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Friday, October 2, 2026, 10:53 am

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तुम्हारे बिना नहीं रह सकता’ से आगे की सोच: पति-पत्नी एक-दूसरे को आत्मनिर्भर बनाएं

उम्र बढ़ने के साथ बदलती जरूरतों को समझना जरूरी, डिजिटल बैंकिंग से लेकर आपातकालीन सेवाओं तक हर जरूरी काम की जानकारी दोनों के पास हो

राइजिंग भास्कर डेस्क। नई दिल्ली

पति-पत्नी का रिश्ता जीवनभर एक-दूसरे के साथ, विश्वास और सहयोग पर टिका होता है। दोनों एक-दूसरे की जरूरतों को समझते हुए जीवन की जिम्मेदारियां साझा करते हैं। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ परिस्थितियां बदलने लगती हैं। बच्चे अपने करियर और परिवार के साथ दूसरे शहरों या विदेशों में बस जाते हैं। ऐसे में पति-पत्नी के लिए एक-दूसरे का साथ और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

इसी बीच एक सवाल ऐसा है, जिस पर हर दंपती को समय रहते विचार करना चाहिए—अगर किसी दिन हम दोनों में से कोई एक साथ नहीं रहा तो दूसरा अपने जरूरी काम खुद कितनी आसानी से संभाल पाएगा?

एक भावपूर्ण कहानी इसी सवाल को सामने रखती है। कहानी में पत्नी पति से पूछती है कि यदि उसे कुछ हो गया तो पति अकेले कैसे रहेंगे। पति का जवाब केवल भावुक नहीं, बल्कि जीवन की एक व्यावहारिक सच्चाई सामने रखता है। वह कहता है कि चिंता केवल इस बात की नहीं होनी चाहिए कि जीवनसाथी के जाने के बाद हम कैसे रहेंगे, बल्कि यह भी सोचना चाहिए कि हम अपने जीवनसाथी को इतना सक्षम कैसे बनाएं कि वह हमारे न रहने पर भी जीवन की जरूरी जिम्मेदारियां संभाल सके।

‘तुम हो न’ की आदत कभी-कभी बन सकती है कमजोरी

विवाह के बाद कई दंपती धीरे-धीरे जिम्मेदारियां बांट लेते हैं। घर के कुछ काम पति संभालते हैं तो कुछ पत्नी। बैंकिंग, बिल भुगतान, ऑनलाइन लेन-देन, निवेश या बीमा जैसे काम अक्सर परिवार के किसी एक सदस्य के जिम्मे रह जाते हैं। समस्या तब सामने आ सकती है जब जिस व्यक्ति को किसी काम की पूरी जानकारी थी, वह अचानक उपलब्ध न हो। इसलिए यह जरूरी है कि पति-पत्नी एक-दूसरे से यह न कहें कि ‘तुम हो न, तुम सब संभाल लोगे’ बल्कि यह भी सुनिश्चित करें कि दोनों को कम से कम आवश्यक कामों की जानकारी हो।

डिजिटल दौर में तकनीकी जानकारी भी जरूरी

आज जीवन के अनेक काम मोबाइल फोन से किए जा सकते हैं। बैंकिंग से लेकर बिल भुगतान और पैसे भेजने तक कई सुविधाएं डिजिटल हो चुकी हैं। ऐसे में पति-पत्नी दोनों को कम से कम बुनियादी डिजिटल कामों की जानकारी होनी चाहिए। उदाहरण के लिए—

  • UPI से भुगतान कैसे किया जाता है।
  • बैंक खाते की सामान्य जानकारी कहां उपलब्ध है।
  • मोबाइल रिचार्ज कैसे करना है।
  • बिजली या अन्य जरूरी बिल कैसे जमा करना है।
  • ऑनलाइन बैंकिंग का सुरक्षित इस्तेमाल कैसे करना है।
  • आवश्यक होने पर बच्चों या रिश्तेदारों को वीडियो कॉल कैसे करनी है।
  • WhatsApp पर अपनी लोकेशन कैसे साझा करनी है।
  • Google Maps के जरिए किसी स्थान की जानकारी कैसे भेजनी है।

हालांकि डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करते समय OTP, PIN, पासवर्ड और बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति से साझा नहीं करनी चाहिए।

आपातकाल में घबराहट के बजाय तैयारी काम आती है

आपातकाल ऐसी स्थिति होती है, जब व्यक्ति घबराहट में सामान्य बातें भी भूल सकता है। इसलिए जरूरी है कि परिवार के दोनों सदस्यों को आपातकालीन संपर्कों की जानकारी पहले से हो। किसी बीमारी या दुर्घटना जैसी स्थिति में किस अस्पताल से संपर्क करना है, डॉक्टर का नंबर क्या है, परिवार के बच्चों का नंबर कहां सेव है और एंबुलेंस जैसी सेवाओं से कैसे संपर्क करना है—इन बातों की जानकारी दोनों के पास होनी चाहिए। जरूरी फोन नंबरों की एक सूची मोबाइल के साथ-साथ किसी सुरक्षित स्थान पर लिखकर रखना भी उपयोगी हो सकता है।

बीमा और मेडिकल दस्तावेज की जानकारी दोनों को हो

अक्सर परिवार में बीमा पॉलिसी, स्वास्थ्य बीमा, मेडिकल रिकॉर्ड और डॉक्टर से जुड़ी जानकारी किसी एक सदस्य के पास रहती है। पति-पत्नी दोनों को यह पता होना चाहिए कि स्वास्थ्य बीमा से संबंधित दस्तावेज कहां रखे हैं, संबंधित पॉलिसी की जानकारी क्या है और जरूरत पड़ने पर किससे संपर्क करना है। इसी तरह महत्वपूर्ण मेडिकल रिपोर्ट, नियमित दवाइयों की जानकारी और डॉक्टर के संपर्क विवरण व्यवस्थित रखना उपयोगी हो सकता है।

बैंक खाते और निवेश की जानकारी भी साझा हो

परिवार की आर्थिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जानकारी बहुत जरूरी है। दोनों को कम से कम यह जानकारी होनी चाहिए कि बैंक खाते कहां हैं और जरूरी वित्तीय दस्तावेज कहां सुरक्षित रखे गए हैं। यदि परिवार में एफडी, निवेश या अन्य जमा राशि है तो उसकी सामान्य जानकारी भी दोनों के पास होनी चाहिए। महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से रखना चाहिए। इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति को वित्तीय विशेषज्ञ बनना जरूरी है। उद्देश्य केवल इतना है कि किसी एक सदस्य की अनुपस्थिति में दूसरा व्यक्ति जरूरी जानकारी के लिए पूरी तरह किसी और पर निर्भर न रहे।

घर के काम भी दोनों को आने चाहिए

आत्मनिर्भरता केवल बैंकिंग और तकनीक तक सीमित नहीं है। रोजमर्रा के घरेलू कामों की जानकारी भी जरूरी है। खाना गर्म करना या बनाना, गैस सिलेंडर बुक करना, बिजली-पानी से जुड़े जरूरी काम समझना, घर की आवश्यक वस्तुओं की जानकारी रखना और दवाइयों की व्यवस्था जानना—ये सभी छोटे लेकिन महत्वपूर्ण कौशल हैं। पति-पत्नी एक-दूसरे को ये काम सिखाकर न केवल एक-दूसरे की मदद कर सकते हैं, बल्कि भविष्य की अनिश्चित परिस्थितियों के लिए भी खुद को तैयार कर सकते हैं।

महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जानकारी रखें

आधार, पैन, बैंक से जुड़े दस्तावेज, बीमा संबंधी कागजात, संपत्ति के दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड सुरक्षित स्थान पर व्यवस्थित होने चाहिए। दोनों जीवनसाथियों को यह पता होना चाहिए कि ये दस्तावेज कहां रखे हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें कैसे प्राप्त किया जा सकता है। डिजिटल दस्तावेजों के मामले में भी सुरक्षित पासवर्ड प्रबंधन और विश्वसनीय बैकअप की व्यवस्था रखना उपयोगी हो सकता है।

बच्चों से जुड़े रहना भी जरूरी

आज बहुत से परिवारों में बच्चे नौकरी या पढ़ाई के कारण दूसरे शहरों अथवा विदेशों में रहते हैं। दूरी के बावजूद नियमित संपर्क बनाए रखना महत्वपूर्ण है। वीडियो कॉल, फोन और मैसेज के माध्यम से बच्चों से संपर्क में रहना भावनात्मक रूप से भी सहायक होता है और आवश्यकता पड़ने पर परिवार के सदस्यों को एक-दूसरे की स्थिति समझने में मदद मिलती है। लेकिन बच्चों के दूर रहने का अर्थ यह नहीं कि पति-पत्नी अपनी हर छोटी-बड़ी जिम्मेदारी उन पर छोड़ दें। बेहतर है कि दोनों अपनी क्षमता के अनुसार स्वयं भी जरूरी काम संभालना सीखें।

एक-दूसरे पर भरोसा भी, एक-दूसरे को सक्षम बनाना भी

पति-पत्नी का रिश्ता एक-दूसरे का सहारा बनने का रिश्ता है। लेकिन सच्चा साथ केवल इस बात में नहीं है कि दोनों हर काम एक-दूसरे के लिए करते रहें। इसमें यह भी शामिल है कि दोनों एक-दूसरे को सक्षम बनाएं। पति पत्नी से कह सकता है—“तुम मुझे डिजिटल भुगतान सिखाओ, मैं तुम्हें बैंकिंग की जानकारी दूंगा।” पत्नी कह सकती है—“तुम घर के कुछ काम सीखो, मैं तुम्हें जरूरी दस्तावेजों और बीमा की जानकारी बताती हूं।” इस तरह दोनों धीरे-धीरे एक-दूसरे की क्षमताओं को बढ़ा सकते हैं।

प्यार के साथ आत्मनिर्भरता भी जरूरी

जीवनसाथी से यह कहना कि “मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता/सकती” प्यार और भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है। लेकिन जीवन की समझ यह भी सिखाती है कि परिस्थितियां हमेशा हमारे नियंत्रण में नहीं होतीं। इसलिए बेहतर है कि पति-पत्नी साथ रहते हुए एक-दूसरे को इतना सक्षम बनाएं कि किसी कठिन परिस्थिति में दूसरा व्यक्ति पूरी तरह टूटने के बजाय जरूरी जिम्मेदारियां संभाल सके। साथ रहना प्रेम है, एक-दूसरे का सहारा बनना विश्वास है और एक-दूसरे को सक्षम बनाना जीवन की समझ है।

आज ही करें ये छोटे-छोटे काम

पति-पत्नी चाहें तो आज से कुछ सरल कदम शुरू कर सकते हैं—

  1. एक-दूसरे को मोबाइल की जरूरी सुविधाएं सिखाएं।
  2. जरूरी बैंकिंग और UPI प्रक्रिया की जानकारी साझा करें।
  3. महत्वपूर्ण दस्तावेजों का सुरक्षित स्थान दोनों को पता हो।
  4. आपातकालीन संपर्क नंबर दोनों के फोन में सेव हों।
  5. स्वास्थ्य बीमा और मेडिकल रिकॉर्ड की जानकारी दोनों के पास हो।
  6. घर के जरूरी काम दोनों सीखें।
  7. बच्चों और करीबी रिश्तेदारों के संपर्क नंबर व्यवस्थित रखें।
  8. जरूरी जानकारी का सुरक्षित बैकअप रखें।
  9. डिजिटल सुरक्षा के नियमों का पालन करें।
  10. सबसे महत्वपूर्ण—एक-दूसरे से बातचीत करते रहें और जिम्मेदारियां साझा करें।

क्योंकि जीवन की कोई गारंटी नहीं है। लेकिन तैयारी हमारे हाथ में है। “मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता”—यह प्रेम है।
“तुम्हारे बिना भी मैं संभल सकता हूं”—यह जीवन की समझ है। और “जब तक तुम मेरे साथ हो, मैं तुम्हारे साथ हूं”—यही सच्ची जीवन-संगति है।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor