आनंद एम. वासु. मुंबई
देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE), अपने आगामी आईपीओ (IPO) को लेकर एक अनोखी रणनीति पर काम कर रहा है। नियामक नियमों के कारण कोई भी एक्सचेंज खुद के प्लेटफॉर्म पर लिस्ट नहीं हो सकता, इसलिए NSE के शेयर प्रतिद्वंद्वी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्ट किए जाएंगे। हालांकि, निवेशकों को आकर्षित करने के लिए एक्सचेंज एक ऐसी व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहा है जिससे इसके शेयरों की खरीद-बिक्री खुद NSE के प्लेटफॉर्म पर भी की जा सके।
मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) फिलहाल इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है। इसे तकनीकी भाषा में ‘परमिटेड-टू-ट्रेड’ (PTT) फ्रेमवर्क कहा जाता है।
क्या है यह नया फॉर्मूला?
सरल शब्दों में कहें तो, कानूनी तौर पर NSE की लिस्टिंग BSE पर ही होगी। कागजी कार्रवाई, नियम-कानूनों का पालन और कंपनी से जुड़ी हर छोटी-बड़ी घोषणाएं BSE के पास ही जमा होंगी। लेकिन, इस विशेष PTT नियम के लागू होने से निवेशकों को यह सहूलियत मिलेगी कि वे NSE के ऐप या ब्रोकर के जरिए भी इन शेयरों का सौदा कर सकेंगे।
यह कोई नया नियम नहीं है; वर्तमान में भी करीब 250 ऐसी कंपनियां हैं जो लिस्टेड तो किसी और एक्सचेंज पर हैं, लेकिन उन्हें NSE पर ट्रेड करने की अनुमति मिली हुई है।
निफ्टी (Nifty) में एंट्री का खुलेगा रास्ता
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि NSE अपने शेयरों की ट्रेडिंग अपने प्लेटफॉर्म पर इसलिए भी चाहता है ताकि भविष्य में इसके शेयर ‘निफ्टी इंडेक्स’ का हिस्सा बन सकें। इंडेक्स में शामिल होने के लिए स्टॉक का अपने होम प्लेटफॉर्म पर पर्याप्त मात्रा में ट्रेड होना जरूरी होता है।
BSE के शेयरों को लग सकता है झटका
इस खबर का सीधा असर शेयर बाजार में BSE के स्टॉक पर देखने को मिल सकता है। अब तक निवेशकों को उम्मीद थी कि NSE के लिस्ट होने के बाद उसकी ट्रेडिंग का 100% वॉल्यूम और ब्रोकरेज केवल BSE की जेब में जाएगा। लेकिन अगर सेबी इस नए फॉर्मूले को मंजूरी दे देता है, तो ट्रेडिंग का एक बड़ा हिस्सा NSE के पास ही रह जाएगा, जो BSE के वित्तीय सेंटिमेंट के लिए थोड़ा नकारात्मक साबित हो सकता है।
कब आ रहा है IPO?
सेबी से क्लीन चिट और अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) मिलने के बाद अब NSE का रास्ता साफ हो चुका है। एक्सचेंज की योजना सितंबर 2026 तक इस बहुप्रतीक्षित और देश के सबसे बड़े आईपीओ को बाजार में उतारने की है।

