Standards for Banking Sector के अनुरूप हैं। बैंकों को सलाह दी गई है कि वे वर्तमान एवं भविष्य के एटीएम में दिव्यांगजनों की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।
क्या थे पंकज भाटिया के प्रमुख सुझाव?
पंकज भाटिया ने एटीएम केंद्रों को अधिक सुरक्षित एवं सुगम बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। इनमें प्रमुख रूप से—
- प्रत्येक एटीएम पर निर्धारित मानकों के अनुरूप रैंप का निर्माण।
- रैंप की ढलान ऐसी हो कि व्हीलचेयर उपयोगकर्ता बिना सहायता के आवागमन कर सकें।
- रैंप पर फिसलन-रोधी (एंटी-स्किड) सतह बनाई जाए।
- रैंप के दोनों ओर मजबूत हैंडरेल लगाए जाएं।
- प्रवेश द्वार पर अनावश्यक ऊंचे प्लेटफॉर्म या अवरोध न हों।
- वर्षा के समय पानी जमा न हो, इसके लिए जल निकासी की उचित व्यवस्था हो।
- प्रत्येक एटीएम का समय-समय पर एक्सेसिबिलिटी ऑडिट कराया जाए।
- नए एटीएम स्थापित करते समय दिव्यांग-अनुकूल मानकों का पालन किया जाए।
- भवन की नियमित जांच कर आवश्यक सुधार किए जाएं।
- एटीएम पर शिकायत दर्ज कराने के लिए स्पष्ट संपर्क व्यवस्था उपलब्ध हो।
आरबीआई ने क्या कहा?
आरबीआई ने अपने जवाब में बताया कि:
- बैंकों को पहले ही सलाह दी जा चुकी है कि सभी मौजूदा और भविष्य के एटीएम में दिव्यांगजनों की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
- भारत सरकार द्वारा फरवरी 2024 में जारी Accessibility Standards for Banking Sector के अनुरूप भी आवश्यक दिशा-निर्देश उपलब्ध हैं।
- सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में अगस्त 2025 में भी बैंकों को आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा गया है।
- एक्सेसिबिलिटी ऑडिट कराने तथा प्रमाणित विशेषज्ञों से निरीक्षण कराने जैसे सुझावों को भी नियामकीय ढांचे में शामिल किया गया है।
- कुछ सुझाव, जैसे वर्षा जल निकासी की व्यवस्था, स्थानीय स्तर के निर्माण एवं रखरखाव से जुड़े विषय हैं और सीधे आरबीआई के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते।
इससे स्पष्ट होता है कि आरबीआई ने सुझावों को केवल औपचारिकता के रूप में नहीं लिया, बल्कि प्रत्येक बिंदु पर अपनी स्थिति स्पष्ट की।
दिव्यांगों और वरिष्ठ नागरिकों को होगा लाभ
यदि इन मानकों का व्यापक रूप से पालन किया जाता है तो इसका सबसे अधिक लाभ उन लोगों को मिलेगा जिन्हें आज एटीएम तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के लिए उचित ढलान वाला रैंप, मजबूत रेलिंग और बिना अवरोध वाला प्रवेश द्वार बैंकिंग सेवाओं तक उनकी स्वतंत्र पहुंच सुनिश्चित करेगा। वहीं वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी सुरक्षित प्रवेश और फिसलन-रहित सतह दुर्घटनाओं की संभावना कम करेगी।
पंकज भाटिया के 10 प्रमुख सुझाव
- प्रत्येक एटीएम पर मानक रैंप।
- व्हीलचेयर अनुकूल ढलान।
- एंटी-स्किड सतह।
- दोनों ओर हैंडरेल।
- बिना अवरोध प्रवेश।
- वर्षा जल निकासी।
- नियमित एक्सेसिबिलिटी ऑडिट।
- नए एटीएम में अनिवार्य मानक।
- भवनों का नियमित मूल्यांकन।
- स्पष्ट शिकायत निवारण व्यवस्था।
आरबीआई की प्रमुख प्रतिक्रियाएं
- बैंकों को दिव्यांग-अनुकूल एटीएम विकसित करने की सलाह।
- एक्सेसिबिलिटी स्टैंडर्ड पहले से लागू।
- सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के पालन पर जोर।
- समय-समय पर निरीक्षण और ऑडिट की आवश्यकता।
- कुछ स्थानीय निर्माण संबंधी विषय आरबीआई के अधिकार क्षेत्र से बाहर।
जागरूक नागरिक की पहल बनी उदाहरण
लोकतंत्र में नागरिकों की सहभागिता केवल मतदान तक सीमित नहीं होती। जनहित के मुद्दों पर सकारात्मक सुझाव देना भी नागरिक दायित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पंकज भाटिया की पहल यह संदेश देती है कि यदि समस्याओं को व्यवस्थित रूप से संबंधित संस्थाओं के समक्ष रखा जाए तो उन पर गंभीर विचार किया जा सकता है।
आज देश में ‘सुगम्य भारत अभियान’ और समावेशी विकास की अवधारणा को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसे में बैंकिंग सेवाओं का दिव्यांग एवं वरिष्ठ नागरिक अनुकूल होना समय की आवश्यकता है।
क्यों जरूरी हैं दिव्यांग-अनुकूल एटीएम?
- सभी नागरिकों को समान बैंकिंग सुविधा।
- व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं की स्वतंत्र पहुंच।
- वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा।
- दुर्घटनाओं में कमी।
- समावेशी बैंकिंग व्यवस्था को बढ़ावा।
- दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम की भावना को मजबूती।
पंकज भाटिया ने जताया आभार
आरबीआई की ओर से विस्तृत जवाब मिलने के बाद पंकज भाटिया ने बैंक का धन्यवाद ज्ञापित किया। उनका कहना है कि यदि भविष्य में आरबीआई द्वारा सुझाए गए दिशा-निर्देशों का प्रभावी पालन कराया जाता है तो इससे देशभर के लाखों दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी संस्था की आलोचना करना नहीं, बल्कि बैंकिंग सेवाओं को अधिक मानवीय और सभी के लिए सुलभ बनाना है। यदि नागरिक और संस्थाएं मिलकर कार्य करें तो छोटी-छोटी पहल भी बड़े बदलाव का आधार बन सकती हैं। पंकज भाटिया की पहल और उस पर आरबीआई की सकारात्मक प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि जनसरोकारों से जुड़े सुझाव प्रशासनिक और नियामकीय सुधारों का माध्यम बन सकते हैं। हालांकि कई दिशा-निर्देश पहले से अस्तित्व में हैं, लेकिन उनका प्रभावी क्रियान्वयन ही वास्तविक सफलता तय करेगा। यदि सभी बैंक इन मानकों का ईमानदारी से पालन करें तो भविष्य में देश के एटीएम वास्तव में दिव्यांगजनों, वरिष्ठ नागरिकों और अन्य सभी ग्राहकों के लिए अधिक सुरक्षित, सम्मानजनक और सुगम बन सकेंगे।


