कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थियों को उम्र व स्तर के अनुसार पांच समूहों में बांटकर कराई जाएंगी रचनात्मक और व्यावहारिक गतिविधियां
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए शनिवार का दिन अब पढ़ाई के पारंपरिक दबाव से अलग, सीखने और आनंददायक गतिविधियों के लिए समर्पित होगा। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से शनिवार को ‘जॉयफुल डे’ के रूप में मनाने की पहल की गई है। इसके तहत बच्चों को किताबों से इतर गतिविधियों के माध्यम से सीखने के अवसर दिए जाएंगे।
कार्यक्रम में कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थियों को उनकी उम्र और सीखने के स्तर के आधार पर पांच समूहों में विभाजित किया जाएगा। प्रत्येक समूह के लिए अलग-अलग गतिविधियां निर्धारित होंगी। इनमें कला, संगीत, खेल, विज्ञान, पर्यावरण, जीवन कौशल, करियर शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता जैसी गतिविधियों को शामिल किया गया है।
महीने में दो शनिवार गतिविधियों के लिए
‘जॉयफुल डे’ के तहत महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को विशेष गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। गतिविधियों के लिए करीब 60 मिनट का समय निर्धारित किया गया है। स्कूल अपने स्थानीय परिवेश और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार गतिविधियों का चयन कर सकेंगे।
स्थानीय व बेकार सामग्री से नवाचार
कार्यक्रम की खासियत यह होगी कि विद्यार्थियों को गतिविधियों में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध, पुन: उपयोग योग्य और कम लागत वाली सामग्री का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। पुराने समाचार-पत्र, अनुपयोगी कागज, बोतल, मिट्टी, लकड़ी की टहनियां और अन्य सामग्री से बच्चों को रचनात्मक कार्य कराए जा सकते हैं। इससे उनमें समूह भावना, समस्या समाधान, रचनात्मकता और संसाधनों के बेहतर उपयोग की समझ विकसित होगी।
शिक्षक निभाएंगे मार्गदर्शक की भूमिका
जॉयफुल डे में शिक्षक केवल पढ़ाने वाले की भूमिका में नहीं, बल्कि मार्गदर्शक और सहायक के रूप में काम करेंगे। कक्षा 9 से 12 के विद्यार्थियों के लिए करियर शिक्षा और मार्गदर्शन पर विशेष जोर रहेगा। विद्यार्थियों को विभिन्न करियर विकल्पों, उच्च शिक्षा, व्यावसायिक पाठ्यक्रमों और उपलब्ध संसाधनों की जानकारी दी जाएगी।
खेल, कला और विज्ञान से सीखने का अवसर
कार्यक्रम में खेल-कूद, कला, संगीत, विज्ञान और पर्यावरण से जुड़ी गतिविधियों को भी स्थान दिया गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में केवल किताबी ज्ञान बढ़ाना नहीं, बल्कि उनके रचनात्मक, सामाजिक, व्यावहारिक और भावनात्मक कौशल को विकसित करना है। शिक्षा विभाग की इस पहल से शनिवार को स्कूल का वातावरण अधिक गतिविधिपूर्ण और संवादात्मक बनाने की कोशिश की जा रही है, ताकि विद्यार्थी पढ़ाई के साथ-साथ अपने आसपास की दुनिया को अनुभवों और गतिविधियों के जरिए समझ सकें।


