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Wednesday, September 16, 2026, 2:24 pm

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श्राद्ध पक्ष 26 सितंबर से, 30 सितंबर को चतुर्थी-पंचमी का श्राद्ध एक साथ

15 दिन चलेगा श्राद्ध पक्ष, 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या पर होगा समापन

राइजिंग भास्कर. जोधपुर

पितरों को श्रद्धांजलि और तर्पण का पर्व श्राद्ध पक्ष इस वर्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलेगा। भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होने वाले श्राद्ध पक्ष का समापन सर्वपितृ अमावस्या के श्राद्ध के साथ होगा। इस दौरान लोग अपने पितरों की स्मृति में तर्पण, पिंडदान, दान-पुण्य, ब्राह्मण भोज और जरूरतमंदों की सेवा जैसे धार्मिक कार्य करेंगे।

पंचांग के अनुसार 26 सितंबर को पूर्णिमा का श्राद्ध होगा। इसके बाद 27 सितंबर को प्रतिपदा, 28 सितंबर को द्वितीया और 29 सितंबर को तृतीया का श्राद्ध किया जाएगा। 30 सितंबर को चतुर्थी और पंचमी तिथि का श्राद्ध एक ही दिन किया जाएगा। इसके बाद 1 अक्टूबर को षष्ठी-छठ, 2 अक्टूबर को सप्तमी, 3 अक्टूबर को अष्टमी, 4 अक्टूबर को नवमी, 5 अक्टूबर को दशमी, 6 अक्टूबर को एकादशी, 7 अक्टूबर को द्वादशी, 8 अक्टूबर को त्रयोदशी और 9 अक्टूबर को चतुर्दशी का श्राद्ध होगा। 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ श्राद्ध पक्ष का समापन होगा।

धार्मिक मान्यता के अनुसार श्राद्ध पक्ष पितरों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और स्मरण व्यक्त करने का अवसर माना जाता है। इस अवधि में लोग अपने पूर्वजों के निमित्त पूजा-अर्चना और तर्पण करते हैं। मान्यता है कि श्राद्ध कर्म के माध्यम से पितरों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की जाती है।

इन मंत्रों का करें जाप

पितरों का तर्पण करते समय ‘ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः’ का जाप किया जा सकता है। पितरों की शांति के लिए ‘ॐ श्राद्धकृत् पितामहे स्वधा पितृभ्यः’ तथा पितृ दोष निवारण के लिए ‘ॐ सर्व पितृ देवताभ्यो नमः’ का जाप करने की मान्यता है।
श्राद्ध पक्ष के दौरान अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य, ब्राह्मण भोजन और जरूरतमंदों की सेवा करने की परंपरा भी है। विशेष रूप से सर्वपितृ अमावस्या को उन पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध किया जाता है, जिनकी श्राद्ध तिथि ज्ञात नहीं हो या जिनका श्राद्ध किसी कारण से नहीं किया जा सका हो।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor