2012 में एसजीआई गल्फ द्वारा डॉ. शिहाब ग़ानिम के मार्गदर्शन में आरंभ की गई द पोएटिक हार्ट आज क्षेत्र की सबसे दीर्घकालिक सांस्कृतिक पहल में से एक बन चुकी है। यह मंच यूएई और विश्व के वरिष्ठ कवियों, संगीतकारों, विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा विशेष आवश्यकता वाले व्यक्तियों को एक साथ लाता है।
दिलीप कुमार पुरोहित. दुबई. यूएई
द पोएटिक हार्ट ने कविता, संगीत और सांस्कृतिक संवाद से परिपूर्ण दो समृद्ध दिनों के साथ अपने ऐतिहासिक 15वें संस्करण का सफलतापूर्वक समापन किया।
के बी व्यास ने बताया कि यह आयोजन कलात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से शांति, सद्भाव और साझा मानवता के मूल्यों को बढ़ावा देने की अपनी अटूट प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ करता है। 2012 में एसजीआई गल्फ द्वारा डॉ. शिहाब ग़ानिम के मार्गदर्शन में आरंभ की गई द पोएटिक हार्ट आज क्षेत्र की सबसे दीर्घकालिक सांस्कृतिक पहल में से एक बन चुकी है। यह मंच यूएई और विश्व के वरिष्ठ कवियों, संगीतकारों, विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा विशेष आवश्यकता वाले व्यक्तियों को एक साथ लाता है। पहला दिन एमिरेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़ाइनेंस (EIF) ऑडिटोरियम में आयोजित हुआ, जो युवाओं की ऊर्जा और सृजनात्मकता का जीवंत उदाहरण था। उत्साह से भरपूर तालियों और युवा स्वर की ऊर्जा से वातावरण सराबोर रहा।
इस वर्ष 41 माध्यमिक विद्यालयों के 900 विद्यार्थियों ने भाग लिया, जिनमें 43 विद्यार्थियों ने अपनी मौलिक कविताएँ प्रस्तुत कीं। विशेष आवश्यकता वाले प्रतिभागियों की तीन मार्मिक प्रस्तुतियाँ और चार संगीतमय प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत द पोएटिक हार्ट के 15 वर्षों की यात्रा को दर्शाने वाले स्मृति-वीडियो से हुई। उसके बाद सोका गक्काई के अध्यक्ष मिनोरू हरादा का संदेश प्रस्तुत किया गया, जिसे भारत सोका गक्काई के मानद उपाध्यक्ष डॉ. आकाश ओउची ने पढ़कर सुनाया। इस संदेश में डॉ. शिहाब ग़ानिम को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए डॉ. दाइसाकु इकेदा की उस दृष्टि को रेखांकित किया गया, जिसमें कविता को मानवता में “काव्यात्मक चेतना” के पुनर्जागरण का माध्यम माना गया है। कार्यक्रम में विद्यार्थियों की प्रेरक काव्य प्रस्तुतियों के साथ अबू धाबी विश्वविद्यालय की लियान अबूफरहा का संगीतमय योगदान भी शामिल रहा।
एक विशेष आकर्षण अमीराती द्विभाषी कवि वाएल अल सायेघ रहे, जिन्होंने कमल पुष्प से प्रेरित एक भावपूर्ण कविता प्रस्तुत की—जो परिवर्तन और जागरण का प्रतीक है। 2014 में गठित एसजीआई-गल्फ के नसीम कोरस ने “स्टेप फ़ॉरवर्ड” गीत प्रस्तुत किया, जो दृढ़ता और एकता का संदेश देता है। इसके बाद विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों की कविता, पियानो और ऊर्जावान नृत्य प्रस्तुतियों ने अपना गहरा प्रभाव छोड़ा। इस संगीतमय यात्रा को अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त वायलिन वादक एना पेटकोविच की मनोहारी प्रस्तुति ने आगे बढ़ाया, जिसमें कोल्डप्ले, वनरिपब्लिक सहित प्रसिद्ध धुनें शामिल थीं। दूसरा दिन ज़ाबील लेडीज़ क्लब में आयोजित हुआ, जहाँ शांति, सामंजस्य और आत्मचिंतन से आकार पाए प्रतिष्ठित काव्य स्वरों का उत्सव मनाया गया। इस सत्र में 11 वरिष्ठ कवि और पाँच संगीतमय प्रस्तुतियाँ शामिल रहीं।
संध्या का उद्घाटन एना पेटकोविच की वायलिन प्रस्तुति से हुआ, जिसके बाद यूएई में रहने वाले ब्रिटिश कवि मार्क फिड्डेस और अरब पत्रकार व कंटेंट क्रिएटर नजात अल फ़ारेस की काव्य-पाठ प्रस्तुतियाँ हुई।
एक विशेष खंड में डॉ. दाइसाकु इकेदा की साहित्यिक विरासत को सम्मानित किया गया, जहाँ एसजीआई-गल्फ के प्रतिनिधि आदित्य कौशिक ने उनकी कविताओं का पाठ किया।
संगीत और कविता का संगम पुनः तब हुआ जब नसीम कोरस ने रवींद्रनाथ ठाकुर (नोबेल पुरस्कार विजेता) की कालजयी रचना “संकोचेर बिह्वलता” प्रस्तुत की—जो भय पर विजय और दमन पर साहस को अपनाने का संदेश देती है। इसके बाद प्रो. डॉ. अलावी अल हाशमी (बहरीन), फ़ातेमा घटाली (ईरान), प्रो. वशिष्ठ अनूप (भारत) और यूएई के प्रतिष्ठित “प्रिंस ऑफ़ पोएट्स” के प्रथम विजेता करीम मातूक की सशक्त काव्य प्रस्तुतियाँ हुईं।
प्रोफ़ेसर अनूप वशिष्ठ जो कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग के विभागाध्यक्ष हैं और जिन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं उन्होंने अपनी ग़ज़लें सुनाई और हर दो पंक्तियों के बाद तालियों की गड़गड़ाहट सुनाई देती रही। उन्होंने अपनी ग़ज़लों में कहा कि-
बड़े दिख रहे हैं वे कंधों पे चढ़ के
जो सचमुच बड़े हैं वे झुककर खड़े है
और
अड़े है तो मंजिल की जिद में अड़े हैं
बहुत छोड़ कर ही हम आगे बढ़े हैं
उसके बाद संगीत के प्रमुख आकर्षणों में गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड धारक सुचेता सतीश की बहुभाषी प्रस्तुति हुई और वाडिया म्यूज़िक बैंड की सहर व मेलिका द्वारा डफ और सितार जैसे पारंपरिक फ़ारसी वाद्यों के साथ दी गई भावपूर्ण प्रस्तुति शामिल रही।
स्लोवाकिया के पीटर मिल्चाक, मिस्र के डॉ. अल-सैयद रमज़ान और भारत की गीता छाबड़ा सहित अंतरराष्ट्रीय स्वरों ने शांति, आपसी सामंजस्य, अपनत्व और साझा मानवता पर गहराई से प्रकाश डाला।
समापन में अत्यंत भावुक संगीतमय क्षण नसीम कोरस ने “हा हा यो (माँ)” प्रस्तुत किया—डॉ. दाइसाकु इकेदा की कविता, जिसका अरबी अनुवाद डॉ. शिहाब ग़ानिम ने किया था और इसे तीन भाषाओं में प्रस्तुत किया गया। यह प्रस्तुति मातृत्व की सार्वभौमिक करुणा और वात्सल्य शक्ति को समर्पित थी।
इस अवसर पर दो पुस्तकों का लोकार्पण भी हुआ—डॉ. शिहाब ग़ानिम की कृति का मराठी अनुवाद डॉ. नितिन उपाध्ये ने ‘ निवडक कविता’ में किया और इस पुस्तक का आवरण उनकी पत्नी डॉ. सीमा उपाध्ये द्वारा चित्रित किया गया तथा “ईच लाइन, अ न्यू डॉन”, जो कविता, संगीत और फ़ोटोग्राफ़ी के माध्यम से द पोएटिक हार्ट के 15 वर्षों का स्मरण कराती है, का भी लोकार्पण हुआ।
उत्सव का समापन स्वयं डॉ. शिहाब ग़ानिम के अंतिम काव्य-पाठ के साथ हुआ। इसके बाद सभी सहभागी कवियों और संगीतकारों को सम्मानित करते हुए ट्रॉफ़ी प्रदान की गईं, सामूहिक स्मृति-चित्र लिया गया और सांस्कृतिक सौहार्द व मित्रता के उत्सवस्वरूप समापन भोज आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम यूट्यूब पर देखा जा सकता है और सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर निम्नलिखित लिंक द्वारा फॉलो किया जा सकता है।










