पीएचईडी का बिजली खर्च घटाने पर फोकस, करोड़ों रुपए बकाया होने पर नहीं भरा जाता है बिल
राइजिंग भास्कर. जोधपुर
प्रदेश में पेयजल व्यवस्था को बिजली के बढ़ते खर्च से राहत दिलाने के लिए अब सौर ऊर्जा का सहारा लिया जाएगा। सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) की ओर से जिलों में सोलर प्लांट स्थापित करने की योजना पर काम किया जा रहा है।
इसका उद्देश्य पेयजल योजनाओं में बिजली की खपत और विभाग पर पड़ने वाले आर्थिक भार को कम करना है। जानकारी के अनुसार पेयजल योजनाओं के संचालन में हर साल बड़ी मात्रा में बिजली की खपत होती है। बिजली के खर्च को कम करने के लिए सोलर ऊर्जा को वैकल्पिक स्रोत के रूप में अपनाने की तैयारी है। योजना के तहत जिलों में आवश्यकता और पेयजल परियोजनाओं के आधार पर सोलर प्लांट लगाए जाएंगे।
350 मेगावाट क्षमता के प्लांट की तैयारी
योजना के तहत करीब 350 मेगावाट क्षमता के सोलर प्लांट स्थापित करने का प्रस्ताव बताया गया है। इनमें विभिन्न जिलों में जरूरत के अनुसार अलग-अलग क्षमता के संयंत्र लगाए जाएंगे। रिपोर्ट के अनुसार पहले चरण में करीब 20 मेगावाट के प्लांट लगाने तथा आगे क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
बिजली खर्च में आएगी कमी
पीएचईडी की पेयजल योजनाओं में पंपिंग और जल वितरण के लिए बड़ी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होती है। सौर ऊर्जा से संचालित होने वाली व्यवस्थाओं से बिजली बिल में कमी आने की उम्मीद है। इससे विभाग को लंबे समय में आर्थिक बचत होगी और पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकेगा।
बकाया बिजली बिल भी बड़ी चुनौती
पीएचईडी पर बिजली बिलों का बकाया भी एक बड़ी समस्या है। करोड़ों रुपए का बिल बकाया होने के कारण कई बार भुगतान में परेशानी आती है। ऐसे में सौर ऊर्जा आधारित परियोजनाओं को बढ़ावा देने से बिजली पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ भविष्य के खर्च को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। विभाग की योजना है कि जहां संभव हो, पेयजल पंपिंग स्टेशनों और अन्य जल योजनाओं को सौर ऊर्जा से जोड़ा जाए। इससे बिजली की बचत, खर्च में कमी और पेयजल व्यवस्था को अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
