रोजाना करीब 10 संदिग्ध मरीज पहुंच रहे फ्लू ओपीडी, सर्दी-जुकाम और बुखार जैसे लक्षणों से बढ़ी चिंता
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
शहर में बदलते मौसम के बीच स्वाइन फ्लू को लेकर लोगों में चिंता बढ़ रही है। फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीज बड़ी संख्या में अस्पतालों की फ्लू ओपीडी में पहुंच रहे हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड के अनुसार अब तक स्वाइन फ्लू का एक भी पॉजिटिव मामला सामने नहीं आया है।
जानकारी के अनुसार डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज व संबद्ध अस्पतालों की फ्लू ओपीडी में रोजाना करीब 10 संदिग्ध मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें तेज बुखार, गले में खराश, लगातार खांसी, जुकाम और शरीर में दर्द जैसी शिकायतें प्रमुख हैं। इन लक्षणों के कारण मरीजों और उनके परिजनों में स्वाइन फ्लू को लेकर आशंका बनी हुई है।
60 से अधिक लोगों की सैंपल जांच
स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन की ओर से संदिग्ध मरीजों की जांच की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार अब तक 60 से अधिक लोगों के सैंपल की जांच की जा चुकी है, लेकिन इनमें स्वाइन फ्लू की पुष्टि नहीं हुई है। चिकित्सकों का कहना है कि मौसम में बदलाव के दौरान वायरल संक्रमण और सामान्य फ्लू के मामले भी बढ़ जाते हैं, जिनके लक्षण स्वाइन फ्लू से मिलते-जुलते हो सकते हैं।
मौसम बदलने से वायरल संक्रमण का खतरा
चिकित्सकों के मुताबिक मौसम में बदलाव के साथ वायरल संक्रमण बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में सर्दी, खांसी, बुखार या गले में खराश होने पर घबराने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। विशेष रूप से बुजुर्गों, छोटे बच्चों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को संक्रमण से बचाव के प्रति अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।
ये हैं स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण
अचानक तेज बुखार आना
लगातार खांसी और गले में खराश
नाक बहना या जुकाम
शरीर व मांसपेशियों में दर्द
अत्यधिक थकान व सिरदर्द
गंभीर स्थिति में सांस लेने में तकलीफ
बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय
मास्क का उपयोग, नियमित रूप से हाथ धोना, भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सावधानी बरतना और खांसते-छींकते समय मुंह-नाक ढकना संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। पर्याप्त पानी पीना और पौष्टिक भोजन लेना भी जरूरी है। लक्षण बढ़ने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा लेने के बजाय डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल लक्षणों के आधार पर स्वाइन फ्लू मान लेना सही नहीं है। जांच रिपोर्ट और चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद ही बीमारी की पुष्टि की जा सकती है।
