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Friday, August 21, 2026, 10:25 pm

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वैज्ञानिक दृष्टिकोण और हमारा समाज विषय पर व्याख्यान

विज्ञान पर आधारित लगभग 30 पुस्तकों के लेखक देवेंद्र मेवाड़ी ने कहा वर्षोे से हमारा समाज मानता रहा है कि सूरज पृथवी के चक्कर लगाता है। गैलिलियों ने तर्क दिया कि सृर्य पृथ्वी के चक्कर नहीं लगाता है अपितु पृथ्वी  सूर्य के चक्कर लगाती है।
दिलीप कुमार पुरोहित. अल्मोडा
9783414079 diliprakhai@gmail.com
भारत ज्ञान विज्ञान समिति तथा बच्चों की पत्रिका बालप्रहरी द्वारा वैज्ञानिक दृष्टिकोण दिवस के अवसर पर आयोजित‘वैज्ञानिक दृष्टिकोण और हमारा समाज’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में  प्रख्यात विज्ञान लेखक एवं बालसाहित्यकार देवेंद्र मावड़ी ने कहा कि विज्ञान हमें क्या, क्यों तथा कैसे आदि तर्क करना सिखाता है। उन्होंने कहा कि विज्ञान हमें  सवाल पूछने के लिए प्रेरित करता है। हमारे मन में जिज्ञासा पैदा करता है। उन्होंने कहा कि विज्ञान हमें प्रकृति से जोड़ता है।
उन्होंने  बहुत ही सरल भाषा में कृषि ऊपज यानी कृषि विज्ञान को बताया। उन्होंने कहा 1980 में वे पंतनगर विश्वविद्यालय में थे। उस वर्ष जब सूर्यग्रहण लगा तो पढ़े-लिखे इंजीनियर तथा डॉक्टरों ने भी घर के दरवाजे बंद कर दिए थे। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों ने सिद्ध कर दिया है कि सूर्य ग्रहण और चंद्रगहण राहु केतु के प्रकोप से नहीं अपितु ब्रहमांड में सूर्य,चंद्रमा तथा पृथ्वी के एक सीध में आने तथा एक ग्रह की छाया दूसरे ग्रह पर पड़ने के कारण ग्रहण लगता है। उसके बावजूद आज भी हम  अंधविश्वास में जी रहे हैं।
विज्ञान पर आधारित लगभग 30 पुस्तकों के लेखक देवेंद्र मेवाड़ी ने कहा वर्षोे से हमारा समाज मानता रहा है कि सूरज पृथवी के चक्कर लगाता है। गैलिलियों ने तर्क दिया कि सृर्य पृथ्वी के चक्कर नहीं लगाता है अपितु पृथ्वी  सूर्य के चक्कर लगाती है। इस  सत्य  को कहने पर  गैलीलियो को प्रताड़ित किया गया। उसे अपनी जान से हाथ तक धोना पड़ा। उन्होंने कहा कि पेड़ पौधों का भी अपना संसार है। फूलों के परागण के बाद बीज व फल की उत्पत्ति होती है। यदि  हम फूलों  या नई कलियों को तोड़ देंगे तो बीज कैसे बनेंगे। उन्होंने प्रकृति की खुली किताब के अध्ययन करने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच के साथ ही हम अपनी मंजिल को पाने में सफल हो सकते हैं।
बालप्रहरी तथा भारत ज्ञान विज्ञान समिति द्वारा आयोजित 1557 वे ऑनलाइन में सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान गौचर के प्राचार्य तथा चमोली जनपद में मुख्य शिक्षा अधिकारी आकाश सारस्वत ने कहा कि नई शिक्षा नीति में  बच्चे कक्षा में सवाल पूछें, विषय पर तर्क-वितर्क करें। ऐसा पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। उन्होंने कहा बच्चों के मन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण जाग्रत करना आज समय की मांग है। उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकास्ट) से संबद्ध मानस खड अल्मोड़ा के वरिष्ठ वैज्ञानिक गिरीशचंद्र सिंह नेगी ने कहा कि विज्ञान निरीक्षण,परीक्षण तथा विश्लेषण करने की बात करता है। उन्होंने कहा कि विज्ञान समाज के लिए बहुत उपयोगी है। हम सभी को सकारात्मक सोच के साथ वैज्ञानिक जागरूकता अभियान को जन-जन तक फैलाना होगा।
भारत ज्ञान विज्ञान समिति की अवधारणा रखते हुए कुमाऊं विश्व विद्यालय शिक्षा संकाय की पूर्व विभागाध्यक्ष तथा भारत ज्ञान विज्ञान समिति की जिलाध्यक्ष डॉ. विजया ढौढियाल ने  कहा कि महाराष्ट्र के प्रसिद्ध चिकित्सक तथा सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नरेंद्र अच्युत दाभोलकर ने समाज में व्याप्त अंधविश्वास  तथा कुप्रथाओं को दूर करने के लिए जीवन भर काम किया। 20 अगस्त,2013 को अज्ञात हमलावरों ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी। उनकी शहादत के बाद महाराष्ट्र सरकार ने उनके प्रस्तावित अंधविश्वास विरोधी विधेयक को अध्यादेश के तौर पर समूचे राज्य में लागू किया। उनके शहादत दिवस को ऑल इंडिया पीपुल्स साइंस नेटवर्क की पहल पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण दिवस के तौर पर समूचे देश में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा में वैज्ञानिक दृष्टिकोण दिवस पर हवालबाग, बसर, बसेरा, सरकार की आली, चौरा हवालबाग आदि नागरिक शिक्षा केंद्रों में वैज्ञानिक जागरूता से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।
अंत में पूर्व आयकर आयुक्त तथा बालप्रहरी के संरक्षक श्यामपलट पांडेय ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान खंडवा के वरिष्ठ व्याखाता डॉ. अशोक कुमार नेगी, कुमाऊं विश्वविद्यालय परिसर नैनीताल के प्रो. ललित तिवारी, मौसम विज्ञान केंद्र पिथौरागढ़ के वैज्ञानिक लवकुश कुमार, सांख्यिकी विभाग के पूर्व निदेशक हरिहर लोहुमी, भारत ज्ञान विज्ञान समिति के प्रांतीय अध्यक्ष विजय भट्ट, प्रांतीय महासचिव कमलेश खंतवाल, प्रमोद तिवारी, नरेंद्रपाल सिंह, सुनीता भास्कर, प्रकाश चंद्र पांडे, सुमित श्रीवास्तव, सरोजनी कुकरेती, रूखसाना बानो, कुसुम बिष्ट, डॉ. इंदु गुप्ता,  कामेश्वरी सिंह, दिनेश भट्ट, प्रेमसिंह पापड़ा,  अनिल कुमार शुक्ला,शैली, डॉ. चंद्र कला वर्मा, श्याम नारायण श्रीवास्तव, डॉ.लक्ष्मी शंकर कुशवाहा, उमेश पांडे, भगवती गुसाई सहित लगभग 3 दर्जन शिक्षक, अभिभावक तथा साहित्यकार उपस्थित थे। संचालन बालप्रहरी के संपादक तथा भारत ज्ञान विज्ञान समिति के राज्य सचिव उदय किरौला ने किया।
Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor