Explore

Search

Thursday, April 16, 2026, 4:53 am

Thursday, April 16, 2026, 4:53 am

LATEST NEWS
Lifestyle

मां त्रिशला के 14 स्वप्नों की भव्य झांकी से गूंजा श्री मुहताजी मंदिर प्रांगण

नागौरी गेट स्थित श्री मुहताजी मंदिर प्रांगण में हुआ आयोजन

राखी पुरोहित. जोधपुर 

नागौरी गेट स्थित श्री मुहताजी मंदिर प्रांगण का सुसज्जित हॉल उस समय अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहा था जब उसे भगवान महावीर के सांसारिक पिता महाराजा सिद्धार्थ और महारानी त्रिशला के महल की भांति आकर्षक फूलों एवं पौराणिक वस्तुओं से सजाया गया। वातावरण ढोल-नगाड़ों की गूंज से आलोकित हो उठा। “होशियार! बेखबर!! बेमूलाजिम!!! महाराजा साहब पधार रहे हैं…” की गर्जना होते ही जैसे ही राजा सिद्धार्थ और महारानी त्रिशला का प्रवेश हुआ, धर्मप्रेमी श्रद्धालु अपने-अपने स्थानों से उठकर उनका अभिवादन करने लगे।

प्रातः 9 बजे ओजस्वी प्रवचनकार साध्वी पीयूषपूर्णा श्रीजी मसा ने अपने मुखारविंद से भगवान महावीर जन्म से पूर्व महारानी त्रिशला को प्राप्त हुए 14 स्वप्नों की व्याख्या करते हुए कहा कि ये स्वप्न भगवान महावीर के भविष्य में महान पुरुष और जगत के तारणहार बनने के दिव्य संकेत थे। इसी क्रम में साध्वी अंजू मसा ने कहा कि इन स्वप्नों के अनुसार भगवान महावीर एक महान और शक्तिशाली आत्मा के रूप में अवतरित हुए, जिनके जीवन की साधना और उपलब्धियाँ मानव मात्र के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

इस भव्य आयोजन में श्री मुहताजी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष संजय मेहता और सचिव पवन मेहता ने बताया कि महाराजा सिद्धार्थ और महारानी त्रिशला की झांकी में किरदार श्रीमती मंजू संदीप मेहता दंपती ने बड़ी ही खूबसूरती से निभाया। वहीं इन्द्र-इन्द्राणी का रूप दंपती श्रीमती कंचन जसरूप लोढ़ा ने अभिनीत किया।
भगवान महावीर के जन्म को एक नए ढंग से विशेष तरीके से प्रस्तुत करने की पूर्ण रूपरेखा और निर्देशन पौराणिक टीवी सीरियल के निर्देशक वैभव मुहता और उनको सहयोग करने वाले सिद्धांत मुथा, आयुष मेहता, श्रीमती नीतू जैन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सचिव, श्री मुहताजी मंदिर ट्रस्ट, जोधपुर पवन मेहता ने बताया कि  करीब सात घंटे तक चले इस अलौकिक कार्यक्रम में चांदी की धातु से निर्मित 14 स्वप्नों के प्रतीक चिन्ह जब लाभार्थियों द्वारा संगीतमय धुन पर नाचते-झूमते हुए प्रविष्ट हुए, तो पूरा प्रांगण भक्ति की उमंग से भर गया। तीन आचार्यों को जन्म देने वाली 95 वर्षीय विख्यात साध्वी की सान्निध्य ने इस आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।
लोकप्रिय गायक सतपाल सिंह और उनकी ऑर्केस्टा द्वारा प्रस्तुत प्रभु-भक्ति के गीतों ने ऐसा वातावरण बनाया कि धर्मप्रेमी भावविभोर होकर ‘वन्स मोर… वन्स मोर…’ की गूंज करते रहे। इस अवसर पर उपस्थित सभी श्रद्धालुओं के लिए ट्रस्ट की ओर से सात्विक एवं आध्यात्मिकता से ओत-प्रोत भोजन की व्यवस्था की गई, जिसमें भक्तजन बड़ी श्रद्धा और आनंद से सहभागी बने।

 

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor