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Friday, April 17, 2026, 7:53 am

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संजीदा खानम शाहीन की कविता

प्रकृति के रंग

प्रकृति के अनेक रंग एक छांव
एक धूप के संग इस तरह
ही जिंदगी की जंग को लड़ना ।
रोता हुआ जंगल है हाहाकार है
पेड़ की सुरक्षा करना नित्य
काम हो हमारा पेड़ को बच्चों
की तरह पाला जाए सींचा जाए
देखभाल की जाए पेड़ सजीव
है खाना पीना और हवा पेड़ों
को भी जरूरत होती
पेड़ मत काँटो मत काँटो पेड़ों
को पेड़ जीवन का आधार है
पेड़ वरदान है पेड़ दोस्त, मित्र है
पेड़ प्रकृती की शान है
पेड़ है तो पानी हवा आबाद हैं
पेड़ है तो बारिश है, पेड़ है
तो फसले धानी है
पेड़ है तो फल, फूल,
सब्ज़ी हरियल बाग़ बागान हैं
पेड़ से छाया पेड़ से
काया पेड़ हिफाजत जीवनदान है
पेड़ से ऑक्सिजन मिलती
पेड़ से दवाईया बनती।
पेड़ से ईधन है जडी-बूटी है
पेड़ कटोगे तो हा- हा कार है
फिर न कहना जीवन निराकार है
पेड़ों को बचाओ, जीवन को
बचाओ नये-नये पेड़ रोपो
जीवन की तक़लीफो को रोको ।

मौलिक ,,स्वरचित रचना
डॉ संजीदा खानम’शाहीन

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor