राइजिंग भास्कर. जोधपुर
सामाजिक कार्यकर्ता पूनाराम सांसी ने बताया कि विमुक्त घुमंतू समुदाय आजादी के लगभग आठ दशक बाद भी विभिन्न अभावों में विमुक्त घुमंतू जीवन जीने को मजबूर है। यह समुदाय अपनी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए संघर्ष कर रहा है।
पूनाराम सांसी ने बताया कि घुमंतू जीवन शैली के कारण इन समुदायों में शैक्षणिक अभाव देखा जा सकता है। शैक्षणिक अभाव का एक कारण हिन्दी से अलग इनकी कोड भाषा को भी माना जा सकता है, क्योंकि इनके शैक्षणिक प्रारंभिक काल में इनकी भाषा शैली स्वयं की अलग-अलग कोड भाषा होती है जबकि शैक्षणिक कार्यक्रम हिंदी भाषा में होते हैं।
पूनाराम सांसी ने बताया कि विमुक्त घुमंतू समुदाय के प्रारम्भिक शैक्षणिक काल में इन समुदायों के बच्चों को बहुत कठिनाई महसूस होती है । इतने कठिन माहौल में भी इन समुदायों से बच्चे पढ़-लिख जाते हैं तो उन बच्चों को केरियर काउंसिलिंग प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी का उचित मार्गदर्शन नहीं मिलता है, जिससे हताश होकर यह समुदाय और अधिक अशिक्षा बेरोजगारी और क्राइम की और बढ़ रहा है। उनकी हताशा को शासन प्रशासन नहीं समझ पा रहा है। पूनाराम सांसी ने बताया कि पहली बार इस हताशा को समझते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस पर काम किया था।
पूनाराम सांसी ने बताया कि अशोक गहलोत ने अवैध शराब बनाने वाले परिवारों को इस कार्य से विमुख करने व उनके पुनर्वास हेतु नवजीवन योजना का संचालन किया था। इसका पायलेट प्रोजेक्ट जोधपुर की चार बस्तियों सांसी बस्ती रातानाडा, सांसी बस्ती भदवासिया, मसूरिया नट बस्ती अैर बनाड़ नट बस्ती मे किया गया था । पूनाराम सांसी ने बताया कि मैं इस पायलेट प्रोजेक्ट में सामाजिक कार्यकर्ता के रुप में भी शामिल था। इन चार बस्तियों में पायलेट प्रोजेक्ट सफल हुआ । इसके बाद उसे पुरे प्रदेश में लागू किया गया। विमुक्त घुमंतू समुदाय आज भी दयनीय जीवन व्यतीत कर रहे हैं और जो अपनी मूलभूत आवश्यकताओं जैसे रोजी रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, सड़क, सीवरेज, शौचालय, श्मशान, सामुदायिक भवन, चिकित्सालय, स्कूल आदि का अभाव आज भी देखने को मिलता है। स्थायित्व के अभाव के कारण मूल दस्तावेजों के कारण आज भी ये समुदाय सरकार की कई महत्वपूर्ण योजनाओं से आज भी वंचित हैं। दस्तावेज बनाने में इन समुदायों के लिए आवश्यक शिथिलतायें निर्धारित की जानी चाहिए ताकि आभावों से ग्रसित विमुक्त घुमंतू समुदायों को भी सरकार की महत्वपूर्ण सुविधाओं का लाभ मिल सकें।
पूनाराम सांसी ने बताया कि विमुक्त घुमंतू समुदाय खेल पृष्ठभूमि से जुड़ा हुआ समुदाय है जो अपने अनेकों खेलों में विशेष महत्व रखता है। सैकड़ों हजारों किलोमीटर पैदल यात्राओं को करने वाले विमूक्त घुमंतू समुदायों से अच्छे एथेलिट तरासे जा सकते हैं। कई किलोमीटर तक बोझा उठाने वाले मजबूत हाथों से अच्छे वेटलिफ्टर तरासे जा सकते हैं। हथोड़ा और कुल्हाड़ी चलाने वाले मजबूत हाथों से अच्छे बोक्सर और पहलवान तरासे जा सकते हैं । इन समुदायों के लचीले शारीरिक बनावट से अच्छे जिम्नास्टिक और योग के खिलाड़ी तैयार किए जा सकते हैं । इन समुदायों में वन क्षेत्र में अच्छे निशानेबाज है, जिनसे अच्छे तिरंदाज व शूटर तैयार किए जा सकते हैं। विमुक्त घुमंतू समुदाय खेल कौशल में बहुत अधिक रुचि रखता है बस सरकारों को इन खैल गुणों को ध्यान में रखते हुए विमुक्त घुमंतू समुदायों के लिए एक विशेष खेल नीति बनाई जाती है तो इन समुदायों से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी प्राप्त किए जा सकते हैं।


