राइजिंग भास्कर. जोधपुर
22 नवंबर 2025 को दैनिक भास्कर जोधपुर के सीनियर सब एडिटर दिलीप कुमार पुरोहित द्वारा दैनिक भास्कर प्रबंधन और मालिकों को पक्षकार बनाते हुए मेलाफाइड इंटेंशन से अपने कोटा ट्रांसफर के विरोध में हाईकोर्ट को प्रार्थना-पत्र दिया गया था। यह पत्र कूॅरियर से भेजा गया था। मगर इसका आज दिन तक हाईकोर्ट ने कोई जवाब नहीं दिया और ना ही उस पर एक्शन लिया। गौरतलब है कि हाईकोर्ट को दिलीप कुमार पुरोहित ने कहा था कि वह अपने मामले में किसी वकील की मदद नहीं लेना चाहते और अपने मामले की पैरवी खुद करना चाहते हैं। इस तरह का अनुरोध करते हुए उन्होंने हाईकोर्ट से मेलाफाइंड इंटेंशन से किया कोटा ट्रांसफर रद्द करने और ट्रांसफर उनके गृह शहर जैसलमेर करने का अनुरोध किया था। गौरतलब है कि सहकर्मी मनोज कुमार पुरोहित द्वारा किए दुर्व्यवहार और मारने-मराने और अपमानजक टिप्पणियों से आहत होकर दिलीप कुमार पुरोहित पिछले छह माह से अधिक समय से अवकाश पर हैं। मगर न तो दिलीप कुमार पुरोहित का वेतन बनाया जा रहा है और न ही दिलीप कुमार पुरोहित के किसी पत्र का उत्तर दिया गया है। बाजार में यह अफवाह फैलाई जा रही है कि दिलीप कुमार पुरोहित ने भास्कर छोड़ दिया है।
उल्लेखनीय है कि दिलीप कुमार पुरोहित ने मनोज कुमार पुरोहित की शिकायत तत्कालीन स्थानीय संपादक कपिल भटनागर से भी की थी, मगर उन्होंने इस पर कोई एक्शन नहीं लिया। बाद में कपिल भटनागर स्टेट हैड बनकर भोपाल स्थानांतरित हो गए। उनके स्थान पर कोई अजय मिश्रा नाम के संपादक आए हैं, मगर उन्होंने भी दिलीप कुमार पुरोहित के किसी भी पत्र का जवाब देना उचित नहीं समझा। कपिल भटनागर अपने करीब तीन साल के जोधपुर कार्यकाल के दौरान कभी भी पूरे ऑफिस समय में ऑफिस में नहीं बैठे और शाम को मीटिंग लेकर फरार हो जाते थे। उनके ऑफिस से फरार होने के बाद ऑफिस में क्या नाटक होते रहे वे कभी ध्यान नहीं देते। गौरतलब है कि दैनिक भास्कर जोधपुर में संस्था के लिए कामधेनु गाय बने कुछ मठाधीश पत्रकार अपने सीनियर साथियों को जूते की नौक पर रखना चाहते हैं। मगर दैनिक भास्कर प्रबंधन और मालिकों को इस बात से कोई मतलब नहीं हैं। उल्लेखनीय है कि दिलीप कुमार पुरोहित ने कपिल भटनागर, अजय मिश्रा, सुधीर अग्रवाल, जसवीर चौधरी और संजय कुमार शर्मा को लीगल नोटिस भी भिजवाया था, मगर उसका भी आज दिन तक जवाब नहीं दिया गया। यहां बताना उचित होगा कि दिलीप कुमार पुरोहित 10 मार्च तक अवकाश पर हैं और इसकी सूचना दैनिक भास्कर जोधपुर कार्यालय को समय-समय पर भिजवाई जाती रही है। दैनिक भास्कर बहुत ही पॉवरफुल मीडिया घराना है। उसने कई कर्मचारियों की जिंदगी बर्बाद कर दी है। अब दिलीप कुमार पुरोहित को भी न्याय की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही। कोर्ट से आस थी, मगर कोर्ट ने भी करीब तीन महीनों में भी कोई एक्शन नहीं लिया।








