बधाई हो पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश…आपने पुलिस को सद व्यवहार की ट्रेनिंग का नाटक जरूर किया, पर अपने ही आदमी को छोड़ कर साबित कर दिया कि जिस पर आपका हाथ हो फिर चाहे वह कैसा ही आरोपी हो उसका बाल बांका नहीं हो सकता…हमीर सिंह को बहाल करने के लिए बधाई…।
जोधपुर। एक वकील के साथ कथित दुर्व्यवहार करने और यह कहने की तेरा खोपड़ा खराब है क्या…डायलॉग से रातों-रात विलेन बन चुके निलंबित इंस्पेक्टर हमीर सिंह को पुलिस विभाग ने बहाल कर दिया है। अभी इस खबर की पुष्टि नहीं हो पाई है, मगर सोशल मीडिया और वकीलों के बीच चर्चा का विषय है। हाईकोर्ट में हमीर सिंह को लेकर क्या स्थिति है अभी पता नहीं चल पाया है। बहरहाल इतने बड़े मामले में हमीर सिंह का बहाल होना विभागीय जांय प्रणाली पर कड़ा तमाचा है। पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश ने कुछ दिनों तक नौटंकी की और पुलिस कर्मचारियों को आम जनता के साथ सद व्यवहार का पाठ पढ़ाया। जबकि पुलिस कमिश्ननर को खुद को पाठ पढ़ने की जरूरत है। अभी इस मामले को अधिक समय नहीं हुआ है।
पुलिस के चर्चित मामले में निलंबित किए गए इंस्पेक्टर हमीर सिंह को विभाग ने बहाल कर दिया है। कुछ दिन पूर्व कुड़ी थाना परिसर में एक एडवोकेट से बहस होने के कारण उन्हें निलंबित कर दिया गया था, जिसके बाद यह मामला काफी चर्चा में रहा। पुलिस विभाग के अनुसार घटना के बाद मामले की प्रारंभिक जांच करवाई गई थी। जांच रिपोर्ट और परिस्थितियों को देखते हुए उच्च अधिकारियों ने इंस्पेक्टर की बहाली के आदेश जारी किए हैं।
हमीर सिंह हो कोई तीर सिंह…जिसे बोलने की तमीज नहीं उसे पुलिस में रहने का कोई अधिकार नहीं…
हमीर सिंह हो या कोई तीर सिंह…जिसे बोलने की तमीज ना हो, जिसे किसी के साथ अच्छे व्यवहार की तमीज नहीं…उसे पुलिस में रहने का कोई अधिकार नहीं है। जब यह मामला मीडिया में उछला तब जोर-शोर से पुलिस को ट्रेनिंग देने की बात कही जा रही थी। खुद पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश हाईकोर्ट में पेश होकर भीगी बिल्ली बन गए थे, मगर जैसे ही मामला ठंडा हुआ, चुपचाप पीछे के रास्ते से हमीर सिंह को बहाल कर दिया गया। यह बहाली सही है या नहीं, यह बहस का मुद्दा नहीं है। सवाल यह है कि इतना विवाद ही खड़ा क्यों हुआ? अब अगर हमीर सिंह को बहाल कर दिया है तो अधिवक्तागण चुप क्यों हैं? एक समय अधिवक्तागण एकजुट होने का दम भर रहे थे और अब जबकि हमीर सिंह को बहाल कर दिया है तो अधिवक्ता कहां गए? क्या वह बस दिखावा भर था। सवाल यह नहीं है कि हमीर सिंह बहाल क्यों हुए? सवाल यह है कि हमीर सिंह जैसे लोग जब तक पुलिस विभाग में रहेंगे आम आदमी का जीना हराम हो जाएगा। ऐसे में पुलिस के आला अफसरों के सिस्टम पर अंगुली उठना स्वाभाविक है। हाईकोर्ट को इस प्रकरण को रिओपन कर दूध का दूध और पानी का पानी करना चाहिए? जनता जानना चाहेगी कि गलती वकील की थी या पुलिस इंस्पेक्टर की। मगर इस तरह इंस्पेक्टर की बहाली से सवाल उठता है कि आखिर यह नौटंकी किसके लिए की गई। क्या हंगामा करना ही हमारा मकसद रह गया है, या किसी परिणाम तक भी पहुंचा जाएगा।








