Explore

Search

Friday, August 21, 2026, 9:52 pm

Friday, August 21, 2026, 9:52 pm

LATEST NEWS
[wonderplugin_slider id=1]
Lifestyle

26 साल से सेवा की मिसाल: भाद्रपद में बाबा रामदेव के जातरुओं को शीतल जल और नींबू पानी पिलाते हैं विजय सिंह कच्छवाह

काम-धंधा छोड़कर एक महीने तक सेवा में जुट जाते हैं सूरसागर के विजय सिंह, खुद शुगर की बीमारी के बावजूद निभा रहे हैं सेवा का संकल्प

दिलीप कुमार पुरोहित, जोधपुर

(जैसा कि मंजू गहलोत ने राइजिंग भास्कर को बताया।)

सेवा के लिए जरूरी नहीं कि कोई बड़ा संगठन हो, बड़ी धनराशि हो या कोई विशेष संसाधन उपलब्ध हों। सच्ची सेवा तो उस भावना का नाम है, जिसमें इंसान दूसरों की तकलीफ को अपनी तकलीफ समझकर उनके लिए कुछ करने का संकल्प लेता है। जोधपुर के सूरसागर निवासी विजय सिंह कच्छवाह पिछले 26 वर्षों से इसी सेवा भावना की एक अनूठी मिसाल पेश कर रहे हैं। हर साल भाद्रपद मास आते ही वे अपने काम-धंधे को पीछे छोड़कर बाबा रामदेव के जातरुओं की सेवा में जुट जाते हैं।

बाबा रामदेव के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु रामदेवरा पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या पैदल यात्रियों की होती है। तपती धूप, लंबा सफर, थकान और रास्ते की परेशानियों के बीच जब किसी यात्री को ठंडा पानी या नींबू पानी मिल जाता है तो वह उसके लिए केवल पेय नहीं, बल्कि बड़ी राहत बन जाता है। विजय सिंह कच्छवाह पिछले 26 वर्षों से इसी राहत को श्रद्धालुओं तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं।

भाद्रपद मास में बदल जाती है दिनचर्या

विजय सिंह कच्छवाह की सेवा का यह सिलसिला किसी एक दिन या एक-दो सप्ताह तक सीमित नहीं है। भाद्रपद मास में वे लगातार करीब एक महीने तक जातरुओं की सेवा में लगे रहते हैं। वे अपनी गाड़ी में शीतल जल और नींबू पानी लेकर जोधपुर से रामदेवरा की ओर निकलते हैं और रास्ते में पैदल यात्रियों तथा राहगीरों को पानी पिलाते हैं।

उनका उद्देश्य केवल श्रद्धालुओं को पानी उपलब्ध करवाना नहीं है, बल्कि लंबी यात्रा में उन्हें थोड़ी राहत और अपनापन देना है। पैदल चल रहे यात्रियों के लिए रास्ते में मिलने वाला ठंडा पानी और नींबू पानी उनकी थकान कम करने में मदद करता है। कई यात्रियों के लिए यह सेवा यात्रा की यादों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाती है।

खुद शुगर की बीमारी से जूझते हुए भी सेवा

विजय सिंह कच्छवाह की सेवा इसलिए भी प्रेरणादायक है क्योंकि वे स्वयं शुगर की बीमारी से पीड़ित हैं। इसके बावजूद उन्होंने सेवा के अपने संकल्प को कभी बीमारी के सामने कमजोर नहीं पड़ने दिया। भाद्रपद मास आते ही वे अपनी दिनचर्या को सेवा के अनुरूप ढाल लेते हैं और यात्रियों की मदद के लिए निकल पड़ते हैं।

आज जब व्यक्ति अपने स्वास्थ्य, काम और निजी जिम्मेदारियों के बीच स्वयं के लिए समय निकालने में कठिनाई महसूस करता है, ऐसे समय में विजय सिंह का लगातार 26 वर्षों तक एक ही सेवा कार्य को निभाना अपने आप में उल्लेखनीय है। उन्होंने सेवा को किसी अवसर विशेष का कार्यक्रम नहीं बनाया, बल्कि उसे अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लिया है।

समाजसेवी मंजू गहलोत ने बताया जीवंत मिसाल

समाजसेवी मंजू गहलोत विजय सिंह कच्छवाह की सेवा भावना को मानवता की जीवंत मिसाल मानती हैं। उनका कहना है कि विजय सिंह पिछले 26 वर्षों से लगातार बाबा रामदेव के जातरुओं की सेवा कर रहे हैं। वे भाद्रपद मास में अपना काम-धंधा छोड़कर करीब एक महीने तक सेवा कार्य में जुट जाते हैं।

मंजू गहलोत के अनुसार, विजय सिंह जोधपुर से रामदेवरा तक अपनी गाड़ी में जल और नींबू पानी लेकर जाते हैं तथा रास्ते में पैदल यात्रियों और राहगीरों को पानी पिलाते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि यह कार्य किसी प्रचार या प्रसिद्धि के लिए नहीं किया जा रहा, बल्कि श्रद्धालुओं की सेवा और आत्मिक संतुष्टि के लिए किया जा रहा है।

सेवा में नहीं देखते उम्र, सुविधा या परेशानी

सेवा कार्य में सबसे बड़ी चुनौती निरंतरता होती है। किसी एक दिन उत्साह के साथ सेवा करना आसान हो सकता है, लेकिन 26 वर्षों तक हर भाद्रपद मास में उसी भावना के साथ सेवा करना असाधारण प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

विजय सिंह कच्छवाह के लिए यह सेवा अब परंपरा बन चुकी है। भाद्रपद मास शुरू होते ही उनके सामने एक ही उद्देश्य रहता है—बाबा रामदेव के दर्शन के लिए जाने वाले अधिक से अधिक यात्रियों को रास्ते में पानी और नींबू पानी उपलब्ध करवाना।

इस दौरान मौसम की गर्मी, यात्रा की थकान और स्वयं की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी उनके संकल्प के रास्ते में बाधा नहीं बनतीं। वे अपनी क्षमता के अनुसार सेवा जारी रखते हैं।

यात्रियों की थकान में राहत बनता है एक गिलास पानी

बाबा रामदेव की पैदल यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए कई किलोमीटर का सफर आसान नहीं होता। लंबे रास्ते, गर्मी, धूल और लगातार पैदल चलने के कारण यात्रियों को पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। ऐसे में रास्ते में यदि कोई व्यक्ति ठंडा पानी और नींबू पानी लेकर खड़ा मिल जाए तो उसकी सेवा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

विजय सिंह इसी जरूरत को समझते हैं। उनके लिए एक यात्री को पानी पिलाना कोई छोटा काम नहीं है। वे मानते हैं कि किसी प्यासे व्यक्ति को पानी उपलब्ध करवाना मानवता की सबसे सहज और महत्वपूर्ण सेवाओं में से एक है।

26 साल की सेवा बनी प्रेरणा

विजय सिंह कच्छवाह की कहानी केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि यह समाज को यह संदेश देती है कि सेवा के लिए बड़े साधनों से ज्यादा जरूरी बड़ी भावना होती है। कोई व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार छोटा-सा काम शुरू करके भी वर्षों तक उसे जारी रखे तो वही काम समाज के लिए प्रेरणा बन सकता है।

26 वर्षों की यह सेवा यात्रा बताती है कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए हमेशा बड़ी घोषणाओं की जरूरत नहीं होती। कभी-कभी एक गिलास ठंडा पानी भी किसी थके हुए यात्री के लिए बहुत बड़ी मदद बन जाता है।

सेवा से मिलती है आत्मिक संतुष्टि

मंजू गहलोत के अनुसार, विजय सिंह कच्छवाह द्वारा रामदेवरा जाने वाले पैदल यात्रियों के लिए किया जा रहा यह सेवा कार्य उन्हें आत्मिक संतुष्टि देता है। यही आत्मिक संतुष्टि उनके सेवा संकल्प को लगातार मजबूत करती है।

विजय सिंह ने सेवा को किसी पुरस्कार, सम्मान या प्रशंसा से नहीं जोड़ा। उनके लिए किसी यात्री की प्यास बुझाना और उसके चेहरे पर राहत देखना ही सबसे बड़ा संतोष है। यही भावना उन्हें हर वर्ष भाद्रपद मास में फिर उसी रास्ते पर खींच लाती है।

समाज के लिए संदेश—सेवा की शुरुआत अपने स्तर से करें

विजय सिंह कच्छवाह की 26 वर्ष की सेवा यात्रा समाज के सामने एक सरल लेकिन प्रभावी संदेश रखती है—सेवा करने के लिए बहुत बड़ा होना जरूरी नहीं, सेवा की भावना बड़ी होना जरूरी है।

कोई व्यक्ति पानी पिलाकर, कोई भोजन करवाकर, कोई पौधा लगाकर, कोई बीमार की मदद करके और कोई जरूरतमंद विद्यार्थी की सहायता करके मानवता की सेवा कर सकता है। महत्वपूर्ण यह है कि सेवा केवल एक दिन की गतिविधि न बने, बल्कि जीवन का हिस्सा बने।

भाद्रपद मास में बाबा रामदेव के जातरुओं की सेवा करने वाले विजय सिंह कच्छवाह ने इसी भावना को 26 वर्षों से जीवित रखा है। उनके हाथों से दिया गया एक गिलास शीतल जल और नींबू पानी शायद देखने में छोटी सेवा हो, लेकिन हजारों यात्रियों के लिए वह राहत, अपनापन और मानवता का संदेश लेकर आता है।

विजय सिंह की यह 26 साल की सेवा यात्रा यही बताती है कि इंसान की पहचान केवल उसके काम-धंधे या उपलब्धियों से नहीं, बल्कि इस बात से भी होती है कि उसने अपने जीवन में कितने लोगों की प्यास बुझाई और कितने चेहरों पर राहत की मुस्कान लाई।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor