जटिल रक्तवाहिनी विकार का बिना ओपन सर्जरी किया उपचार, मरीज को मिली नई जिंदगी
दिलीप कुमार पुरोहित. जोधपुर
डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एमडीएम अस्पताल में न्यूरो-इंटरवेंशन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। अस्पताल में पहली बार आधुनिक WEB डिवाइस की सहायता से ब्रेन एन्यूरिज्म का सफल उपचार किया गया। खास बात यह रही कि मरीज का इलाज पारंपरिक ओपन ब्रेन सर्जरी के बजाय न्यूनतम इनवेसिव इंटरवेंशनल तकनीक से किया गया।
जानकारी के अनुसार मरीज के मस्तिष्क की रक्तवाहिनी में जटिल विकार पाया गया था। ऐसे मामलों में रक्तवाहिनी की कमजोर जगह पर बने एन्यूरिज्म के फटने की आशंका रहती है, जिससे गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। मरीज के लिए उपचार की उपयुक्त प्रक्रिया तय करने के बाद विशेषज्ञों ने आधुनिक WEB डिवाइस के माध्यम से उपचार करने का निर्णय लिया।
बिना ओपन सर्जरी किया गया उपचार
WEB डिवाइस एक विशेष प्रकार का उपकरण है, जिसे रक्तवाहिनी के भीतर कैथेटर के माध्यम से एन्यूरिज्म तक पहुंचाया जाता है। इसका उद्देश्य एन्यूरिज्म के भीतर रक्त के प्रवाह को नियंत्रित कर उसे बंद करने में मदद करना होता है। इस प्रक्रिया में खोपड़ी खोलने वाली पारंपरिक ओपन सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती। अस्पताल के विशेषज्ञों के अनुसार इस तकनीक से जटिल एन्यूरिज्म के उपचार में नई संभावनाएं खुली हैं। मरीज की स्थिति पर उपचार के बाद चिकित्सकीय निगरानी रखी गई और प्रक्रिया सफल रही।
विशेषज्ञों का सम्मेलन भी आयोजित
अस्पताल में न्यूरो-इंटरवेंशन से जुड़े विषय पर वार्षिक सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आए विशेषज्ञों ने न्यूरो-इंटरवेंशन की आधुनिक तकनीकों और जटिल मामलों के उपचार पर चर्चा की। सम्मेलन में लाइव प्रक्रियाओं तथा नई उपचार तकनीकों के बारे में भी जानकारी साझा की गई।
क्या है WEB डिवाइस?
WEB डिवाइस विशेष रूप से मस्तिष्क की रक्तवाहिनियों में बनने वाले कुछ प्रकार के एन्यूरिज्म के उपचार के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला उपकरण है। इसे कैथेटर के जरिए रक्तवाहिनी के रास्ते प्रभावित स्थान तक पहुंचाया जाता है। इसका इस्तेमाल मरीज की स्थिति और एन्यूरिज्म की बनावट के आधार पर विशेषज्ञ चिकित्सकों के निर्णय से किया जाता है। एमडीएम अस्पताल में इस तकनीक से सफल उपचार को न्यूरो-इंटरवेंशन सेवाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे जटिल रक्तवाहिनी विकार से पीड़ित चुनिंदा मरीजों को भविष्य में आधुनिक और कम इनवेसिव उपचार का विकल्प मिल सकेगा।
