संजीदा खानम शाहीन की कविता
प्रकृति के रंग प्रकृति के अनेक रंग एक छांव एक धूप के संग इस तरह ही जिंदगी की जंग को लड़ना । रोता हुआ जंगल है हाहाकार है पेड़ की सुरक्षा करना नित्य काम हो हमारा पेड़ को बच्चों की तरह पाला जाए सींचा जाए देखभाल की जाए पेड़ सजीव है खाना पीना और हवा … Read more