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Thursday, April 16, 2026, 8:47 am

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रम्मत के अमर स्वर: मुकना भा की पुण्यतिथि पर सजेगी श्रद्धा और सुरों की संध्या

स्वर्णनगरी में 23 फरवरी को संगीतमय श्रद्धांजलि सभा, फूलों की होली से दी जाएगी भावभीनी श्रद्धांजलि

कैलाश बिस्सा, जैसलमेर

स्वर्णनगरी जैसलमेर की सांस्कृतिक धरोहर में रम्मत की परंपरा एक अनमोल अध्याय है, और इस परंपरा के आधार स्तंभ रहे स्वर्गीय मुकनलाल जगानी ‘मुकना भा’ को उनकी दसवीं पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। 23 फरवरी को स्थानीय जगानी पंचायत भवन में शाम 5 बजे संगीतमय श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें शहर के गणमान्य नागरिक, रम्मत प्रेमी और श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल होंगे।

मुकना भा केवल एक नाम नहीं, बल्कि जैसलमेरी रम्मत की जीवंत आत्मा थे। होली के अनूठे रसिया के रूप में उनकी पहचान दूर-दूर तक थी। माता जगतंबा के प्रति उनकी अटूट आस्था और भक्ति ने उन्हें जन-जन का प्रिय बना दिया था। उनके दोहे, लावणी, कालीगड़ो और फाग गीतों की स्वर लहरियां आज भी लोगों के हृदय में गूंजती हैं। उनकी वाणी में लोकसंस्कृति की मिठास और भक्ति की गहराई समाहित रहती थी।

बृजवल्लभ जगानी ने जानकारी देते हुए बताया कि श्रद्धांजलि सभा में मुकना भा की स्मृति में रम्मत के दोहों की प्रस्तुति दी जाएगी। साथ ही लावणी और कालीगड़ो के पारंपरिक स्वर माहौल को भक्ति और लोक रस से सराबोर कर देंगे। कार्यक्रम में माँ जगतंबा के भजनों की विशेष प्रस्तुति भी होगी, जो श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक भाव से जोड़ने का कार्य करेगी। इसके अतिरिक्त होली के पारंपरिक फाग गीतों के माध्यम से वातावरण को उत्सवमय बनाया जाएगा।

विशेष आकर्षण के रूप में ‘फूलों की होली’ का आयोजन भी किया जाएगा। यह प्रतीकात्मक होली मुकना भा की स्मृतियों को सजीव कर देगी और उपस्थित जनसमूह को उनके साथ बिताए पलों की याद दिलाएगी। श्रद्धालु पुष्प अर्पित कर अपने प्रिय मुकना भा को नमन करेंगे और उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लेंगे।

उल्लेखनीय है कि 24 फरवरी से होलाष्टक प्रारंभ हो रहे हैं, ऐसे में यह आयोजन होली पर्व की पूर्व संध्या जैसा माहौल बना देगा। स्वर्णनगरी में होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि रम्मत की सांस्कृतिक परंपरा का महापर्व है। मुकना भा ने इस परंपरा को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके प्रयासों से रम्मत की कला को नई पहचान मिली और युवाओं में भी इसके प्रति उत्साह जागृत हुआ।

मुकना भा की सादगी, मिलनसारिता और लोकसंस्कृति के प्रति समर्पण ने उन्हें हर दिल अजीज बना दिया था। वे केवल कलाकार नहीं, बल्कि एक प्रेरणा थे। उन्होंने रम्मत को मंच पर ही नहीं, बल्कि जनमानस के हृदय में स्थापित किया। उनकी पुण्यतिथि पर आयोजित यह कार्यक्रम न केवल श्रद्धांजलि का अवसर है, बल्कि जैसलमेरी संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन का भी संदेश देता है।

आयोजकों ने स्वर्णनगरी के समस्त वाशिंदों, रम्मत और होली प्रेमियों से आग्रह किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में जगानी पंचायत भवन पहुंचकर इस संगीतमय श्रद्धांजलि सभा का हिस्सा बनें। मुकना भा की स्मृतियों को नमन करते हुए होली के महापर्व की गरिमा और उल्लास को और भी बढ़ाएं।

निश्चित रूप से 23 फरवरी की यह संध्या सुरों, भक्ति और भावनाओं का संगम बनेगी, जहां श्रद्धा के फूलों के साथ मुकना भा की अमर स्मृतियां फिर से जीवंत हो उठेंगी।

Dilip Purohit
Author: Dilip Purohit

Group Editor