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Friday, October 2, 2026, 10:55 am

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Lifestyle

पांच साल में भी नहीं सुधरा पानी का सिस्टम, मानसून के बाद भी संकट जारी रहने के आसार

20 दिन में एक बार शटडाउन से शुरू हुआ सिलसिला अब हर पांच दिन में पहुंचा, शहर के कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति प्रभावित

जोधपुर। मानसून की विदाई के बाद भी शहर में पेयजल संकट खत्म होने के बजाय जारी रहने की आशंका है। पानी की व्यवस्था में पिछले कई वर्षों से चली आ रही खामियों के कारण लोगों को नियमित जलापूर्ति के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि जिस व्यवस्था में पहले करीब 20 दिन में एक बार शटडाउन लिया जाता था, अब शटडाउन का अंतर घटकर लगभग पांच दिन तक पहुंच गया है।

दो साल में और ज्यादा खराब हुई व्यवस्था

रिपोर्ट के अनुसार शहर में पिछले दो वर्षों के दौरान पेयजल व्यवस्था की स्थिति और बिगड़ी है। शटडाउन के दौरान जलापूर्ति प्रभावित होने के कारण कई क्षेत्रों के लोगों को अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ती है। पानी की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था में सुधार के दावों के बावजूद समस्या पूरी तरह दूर नहीं हो पाई है।

शटडाउन का अंतर लगातार घटा

पानी की व्यवस्था में बार-बार शटडाउन होने से लोगों की परेशानी बढ़ रही है। पहले जहां करीब 20 दिन में एक बार शटडाउन होता था, वहीं बाद में इसका अंतर घटकर करीब 15 दिन और फिर 10 दिन तक पहुंच गया। अब कई जगहों पर पांच दिन के अंतराल में ही शटडाउन की स्थिति सामने आ रही है।

गर्मी के साथ बढ़ती है परेशानी

गर्मी के मौसम में पानी की मांग बढ़ने के साथ यह समस्या और गंभीर हो जाती है। मानसून के दौरान जलस्रोतों में पानी की आवक होने के बावजूद यदि वितरण तंत्र में तकनीकी और प्रबंधन संबंधी कमियां बनी रहती हैं, तो इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी असर

पानी की समस्या का असर केवल शहर तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी पेयजल व्यवस्था प्रभावित होने की बात सामने आई है। जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर जल कनेक्शन उपलब्ध कराने की योजना के बावजूद कई स्थानों पर नियमित जलापूर्ति से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।

पांच साल में भी नहीं हुआ स्थायी सुधार

सबसे बड़ा सवाल यह है कि लंबे समय से सामने आ रही पेयजल व्यवस्था की समस्याओं का स्थायी समाधान अब तक क्यों नहीं हो पाया। बार-बार शटडाउन और जलापूर्ति में व्यवधान से स्पष्ट है कि केवल तत्काल व्यवस्था करने के बजाय जल वितरण तंत्र की स्थायी कमियों को दूर करने की आवश्यकता है। लोगों को उम्मीद है कि मानसून के बाद संबंधित विभाग व्यवस्था की समीक्षा कर लंबे समय से चली आ रही समस्या का स्थायी समाधान करेगा।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor